मैडम:का नाम हिना खातून है।
मैडम:बिहार की रहने वाली है।
मैडम:लखनऊ में दस साल से जॉब करती है।
मैडम:7 साल से अभिमन्यु से रिलेशनशिप में थी।
मैडम:अपने बॉयफ्रेंड अभिमन्यु का पूरा खर्चा उठाती थीं।
मैडम:अभिमन्यु पर शादी झांसा देकर यौन शोषण का आरोप लगा रही है।
मैडम:2महीने से थाने का चक्कर लगा रही है।
मैडम:की बातों को नहीं सुना जा रहा है।
मैडम:अभिमन्यु और पुलिस पर जितना आरोप लगा रही है, मानो ये दूध की धुली है।
भाजपा को जंतर मंतर वाला पढ़ा लिखा युवा नहीं चाहिए..उसे ये वाला युवा चाहिए…ये वाला युवा कांवड़ निकालता है…ये वाला युवा सरकार से कुछ नहीं मांगता है..ये वाला युवा सरकार को किसी भी चीज के लिए जिम्मेदार भी नहीं ठहराता है…ये वाला युवा जो मांगता है भगवान से मांगता है…अच्छे बुरे के लिए भगवान को जिम्मेदार ठहराता है..ये वाला युवा हर चीज के लिए भगवान को उत्तरदायी मानता है..इसीलिए भाजपा इस वाले युवा के ऊपर फूल बरसाती है…और जंतर-मंतर वाले युवा पर बंदूकों से पैलेट दागती है..आंसू गैर के गोले दागती है..PRAGYA KA PANNA पर पूरी रिपोर्ट- कुछ देर में... https://t.co/HtlvGZ0lKk
उत्तर प्रदेश बस्ती.✊️
आईमा अंसारी ने बिना कोचिंग के घर पर पढ़ाई करके NEET में शानदार सफलता हासिल की।
आईमा अंसारी ने ऑल इंडिया रैंक 10,552 और ओबीसी रैंक 5,235 प्राप्त की।
दो कमरों के छोटे से घर में रहने वाला बेहद गरीब परिवार,आर्थिक तंगी
लेकिन इन सबके बावजूद गरीबी को हराने का हौसला और मेहनत ने आईमा को इस मुकाम तक पहुँचा दिया। congratulations 👏 💐
इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन।💔
निज़ामाबाद (आज़मगढ़) के माननीय विधायक जनाब आलम बदी साहब का इंतकाल अत्यंत दुःखद है। उनके निधन के साथ राजनीति में सादगी, ईमानदारी और शुचिता का एक अहम दौर समाप्त हो गया।
अल्लाह तआला मरहूम की मग़फ़िरत फ़रमाए, उनकी तमाम ख़ताओं को माफ़ करे और उन्हें जन्नतुल फ़िरदौस में आला मुकाम अता फ़रमाए। आमीन।
जनाब आलम बदी साहब के बेदाग़ राजनीतिक सफर की एक झलक—
समाजवादी पार्टी के टिकट पर निज़ामाबाद (आज़मगढ़) विधानसभा सीट से 1996, 2002, 2012, 2017 और 2022 में पाँच बार विधायक चुने गए। जनता ने हर चुनाव में उनकी ईमानदारी, सादगी और जनसेवा पर भरोसा जताया।
पाँच बार विधायक रहने के बावजूद उनके पास न कोई आलीशान बंगला था, न बड़ी गाड़ी और न ही कोई लंबा-चौड़ा काफ़िला। वे आज भी अपने पुराने टीन-शेड वाले घर में रहते थे। सबसे बड़ी बात, उनके पूरे राजनीतिक जीवन में उन पर एक भी आपराधिक मामला दर्ज नहीं हुआ।
ऐसे सादगीपसंद और ईमानदार जनप्रतिनिधि हमेशा याद किए जाएंगे।
अल्लाह तआला मरहूम आलम बदी साहब को जन्नतुल फ़िरदौस में आला मुकाम अता फ़रमाए। आमीन।
इन सुरक्षा कर्मियों को किसने कहा था इस धरना प्रदर्शन को बदनाम करने के लिए खुद के डंडे से गाड़ियों के शीशे तोड़फोड़ करो ??
क्या यह आदेश गृहमंत्री अमित शाह जी को पता हैं ??
अगर तुम एक भी मुस्लिम की पीठ पर गोली का निशान दिखा दोगे, तो मैं आजादी की जंग से हमेशा के लिए दूर हो जाऊंगा।"
ये शब्द खान अब्दुल गफ्फार खान के नाम से जुड़े एक प्रसिद्ध प्रसंग में बताए जाते हैं। यह घटना पेशावर के ऐतिहासिक किस्सा ख्वानी बाजार से जुड़ी है, जिसे भारत के स्वतंत्रता आंदोलन के सबसे दर्दनाक अध्यायों में गिना जाता है।
23 अप्रैल 1930 को पेशावर के किस्सा ख्वानी बाजार में ब्रिटिश शासन के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे निहत्थे लोगों पर गोलियां चलाई गईं। खान अब्दुल गफ्फार खान और उनके सहयोगियों की गिरफ्तारी के विरोध में बड़ी संख्या में लोग शांतिपूर्ण तरीके से सड़कों पर उतरे थे।
ब्रिटिश हुकूमत ने आंदोलन को दबाने के लिए बल प्रयोग किया, जिसमें कई लोग शहीद हुए। इस घटना को अक्सर "पेशावर का जलियांवाला बाग" कहा जाता है।
खान अब्दुल गफ्फार खान, जिन्हें "सीमांत गांधी" के नाम से भी जाना जाता है, अहिंसा, हिंदू-मुस्लिम एकता और स्वतंत्रता संग्राम में अपने योगदान के लिए याद किए जाते हैं। किस्सा ख्वानी बाजार की घटना उस दौर की साझा कुर्बानियों और आजादी की लड़ाई में लोगों की एकजुटता का प्रतीक मानी जाती है।
गिरा दो इस यूनिवर्सिटी को
खंडरात बना दो वहीं मेरी कब्र भी वहीं बना दो
लेकिन याद रख्खो जिस दिन दुनिया का आखिरी दिन होगा यह खंडर चीख चीख कर कहेगा इसे बनाने वाले का नाम आजम खान है
आज़म खान साहब की कही हुई यह बात आज सच साबित होती दिख रही है।
उन्होंने कहा था, "ज़माना तुम्हें जाहिल और अनपढ़ देखना चाहता है। वह तुम्हें हिंदुस्तान के मुस्तकबिल (भविष्य) का हिस्सा नहीं मानता। अगर तुम भी अपने बारे में नहीं सोचोगे, तो सात समंदर पार से कोई तुम्हारा हाथ पकड़कर तुम्हें कलम देने नहीं आएगा।"
आज रामपुर प्रशासन ने आज़म खान साहब द्वारा स्थापित मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी के 40 में से 38 भवनों को 15 दिनों के भीतर बुलडोज़ करने का आदेश दे दिया है।
देश में एक लाख से ज़्यादा स्कूल और कॉलेज इस सरकार ने बंद कर दिए, क्योंकि गरीबों के बच्चे जब अनपढ़ रहेंगे, तो इनके धर्म के नाम पर फैलाई जाने वाली नफरत की अफीम का असर और अधिक होगा।
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