अयोध्या के पावन धाम में श्री राम जन्मभूमि मंदिर म���ं ध्वजारोहण समारोह का हिस्सा बनना मेरे लिए अत्यंत भावविभोर करने वाला अनुभव रहा। शुभ मुहूर्त में संपन्न हुआ यह अनुष्ठान हमारे सांस्कृतिक गौरव और राष्ट्रीय एकता के नए अध्याय का उद्घोष है। राम मंदिर का गौरवशाली ध्वज, विकसित भारत के नवजागरण की संस्थापना है। ये ध्वज नीति और न्याय का प्रतीक हो, ये ध्वज सुशासन से समृद्धि का पथ प्रदर्शक हो और ये ध्वज विकसित भारत की ऊर्��ा बनकर इसी रूप में सदा आरोहित रहे.....भगवान श्री राम से यही कामना है। जय जय सियाराम।
ज्ञान में कमी नहीं होनी चाहिए। गवई जी नवीं पंक्ति में कहते हैं कि 'संस्था उन्हें प्रश्न करे जिनके पास शक्ति है', और अंतिम पंक्ति में कहते हैं कि '(प्रजातंत्र को प्रयोग में लाने के लिए) हमें साहसिक कृत्य करते रहना चाहिए।'
मुझे यह पूछना है कि शक्ति तो सुप्रीम कोर्ट के पास असीम है, तो उन पर प्रश्न उठाने पर SC/ST एक्ट से ले कर अवमानना क्यों? न्यायाधीश या न्यायालय क्या प्रजातंत्र का हिस्सा नहीं जि��की आलोचना का साहसिक कृत्य नहीं होना चाहिए?
'गवई जी के जूते'
PS: जिन्हें लगता है कि तुम्हारे गैंग से मैं डरता हूँ, तो आज का लाइव अवश्य देखना! गवई एक घटिया, अंडिजर्विंग जज है और उस पर कंटेम्प्ट का केस चलना चाहिए।