@Princechau69471@KraantiKumar व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी से ज्ञान लेने पर यही होता हैं। नालंदा विश्वविद्यालय कुमारगुप्त प्रथम (गुप्त वंश) 5वीं शताब्दी और विक्रमशिला विश्वविद्यालय धर्मपाल (पाल वंश) 7वीं शताब्दी के द्वारा बनवाया गया था। और भगवान बुद्ध का जन्म 563 ईस्वी पूर्व हुआ था।
माननीय न्यायालय द्वारा बार-बार अपने आदेशों और व्याख्याओं के माध्यम से अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजातियों अत्याचार निवारण अधिनियम को कमजोर करने का काम किया जा रहा है। यह बेहद चिंताजनक और दुर्भावनापूर्ण है।
दिनांक 11 मई को माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा दिए गए आदेश में “सार्वजनिक दृष्टि” की शर्त लगाकर जातिसूचक गाली को अपराध की परिभाषा से बाहर किया गया। वहीं, कुछ महीनों पूर्व दिसंबर 2025 में कलकत्ता उच्च न्यायालय ने यह कहा कि फोन पर 'जातिसूचक' गाली-गलौज किए जाने पर SC/ST एक्ट के प्रावधान लागू नहीं होते, जो कि न्याय की मूल भावना के खिलाफ है।
मेरा सवाल है माननीय न्यायालय से- क्या अब दलितों का अपमान “लोकेशन” और “माध्यम” देखकर तय होगा? क्या चारदीवारी के भीतर या फोन पर किया गया जातीय अपमान अपराध नहीं माना जाएगा?
ऐसे फैसले यह संकेत देते हैं कि न्यायिक व्याख्या के जरिए इस सशक्त कानून के प्रभाव को सीमित किया जा रहा है, जिससे पीड़ितों को न्याय मिलने में और अधिक कठिनाई उत्पन्न हो सकती है।
हम न्यायपालिका का सम्मान करते हैं, लेकिन संविधान और सामाजिक न्याय के मूल सिद्धांतों की रक्षा के लिए ऐसे फैसलों पर सवाल उठाना भी उतना ही आवश्यक है।हम इस संबंध में शीघ्र ही माननीय उच्चतम न्यायालय में पुनरीक्षण याचिका दायर करेंगे।
कटिहार रेलवे स्टेशन पर RPF जवान ने अपनी सतर्कता और बहादुरी से बड़ा हादसा टाल दिया। चलती ट्रेन के करीब फंसी महिला को जवान ने तुरंत कार्रवाई करते हुए सुरक्षित बचा लिया। पूरा घटनाक्रम कैमरे में कैद हुआ।
#Katihar#RPF#RailwayHero#LifeSavingAct#ABPNews
@DhananjaTeewary@KraantiKumar मतलब 20% वालो से नहीं 3% वालो से TVK को जीत मिला हैं। और वाभनो ने कब से डॉ भीमराव अंबेडकर और पेरियार के आइडियोलॉजी को सपोर्ट करने लगा।
मात्र 1200 रूपए लोन न चुका पाने के कारण परजीवी समुदाय की एक महिला ने ग़रीब दलित महिला को सरेआम बेरहमी से पीटा,
दलित होना इस देश में गुनाह है, मनुवादियों का अहंकार सिर चढ़कर बोल रहा है क्योंकि जानते हैं सिस्टम में बैठे लोग उन्हीं के रिश्तेदार हैं, 🔥🔥
@Queen510619151 मुझे और मेरे बेटे को भी हुआ था ऐसा, अभी कुछ दिनों पहले मैने होमियोपेथिक dr से मिला और उन्होंने ड्रॉप वाली दवा दी थी एक दो बार लगाया ठीक हो गया है।
कुछ देर पहले ये पोस्ट की थी, अब इसे हटा दिया गया है. मैं फिर से पोस्ट कर रहा हूं 👇
बिहार के कटिहार में आंगनबाड़ी सेविका बीमार पड़ गई. अधिकारी ने कहा- बीमारी का सबूत चाहिए.
मजबूरन आंगनबाड़ी सेविका को हाथ में ड्रिप लगाकर कांपते हुए केंद्र पहुंचना पड़ा.
• कहीं सबूत के लिए कंधे पर लाश ढोई जा रही है
• कहीं नौकरी बचाने के लिए ड्रिप लगाकर काम पर जाना पड़ रहा है
ओडिशा के क्योंझर जिले में जीतू मुंडा अपनी तीन महीने पहले (26 जनवरी 2026 को) मृत हुई बहन के कंकाल को कब्र से निकालकर ले जा रहे हैं। जिस बहन का पति और इकलौती संतान पहले ही दुनिया छोड़ चुके थे और अब पूरे परिवार में सिर्फ वही अकेले जीवित बचे हैं।
अपनी बहन के बैंक खाते में जमा 19,300 रुपये निकालने के लिए मृत्यु प्रमाण पत्र और उत्तराधिकार (वारिस) प्रमाण पत्र नहीं दिखा पाने के कारण बैंक कर्मचारियों ने ‘नियमों’ का हवाला देते हुए उन्हें कई बार खाली हाथ लौटा दिया।
परेशान होकर वे सीधे श्मशान घाट पहुंचे। अपनी बहन की कब्र खोदी और उनका कंकाल बाहर निकाला। कंकाल को एक कपड़े में लपेटकर, अपने कंधे पर लादे, 5 किमी नंगे पांव चलते हुए वे सीधे बैंक के भीतर जा पहुंचे।
भ्रष्टाचार का आलम यह है कि बिना चढ़ावे के ये प्रमाण पत्र इतने कम समय में बन पाना किसी के लिए संभव नहीं है। और फिर एक तो वे गरीब, ऊपर से आदिवासी-ऐसे में इन कागजों को तुरंत जुटा पाना उनके लिए असंभव था।
वहीं, इसी बैंकिंग व्यवस्था में उद्योगपतियों के वो 11 लाख करोड़ रुपये के कर्जे चुपचाप माफ़ भी हो जाते हैं, जिससे वे अरबों-खरबों रुपये का साम्राज्य खड़ा कर लेते हैं।
ओडिशा की यह घटना व्यवस्था की संवेदनहीनता और असमानता की भयावह सच्चाई को उजागर करती है।
परम प्रतापी योद्धा, अद्भुत साहस, दूरदर्शी रणनीति और जनकल्याणकारी शासन के प्रतीक, बहुजन प्रतिपालक राजाधिराज छत्रपति शिवाजी महाराज के संबंध में यह कहना कि वे युद्धों से थककर अपना मुकुट किसी और को सौंपना चाहते थे, न केवल ऐतिहासिक रूप से असत्य है, बल्कि उनके अदम्य साहस और स्वाभिमान का घोर अपमान भी है।
प्रधानमंत्री @narendramodi जी के ‘मुँहबोले छोटे भाई’ धीरेन्द्र द्वारा नागपुर में ऐसे मंच से, जहाँ महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत की उपस्थिति में इस प्रकार का बयान दिया जाना, भाजपा-आरएसएस की उसी सोच का परिणाम है, जहाँ बहुजन नायकों के योगदान को कमतर दिखाने, उनके संघर्ष को कमजोर करने और उनके व्यक्तित्व को विकृत करने की कोशिश लगातार की जाती रही है।
इतिहास साक्षी है कि छत्रपति शिवाजी महाराज ने विपरीत परिस्थितियों में भी कभी हार नहीं मानी।उनका जीवन त्याग, संघर्ष और आत्मसम्मान की सर्वोच्च मिसाल है-न कि थककर पीछे हट जाने की कहानी।
ऐसे भ्रामक और असत्य बयानों के माध्यम से न केवल समाज को गुमराह किया जा रहा है, बल्कि नई पीढ़ी के सामने इतिहास की विकृत तस्वीर प्रस्तुत की जा रही है। यह सीधे-सीधे हमारे महापुरुषों के गौरव को ठेस पहुँचाने का प्रयास है।
हम स्पष्ट करना चाहते हैं कि बहुजन समाज अपने महापुरुषों के सम्मान के साथ किसी भी प्रकार का समझौता नहीं करेगा। इस बयान के लिए धीरेंद्र पर कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए।
छत्रपति शिवाजी महाराज केवल एक ऐतिहासिक व्यक्तित्व नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय, स्वाभिमान और बहुजन अस्मिता के जीवंत प्रतीक हैं। उनके गौरव को ठेस पहुँचाने वाली किसी भी सोच और साजिश को देश का जागरूक समाज कभी स्वीकार नहीं करेगा।
"डूब के मर जाओ....बाबासाहेब अम्बेडकर अगर संवैधानिक अधिकार तुम लोगों को न देते, तो तुम्हारे पीछे झाड़ू और गले में हांडी होती। ऐसी विचारधारा देश के अंदर थी"
उत्तराखंड के हरिद्वार में बाजार में लगे बाबासाहेब अम्बेडकर व संगठन के पोस्टर हटाने पर आजाद समाज पार्टी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष व झबरेडा़ विधानसभा से प्रत्याशी @mahaksingh8265 नगर पंचायत भगवानपुर के कार्यालय पहुंचे और जमकर लताड़ लगाई...!!
@KraantiKumar@Shailen40840272 और यही कारण हैं कि आज दोनों पार्टियों का ये हाल है ये कितने भी अपमानित हो बहुजन समाज को कम और सवर्णों को ज्यादा अहमियत देते हैं।
@bobby_shabnam@KraantiKumar कौन सही है और कौन गलत ये समाज जान चुका है आपकी सर्टिफिकेट की जरूरत नहीं है। वैसे आपके शांत सौम्य इंसान अपने समाज पर अत्याचार होता हैं तब सरक पर क्यों नहीं उतर कर इंसाफ दिलाता हैं या फिर हवेली में बैठ कर सिर्फ शांति ढूंढ रहा होता हैं।
भारतीय संविधान के निर्माता, आधुनिक भारत के शिल्पकार एवं शोषितों वंचितों व महिलाओं के मुक्तिदाता, ज्ञान के प्रतीक, विश्व रत्न बाबा साहेब डॉ. भीमराव अम्बेडकर जी की जयंती पर उन्हें शत-शत नमन एवं विनम्र आदरांजलि और आप सभी को हार्दिक बधाई व मंगलकामनाएं।
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