योगी जी ने बिल्कुल ठीक किया है। ऐसे खतरनाक लोगों के खिलाफ सख्त कार्यवाही होनी ही चाहिए। योगी जी ने ठीक आदेश दिया है कि उत्तर प्रदेश के सरकारी स्कूलों में अव्यवस्था को दिखाने के लिए जो कोई भी वीडियो बनाए उसके खिलाफ तुरंत मुकदमा दर्ज कर कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए।
सोचो जो लोग स्कूलों में सुधार की मांग उठा सकते हैं वे कितने खतरनाक लोग होंगे। अरे भैया कांवड़ियों की सेवा में सरकार ने कोई कमी करी हो तो बताओ। कोई सुझाव देना है तो इस विषय में दो कि कावड़ियों की सेवा में और क्या-क्या सुधार किए जा सकते हैं। एक तुम लोग हो कि स्कूलों में सुधार जैसी वाहियात बातें उठाते हो। देशद्रोहियों तुम्हारा सही इलाज योगी बाबा जैसे देशभक्त ही करेंगे।
और फिर तुम स्कूलों में सुधार चाहते ही क्यों हो? इससे भी पहले तो यह बताओ कि तुम स्कूल ही क्यों चाहते हो? स्कूल-कॉलेजों की पढ़ाई में दस-बीस साल खराब करने के बाद तुम लोग जो हासिल करोगे जब उसे डायरेक्ट हासिल करने की सुविधा तुम्हारे पास है तो स्कूलों में क्यों समय बर्बाद करना। मंत्र पढ़ो, पूजा करो, कांवड़ उठाओ और मनोवांछित फल की प्राप्ति करो। इसलिए अपने बाबा जी लगातार सरकारी स्कूलों को बंद कर रहे हैं। न रहेगा बांस, न बजेगी बांसुरी।
मोदी जी लाल किले से भाषण देने मात्र से देश विकसित नहीं हो जाएगा आप ने तो इतनी ऊपर जाके आजादी दिवस मना लिए यें बच्चे कहा जाएं और कोचिंग फ्री बाद में करना पहले इन बच्चों कों मूलभूत सुविधाएं तो उपलब्ध कराइये.
जानिए हमारे देश के मुद्दे—
👥 जनता के मुद्दे :-
1. शिक्षा
2. स्वास्थ्य
3. रोजगार
4. महंगाई
5. गरीबी
6. पेपर लीक और भर्ती में भ्रष्टाचार
7. किसान की आय
8. महिला सुरक्षा
9. साफ पानी और हवा
10. सड़क, बिजली और बुनियादी सुविधाएँ
🏛️ सरकार के मुद्दे :-
1. वंदे मातरम्
2. पाकिस्तान
3. हिंदू राष्ट्र
4. नेहरू को कम दिखाना
5. विपक्ष ने 70 साल में क्या किया?
6. राष्ट्रवादी कौन, देशद्रोही कौन ?
7. सवाल पूछने वाला कहीं “दिमागी नक्सल” तो नहीं
🗳️ विपक्ष के मुद्दे :-
1. EVM
2. वोट चोरी
3. जातिगत जनगणना
4. संविधान खतरे में है
5. सरकार गिराओ-बचाओ
6. कौन किस पार्टी में चला गया
7. संसद में किसने क्या बोल दिया
📺 मीडिया के मुद्दे :-
1. सीमा हैदर का छठा बच्चा
2. मोदी जी के reel का रिकॉर्ड बना
3. हिंदू-मुस्लिम डिबेट
4. पाकिस्तान में क्या चल रहा है
5. नेता की रैली में कितनी भीड़ आई
6. सोशल मीडिया पर कौन-सा बयान , बन्दा वायरल है उसको जल्दी बुलाओ ।
राजनीति के मुद्दे बहुत हैं साहब…
बस जनता के मुद्दे ही राजनीति के मुद्दे नहीं बन पा रहे।
📍राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, थानागाजी, जोधावास, अलवर।
स्कूल की टूटी पट्टियाँ, जर्जर भवन और हर पल हादसे का खतरा क्या किसी बच्चे की जान जाने का इंतज़ार किया जा रहा है ?
उत्तराखंड में एक बहादुर बेटी ने CM पुष्कर सिंह धामी के सामने खड़े होकर BJP सरकार के भ्रष्टाचार की पोल खोल दी।
बच्ची ने बताया 👇
मैंने ताईक्वांडो में नेशनल लेवल पर गोल्ड मेडल जीता था, लेकिन मैं इंटरनेशनल खेलने नहीं जा सकी, क्योंकि मुझसे 1.5 लाख रुपए की घूस मांगी गई।
CM धामी ने ये सुनते ही बच्ची से कहा- "अच्छा, बैठ जाओ.. कोई बात नहीं"
इसके बाद इस कार्यक्रम का Live सरकार के हर प्लेटफॉर्म से डिलीट कर दिया गया, इसमें CM और BJP का सोशल मीडिया शामिल है।
BJP सरकार में घूसखोरी और घपलेबाजी युवाओं के सपनों को रौंद रही है।
और शिकायत करने पर खुद मुख्यमंत्री इस भ्रष्टाचार को दबाने में लगे हैं।
शर्म आनी चाहिए!
SIAM (Society of Indian Automobile Manufacturers) की एक रिपोर्ट आई है, जिसमें साफ़ लिखा है कि E20 में बहुत ज़्यादा chloride और moisture है, जिससे आपकी गाड़ियाँ ख़राब हो रही हैं। मोदी सरकार ने SIAM पर दबाव डालकर वो रिपोर्ट वापिस करवा दी। क्यों?
जब science और engineering कह रहे हैं कि E20 ख़राब है, तो मोदी सरकार इसे देश पर जबरन क्यों थोप रही है?
Thank you, uncle, for this wisdom.
अमीर बनो। अमीर नहीं बन सकते हो तो Attractive बनो।
अगर Attractive नहीं बन सकते, तो Intelligent बनो।
Intelligent नहीं बन सकते, तो Confident बनो।
Confident नहीं बन सकते, तो Disciplined बनो।
क्योंकि अमीर पैदा होना हमारे हाथ में नहीं है।
खूबसूरत दिखना भी हमारे हाथ में नहीं है।
हर किसी का IQ भी एक जैसा नहीं होता।
लेकिन...
सुबह समय पर उठना,
अपना वादा निभाना,
हर दिन मेहनत करना,
और बिना बहाने के लगातार आगे बढ़ना — ये सब हमारे हाथ में है।
Discipline वो आखिरी हथियार है जो हर इंसान को मिला है.
और अगर इंसान आखिरी हथियार भी इस्तेमाल न करे, तो फिर जिंदगी को बदलने का कोई option नहीं रहता.
अब ये आपके ऊपर है कि आप Discipline चुनते हैं या Excuses.
तर्क है जो मंदिर आंदोलन में शामिल नहीं थे वो चढ़ावा चोरी पर कैसे बोल सकते हैं ।इसी आधार पर कहा जा सकता है जिनके पुरखे आज़ादी के आंदोलन में शामिल नहीं थेयाअंग्रेजों के समर्थक थे उन्हें देश में होने वाली किसी गड़बड़ी पर सवाल उठाने का हक नहीं है क्या?मुद्दों पर बोलने का हक सबको है।
मुझे सिर्फ़ इतना जानना है कि राजनीति का अंतिम उद्देश्य सत्ता का विस्तार है... या हर भारतीय का जीवन बेहतर बनाना?
प्रधानमंत्री साहब हों, भाजपा हो, गडकरी जी हों... सबकी अपनी-अपनी व्यक्तिगत उपलब्धियाँ हैं। मीडिया भी उन पर खूब तालियाँ बजाता है।
लेकिन मेरा सवाल कुछ और है।इन सबके बीच...
आज देश के लिए कितना क्या बदला?
गरीब की ज़िंदगी कितनी बदली?
बेरोज़गार का जीवन कितना बदला?
किसान की चिंता कितनी कम हुई?
बल्कि हालात यह हैं कि खाने से लेकर दवाइयों तक में मिलावट है।
इन सवालों पर चर्चा कौन करेगा?
मोदी जी ने यह रिकॉर्ड बना दिया...भाजपा इतनी बड़ी हो गई...फलाँ नेता ने यह कर दिया...किसी के बेटे की 15,000 करोड़ रुपये की कंपनी बन गई...
लेकिन इन सब से देश की जनता को क्या मिला?
आज भी छात्र को पेपर लीक से, गरीब को महँगाई और मिलावट से लड़ना पड़ रहा है...
किसी को इनके निजी रिकॉर्ड से क्या लेना-देना है?
देश का विकास केवल नेताओं के रिकॉर्ड, चुनावी जीत, adani ambani की संपत्ति या bjp के राजनीतिक विस्तार से नहीं मापा जाएगा।
देश की महानता उसमें है, जब उसका आम नागरिक भी महसूस करे कि उसका जीवन पहले से बेहतर हुआ है।
💔- कभी मंदिर से चोरी की खबर आती है।
कहीं ईवीएम के जलने की चर्चा हैं।
कभी शिक्षा मंत्रालय में आग लग जाती है।
कभी होटल तो कभी library में आग लगने से लोग जान गंवा देते हैं और फायर ब्रिगेड वक़्त पर नहीं पहुँच पाती।
कहीं अस्पतालों के बाहर इलाज के लिए तरसते लोग...
तो कहीं स्कूलों की छत गिर जाती है।
कभी पेपर लीक से लाखों सपने टूट जाते हैं ...
तो कहीं न्याय की उम्मीद में उम्र निकल रही है।
आए दिन भ्रष्टाचार की खबरें, योजनाओं में घोटालों के आरोप है।
प्रदूषित हवा...गंदा पानी...टूटी सड़कें, गिरते पुल हैं।
महँगाई से जनता की जेब पर बढ़ता बोझ हैं।
आखिर कब तक?
कब तक इस देश का आम आदमी हर मोर्चे पर समझौता करता रहेगा?
खाने में मिलावट स्वीकार कर लो...
शिक्षा में खामियाँ स्वीकार कर लो...
स्वास्थ्य व्यवस्था की बदहाली स्वीकार कर लो...
भ्रष्टाचार स्वीकार कर लो...
बेरोज़गारी स्वीकार कर लो...
और फिर कह दो - "ऐसे ही चलता है।"
नहीं...
ऐसे नहीं चलता।
समस्याओं को नियति मानकर हम देश को कमज़ोर कर रहे हैं
दुनिया के किसी भी विकसित देश ने चुप रहकर विकास नहीं किया।
वहाँ नागरिकों ने सवाल पूछे, जवाब माँगे और व्यवस्था को जवाबदेह बनाया।
आज भारत में करोड़ों ईमानदार लोग हैं- ईमानदार शिक्षक हैं।ईमानदार डॉक्टर हैं।ईमानदार अधिकारी हैं।ईमानदार पत्रकार हैं।ईमानदार कर्मचारी हैं।
लेकिन यदि ये सब अपने-अपने डर, स्वार्थ और मजबूरियों में चुप बैठे रहेंगे तो कुछ भी नहीं बदलेगा।
देश पीछे जा रहा है, क्योंकि गलत को देखकर भी बहुत लोग चुप हैं।
जिस दिन इस देश का आम नागरिक यह तय कर लेगा कि उसके बच्चों को शुद्ध भोजन चाहिए, अच्छी शिक्षा चाहिए, बेहतर स्वास्थ्य व्यवस्था चाहिए, निष्पक्ष परीक्षाएँ चाहिए, सुरक्षित शहर चाहिए और भ्रष्टाचार मुक्त व्यवस्था चाहिए...
उस दिन से बदलाव शुरू होगा।
गलत को गलत कहने की कीमत चाहे जो हो, चुप मत रहिए।
यह लड़ाई किसी दल, नेता या सरकार के खिलाफ नहीं है।
यह लड़ाई भारत के भविष्य के लिए है।
One guy is looting money by forcing Ethanol
Another is land grabbing for his real estate empire
One is making money from leaking exam papers
Another is looting by selling the Nicobar Island
Top to bottom, everything is corrupt and compromised in this Modi govt.
ग़ुलामी! जानते हैं क्या होती है? इस विडीओ में समझ आएगा।
समस्या भाषा नहीं है, नरेंद्र मोदी अंग्रेज़ी नहीं बोल पाते, इसलिए हिन्दी बोल रहे हैं और अनुवादक अंग्रेज़ी में बोल रहा है, यहाँ तक कोई दिक़्क़त नहीं है।
दिक़्क़त है शब्दों में, दिक़्क़त है बॉडी लैंग्वेज की, दिक़्क़त है राग-दरबारी गाने से। आमतौर पर अमेरिका के राष्ट्रपति को 'मिस्टर प्रेसिडेंट' कह कर सम्बोधित किया जाता है। लेकिन यहाँ नरेंद्र मोदी उन्हें बार-बार 'एक्सेलेन्सी' कह रहे हैं। ये है सबसे बड़ी ग़ुलामी की निशानी।
अब आते हैं शब्दों पर। नरेंद्र मोदी, डॉनल्ड ट्रम्प की किस बात के लिए भूरि-भूरि प्रशंसा कर रहे हैं? पूरी दुनिया में तहलका मचाने के लिए? पश्चिमी एशिया में कौन सी शांति स्थापित की ट्रम्प ने, जिसकी नरेंद्र मोदी इतनी तारीफ़ किए जा रहे हैं?
हमारे नाविक मारे गए, उसके लिए इतने मीठे शब्दों में अनुनय-विनय? कि उनकी जान की रक्षा महत्वपूर्ण है? माना कि डिप्लोमैटिक बातचीत में आप किसी का कॉलर नहीं पकड़ सकते, लेकिन इतना घिघियाया भी नहीं जाता। आपको बोलना चाहिए था कि भारत शान्ति का पक्षधर ज़रूर है, लेकिन भारत की सेनाओं ने चूड़ियाँ नहीं पहन रखी हैं। अमेरिका की ऐसी कोई भी धृष्टता, हमारे सम्बन्ध हमेशा के लिए चौपट कर सकती है।
आप हाथ में पर्ची लिए एक-एक लाइन डर-डर के बोल रहे हैं, आपका हलक़ सूखा जा रहा है। बुला लीजिए किसी बॉडी लैंग्वेज एक्स्पर्ट को, और पूछिए उससे कि क्या ये विडीओ देख कर ऐसा नहीं लग रहा है कि शहंशाह के दरबार में बैठा एक मुलाज़िम, उस शहंशाह की शान में क़सीदे पढ़ रहा है?
पुराने ज़माने में अगर बादशाह सलामत किसी को चाकू फेंक कर मारें और निशाना चूक जाए तो दरबारी कहते थे कि 'ख़ंजर ने ना-फरमाबरदारी कर दी' मतलब चाकू ने महराज के आदेश की अवहेलना की है। आप भी कुछ वैसा करते नज़र आ रहे हैं।
@narendramodi जी, पूरी दुनिया में एक सनकी ने जीना हराम कर रखा है, और आप उसे 'शान्ति के प्रयासों' के लिए धन्यवाद कर रहे हैं?
बेहद शर्मनाक है ये!
Where have the 500 National flags disappeared from Delhi ?
AAP Govt installed 500 tall National flags across delhi as a symbol of national pride & patriotism. I don’t see them now.
हमने वीडियो यूँ ही नहीं बनाया था। सवाल किसी एक चैनल, एक पत्रकार या एक खबर का नहीं था। सवाल उस nature का था जिसमें पूरी तस्वीर दिखाने के बजाय उसका एक हिस्सा दिखाया जाता है।
2016 में subsidised cylinder - 12/yr
2025 में subsidised cylinder - 9/yr
2026 में subsidised cylinder- 4/yr
जब 12 सिलेंडर से 9 और फिर 4 सिलेंडर तक की यात्रा को बड़ी राहत बनाकर पेश किया जाता है, तब समझ आता है कि आईना दिखाने की ज़रूरत क्यों पड़ती है।हमारा उद्देश्य किसी की मानहानि नहीं, बल्कि उन सवालों को उठाना था जिन्हें आम नागरिक महसूस करता है लेकिन अक्सर TV पर नहीं देख पाता।
आईना दिखाना अगर अपराध है, तो फिर सवाल पूछना भी अपराध मान लीजिए।
आज लोग मानहानि के मुकदमे को सही ठहरा रहे हैं, लेकिन कोई यह नहीं पूछ रहा कि आखिर वह वीडियो बना क्यों था। आईना चुभता इसलिए कि वह सच दिखा रहा होता है।
भारत शेयर मार्केट कैपिटलाइज़ेशन यानी स्टॉक मार्केट की वैल्युएशन रैंकिंग में फिसलकर सातवें स्थान पर पहुंच गया है. दक्षिण कोरिया की रैंकिंग छह है. वो भारत से आगे निकल गया है. इससे पहले भारत को यहां ताइवान ने पीछे छोड़ दिया था.
बुलेट ट्रेन, 5 ट्रिलियन इकोनॉमी, विश्वगुरु बनने की बाते है, और 1 लाख स्कूलों में बिजली नहीं, वही 98,500 स्कूलों में बेटियों के लिए शौचालय नहीं।
जिस देश के बच्चों को बुनियादी सुविधाएँ न दे पा रहे हो हम तो सच में आत्ममंथन की जरूरत है #education_system
देश के इन हालातों के लिए इस देश की मीडिया पूरी तरह जिम्मेदार है जिसने सत्ता की एक तरफा तरफदारी की और विपक्ष और देश के मुद्दों पर सवाल करने वालों को दुश्मन की तरह पेश किया।
आज YouTube मीडिया जर्नलिस्ट तक TV मीडिया को गलत कहते और रोस्ट करते दिख जाएंगे...
आज back to back paper leak हो रहे हैं, परीक्षाएँ cancel हो रही हैं, सरकार back foot पर है, असहाय महसूस कर रही है, मगर TV मीडिया और उनके so called बड़े anchors इस दर्द को अपना दर्द मानकर सरकार को बचाने के लिए बौखलाहट में कुछ भी बयान दे रहे हैं।नैतिकता भी कोई चीज़ होती है....
जैसा अंजना ने इस व्यवस्था में सबसे बड़ा दोषी YouTube Teachers को बता दिया और 2 कौड़ी तक का कह दिया.....यदि किसी व्यक्ति विशेष से असहमति थी तो उसका नाम लेकर आलोचना करती।
इसके लिए India Today @aroonpurie को और अंजना को सार्वजनिक स्पष्टीकरण और माफ़ी जारी करनी चाहिए, India Today के हर platform का boycott होना चाहिए और किसी भी शिक्षक को कभी वहाँ नहीं जाना चाहिए।
हमें 2 कौड़ी का कह देना उन छात्र समुदाय के दिल पर भी आघात है जो हमें गुरु मानते हैं...
अगर आज आप अपने घर में पढ़ रहे बच्चों से... सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे बच्चों से पूछेंगे, तो हमारे योगदान को आपको बता पाएंगे...
पिछले 10 वर्षों से गणित पढ़ाने के साथ मैं बेरोज़गारी, भर्ती प्रक्रिया की खामियों, पेपर लीक और छात्रों के अधिकारों की लड़ाई भी लड़ रहा हूँ।
जिसने वर्षों तक पत्रकारिता को TRP, प्रोपेगेंडा और सत्ता के पक्ष-विपक्ष की लड़ाई में बदल दिया हो, उसे शिक्षकों को 'धंधेबाज' कहने से पहले आत्ममंथन करना चाहिए।
शिक्षा में गलत लोग भी हैं।
लेकिन पत्रकारिता में भी हैं।
राजनीति में भी हैं।
व्यापार में भी हैं।
तो क्या कुछ गलत लोगों के कारण पूरे शिक्षक समाज को "दो कौड़ी का" कह दिया जाएगा?
anjana शिक्षक का सम्मान कमाने में वर्षों लगते हैं।
भर्तियाँ अटक रही थीं,
लाखों युवाओं की उम्र निकल रही थी,
तब आपके स्टूडियो की आवाज़ कहाँ थी?
शिक्षकों ने पैसे लेकर शिक्षा दी है।
लेकिन पैसे लेकर किसी राजनीतिक दल का प्रवक्ता बन जाना,
व्यवस्था की हर गलती पर पर्दा डालना,
और जनता के असली मुद्दों से ध्यान भटकाना...
यह सिर्फ पत्रकारिता का पतन नहीं,
बल्कि अपने पेशे के साथ गद्दारी है।
शिक्षक फीस लेकर ज्ञान देता है,
मेहनत करवाता है,
बच्चे का भविष्य बनाता है
शिक्षकों ने पैसे लेकर पढ़ाया है,
देश के लाखों युवाओं को रोजगार तक पहुँचाया है।
लेकिन गलत को सही और सही को गलत साबित करने की कीमत लेकर काम करना,
समाज और लोकतंत्र दोनों के साथ विश्वासघात किसने किया ?