जब @BJP4India ऐसे लोगों पर किसी भी प्रकार की कार्रवाई से रोकती है, इनके लिए @BhajanlalBjp जी की @PoliceRajasthan के पास समय
नहीं होता, तो आप समझ जाइए कि यह सब सोच-समझ कर होने दिया जाता है। दलित-पीड़ित के वोट के लिए @narendramodi किसी भी सीमा तक गिर सकते हैं। और वो देंगे नहीं।
अभिजीत दीपके की दादी के अंतिम संस्कार में दीपके नहीं पहुंचे।
ख़ुद को दलित बताने वाला अभिजीत दिपके असल में बौद्ध है जिसका हिंदू और हिंदू धर्म से कोई लेना देना नहीं..!!
देवा द्विवेदी की मां की चित्कार कौन सुनेगा?
IIT बॉम्बे का बच्चा, देश का बच्चा था लेकिन देवा मात्र ब्राह्मण परिवार का ही बच्चा है.
देवा के जाने का किसी को दुख नहीं है. SC-ST act ने एक और जान ले ली
आप मृतक की मां को सुनिए
भाजपा ने आंदोलन खत्म कराने के लिए अपने सवर्ण नेताओं को आगे किया, लेकिन आंदोलन हर दिन तेज हो रहा है।
आज इंदौर में सवर्ण समाज सड़कों पर है। आरक्षण में सुधार, UGC फैसला वापस और SC/ST एक्ट में सुधार की मांगें मानें, वरना अगली लड़ाई दिल्ली में होगी।
फर्जी SC ST ACT के दबावों में देवा दुबे ने आत्महत्या कर ली
कोई मीडिया इसको नहीं दिखा रहा
दलित होता तो शायद नेता से लेकर मीडिया तक पैर पकड़ लिए होते
ब्राह्मण था यही गलती है
चित्रकूट, उत्तर प्रदेश में महज 19 साल के एक युवक की आत्महत्या की खबर दिल दहला देने वाली है। परिवार का आरोप है कि SC/ST एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज होने के बाद से वह भारी मानसिक तनाव में था।
एक 19 साल का नौजवान, जिसके सामने पूरी जिंदगी पड़ी थी, आज इस दुनिया में नहीं है। परिवार उजड़ गया, सपने बिखर गए। अब परिवार मामले की निष्पक्ष जांच और न्याय की मांग कर रहा है।
आखिर कब तक काले कानून के नाम पर किसी निर्दोष को मानसिक प्रताड़ना और असहनीय दबाव झेलना पड़ेगा?
कानून का उद्देश्य न्याय देना है, किसी की जिंदगी छीनने की नौबत पैदा करना नहीं। यदि किसी कानून या उसके कथित दुरुपयोग के कारण निर्दोष लोगों पर ऐसा दबाव बन रहा है, तो उसकी समीक्षा और जवाबदेही अनिवार्य है।
कानून सबके लिए समान होना चाहिए। एक तरफा नहीं l आरोपों की निष्पक्ष जांच हो, दोषियों पर कार्रवाई हो और किसी निर्दोष की जिंदगी कानून की प्रक्रिया में बर्बाद न हो। पक्षपाती न्याय के नाम पर किसी परिवार का चिराग बुझ जाना, व्यवस्था के सामने एक गंभीर सवाल है।
चंद्रशेखर रावण को अनुमति ना मिलना भाजपा सरकार की मिलीभगत है। सरकार को लगता है कि वो ये सब दिखा कर RHA वालों को यह दिखा देंगे कि देखो हमने इन्हें भी अनुमति नहीं दी। बिना अनुमति भी वो आएँगे, और हम चाहते हैं कि वो उसी रूप में आएँ जिसके लिए वो जाने जाते हैं।
मैं रावण का विरोधी हूँ, मुझे वह व्यक्ति और नेता, दोनों ही स्थिति में, बिल्कुल भी पसंद नहीं, फिर भी प्रदर्शन उसका संवैधानिक अधिकार है। सरकार को हर प्रदर्शन को अनुमति देनी चाहिए, या दो-तिहाई बहुमत से 'प्रदर्शन के मौलिक अधिकार' को संविधान से हटा देना चाहिए।
सरकार संभवतः भूल गई है कि 8 मार्च को मुझे और अन्य लोगों को कई स्थानों पर अवैध रूप से हाउस अरेस्ट किया था। कुछ दिन बाद ही स्वामी प्रसाद मौर्य को प्रो-UGC प्रदर्शन की अनुमति दी गई थी उसी जंतर मंतर पर। पटना में भी प्रो-UGC रैली की अनुमति दी गई थी।
इसलिए, यह पैंतरेबाज़ी बंद करो। चंद्रशेखर रावण को दल-बल के साथ प्रदर्शन की अनुमति मिलनी चाहिए। आपका ही पाला हुआ है, करने दीजिए ना! प्लीज़... पीलीज!
भारत में आरक्षण पर चल रही बहस के बीच दुबई के मशहूर भारतीय इन्वेस्टर अक्षत श्रीवास्तव ने जनरल कैटेगरी के छात्रों को एक बड़ी सलाह दी है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर उन्होंने लिखा कि जनरल कैटेगरी के जो छात्र मेरिट के आधार पर मुकाबला करते हैं, उन्हें मौका मिलते ही देश छोड़कर विदेश चले जाना चाहिए।
अक्षत का तर्क है कि भारत में सत्ता में कोई भी राजनीतिक दल आए, आरक्षण खत्म नहीं होने वाला है। उन्होंने कहा कि छात्रों को सरकार या राजनीति से उम्मीद रखने के बजाय अपनी मेहनत और कमाई पर फोकस करना चाहिए। उन्होंने आर्थिक आजादी पाने के लिए यूएई, थाईलैंड, जापान और सिंगापुर जैसे देशों का रुख करने का सुझाव दिया। उनका मानना है कि कई देशों में आबादी घट रही है और वहां हुनरमंद लोगों की काफी जरूरत है।
कभी-कभी तो लगता है ये सही है।
क्या आरक्षण हटाओ आंदोलन का राम नाम सत्य हो गया है...जुलाई 2026 में NEET पेपर लीक के दौरान फटी बनियान दिखाकर सवर्णों का चेहरा बने हर्ष दुबे का 56 लाख फॉलोअर्स वाला 'RHA' आंदोलन क्या ख़त्म हो गया? सरकार को दी गई डेडलाइन बीत चुकी है, लेकिन अब हर तरफ चुप्पी छाई है...
इस पूरे तूफ़ान में, जहां बड़े-बड़े सूरमा चुप थे, वहां अजीत भारती ने बेबाकी से सवर्णों और मेरिट की आवाज़ उठाई...यहीं वजह है कि जनता उनके साथ खड़ी है..आखिर इस आंदोलन के बाद क्या बचा और क्या ये खामोशी आने वाले राजनीतिक असंतोष का संकेत है?..या सवर्ण युवाओं का ये गुस्सा आने वाले चुनावों में कोई नया राजनीतिक समीकरण बनाएगा?
आरक्षण, राजनीति और सवर्ण समाज के बदलते मूड की पूरी कहानी देखिए मेरा नया वीडियो
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@opinionwalla
@ajeetbharti@NijiSachiv@AjeetBhartii@Harshdubey9956
सिर्फ शब्दों को पढ़िए, और ब्राह्मणों के बारे में सोंच देखिए।
@Uppolice क्या कुछ कार्यवाही होगी? या फिर सिर्फ ब्राह्मणों पर चुन चुनकर कार्यवाही होगी?
आज के समय में इस देश का सबसे ज्यादा शोषित और पीढ़ित ब्राह्मण समाज है जिसके हक में कोई बोलने को तैयार नहीं है? लेकिन यदि ब्राह्मण प्रतिक्रिया कर दे तो फिर कानून की बांहें बड़ी बड़ी हो जाती हैं।
शर्मिष्ठा पनोली को मुहम्मद पर सच्चाई बोलने के आरोप में पुलिस ने उठा लिया, निशु आजाद रामजी, दुर्गा माता और रामायण को मिथक बताकर गालियाँ दे रही है फिर भी आज़ाद घूम रही है।
पोस्ट में एक तरफ शर्मिष्ठा को पुलिस गाड़ी में घसीटते हुए दिखाया गया है, दूसरी तरफ निशु की तस्वीर फर्क साफ़ दिख रहा है कि किसके धर्म की भावनाएँ जल्दी आहत होती हैं।
यही है वोक सेकुलरिज्म का असली चेहरा हिन्दू देवताओं की बेइज्जती पर चुप्पी, इस्लाम पर सवाल उठाने पर तुरंत गिरफ्तारी। इस दोहरे मापदंड ने देश को खोखला कर दिया है।
एक ही देश... एक ही कानून... आरोप भी एक जैसे... तो फिर कार्रवाई का पैमाना अलग-अलग क्यों?
15 से 20 दिनों में SC/ST Act के तहत दर्ज मामलों की जमीनी हकीकत ये है...
स्वतंत्र भारद्वाज: 14 दिन की न्यायिक हिरासत
अजीत भारती: अग्रिम जमानत याचिका खारिज
राहुल गांधी: कोई बड़ी कार्रवाई नहीं
आशुतोष रांका: कोई बड़ी कार्रवाई नहीं
सवाल किसी व्यक्ति विशेष का नहीं, सवाल है 'कानून के निष्पक्ष और समान पालन' का...
सवाल किसी व्यक्ति विशेष का नहीं, सवाल है.. क्या देश में कानून सबके लिए बराबर है, या फिर राजनीतिक और सामाजिक हैसियत देखकर कार्रवाई तय होती है? क्या देश में कानून सबके लिए बराबर है, या फिर राजनीतिक और सामाजिक हैसियत देखकर कार्रवाई तय होती है?
पूरा विश्लेषण देखिए वीडियो में मेरे सोशल मीडिया चैनल्स पर
#SCSTएक्ट
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@ajeetbharti@NijiSachiv@AshutoshRanka@CJP_for_India@BhimArmyChief
स्वतंत्र को 14 दिन की जेल, संजय आजाद खुलेआम बाहर घूम रहा है
एक देश में दो विधान, आज पूरा देश देख रहा है….. ये अत्याचार और अन्याय की पराकाष्ठा है
स्वतंत्र भारद्वाज से कई गुना ज़्यादा बड़ा अपराध संजय आजाद और उसकी नाबालिग बेटी का है।
CJP वाले आशुतोष रांका पर राजस्थान में Sc St Act लगा, राहुल गांधी पर उत्तराखंड में Sc St Act लगा, दोनों केस में गिरफ्तारी का नामोनिशान नहीं। लेकिन स्वतंत्र भारद्वाज के तीन महीने पुराने मामले में अचानक Sc St Act जोड़ दिया गया और उसी दिन गिरफ्तारी भी हो गई। अब बताओ, कानून एक है या हर शख्स के लिए अलग-अलग ड्राफ्ट छपवाया जाता है?
संविधान सबके लिए बराबर है, ये किताब में लिखा है। लेकिन अमल में देखो तो एक तरफ कोई गिरफ्तार ही नहीं होता, दूसरी तरफ पुराना केस अचानक जीवित हो जाता है।
अगर कानून का यही हाल रहा तो लोग पूछेंगे ही कि ये संविधान सबके लिए एक है या सिर्फ कागज पर छपा हुआ है।