@AshokMeghwal_ लगता है आज कल @Khalbaali का घर आना जाना हो गया, तेरी कोई गलती नहीं, रिच पाने के लिए गहलोत जी के नाम का सहारा ले रहा है, वैसे भी जानता ही होगा कि राजस्थान की राजनीति का अंतिम सत्य कौन है😇
राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री आदरणीय श्री अशोक गहलोत जी को जन्मदिन की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं ।
मैं ईश्वर से आपके उत्तम स्वास्थ्य एवं दीर्घायु जीवन की कामना करता हूँ ।
@ashokgehlot51
केंद्रीय गृह मंत्री श्री @AmitShah राजस्थान पधार रहे हैं। आपका यहां स्वागत है।
आपसे अपेक्षा है कि वे आज अपनी 'राजनीतिक चुप्पी' तोड़ेंगे और बताएंगे कि स्व. कन्हैयालाल जी के परिवार को न्याय कब मिलेगा? आपके गृह मंत्रालय के अधीन नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) ने घटना की रात ही यह केस राजस्थान पुलिस से ले लिया था पर NIA के पास ये केस होने के बावजूद अभी तक न्याय क्यों नहीं मिला है? उनका परिवार अभी तक न्याय के लिए क्यों भटक रहा है।
आप तो चुनाव में 5 लाख बनाम 50 लाख का असत्य बोलकर भ्रम फैलाने के चैंपियन थे। स्व. श्री कन्हैयालाल के परिवार ने आपके झूठ को एक्सपोज कर बता दिया है कि उनके परिवार को 50 लाख रुपये का मुआवजा एवं दोनों पुत्रों को सरकारी नौकरी मिली थी। क्या आप राजस्थान की जनता से असत्य बोलने के लिए माफी मांगेंगे? यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि जिस मुद्दे पर आपने चुनाव लड़ा, उसे अब भुला दिया गया है।
आज राजस्थान में कानून का इकबाल खत्म हो चुका है। रंगदारी, दुष्कर्म और माफियाराज से जनता त्रस्त है। बजरी माफिया रोज हत्याएं कर रहा है।
हद तो तब हो गई जब दूसरे राज्यों की पुलिस यहां आकर एक्शन करती है और मुख्यमंत्री जी कहते हैं राजस्थान पुलिस को जानकारी ही नहीं है।
गृह मंत्री जी, भाषणों से परे हटकर राजस्थान की बिगड़ती कानून व्यवस्था पर जवाब दीजिए।
आदरणीय गहलोत साहब
प्रोफाइल पिक्चर तो हम भी बदल लेंगे लेकिन बताया यह जा रहा है कि आज जो संकट अरावली पर आया है उसके असली सूत्रधार आप ही हैं।
महोदय, यह कैसे संभव है कि आपकी कलम से हुए एक बदलाव के कारण सामने खड़े संकट को आप एक प्रोफाइल पिक्चर बदलकर रोक सकें?
हम मानते हैं कि आप बहुत अच्छे मजाक कर लेते हैं लेकिन यह वाला मजाक "अच्छे मजाक" की श्रेणी में नहीं आता है। आपने अरावली की जो श्रेणियां तय की हैं, उसी हिसाब से मजाक की श्रेणियां भी होती हैं और इस लिहाज से मजाक करना भी चाहिए।
यह 1980 का कालखंड नहीं है जब लोगों को कुछ भी पता नहीं होता था और राजनेता उन्हें चाहे जैसे ठेल लिया करते थे। चाहे जैसे उनके साथ खेल लिया करते थे।
सादर