दान चोरी हुई, लेकिन कुर्सी नहीं छूटी।
अगर ट्रस्ट चलाने की स्थिति नहीं है, तो अध्यक्ष बने रहने का नैतिक आधार भी नहीं है।
सवाल चोरों का ही नहीं, उन्हें नियुक्त करने वालों का भी है।
जवाबदेही चाहिए, बलि का बकरा नहीं। पूरे ट्रस्ट की जाँच और पुनर्गठन होना चाहिए।