हर बच्चा सीखे, हर बच्चा आगे बढ़े—शिक्षकों ने लिया संकल्प
जनपद बलरामपुर के विकास क्षेत्र श्रीदत्तगंज में आयोजित FLN प्रशिक्षण में शिक्षकों ने बच्चों की बुनियादी शिक्षा को मजबूत बनाने का संकल्प लिया।
प्रशिक्षण के दौरान शिक्षकों ने ‘प्रॉमिस बोर्ड’ पर अपने संकल्प लिखते हुए प्रतिबद्धता जताई कि—
🔸 प्रत्येक बच्चे में पढ़ने, लिखने एवं गणित की बुनियादी दक्षताओं का विकास किया जाएगा।
🔸 गतिविधि आधारित एवं रुचिकर शिक्षण को बढ़ावा दिया जाएगा।
🔸 बच्चों का नियमित आकलन करते हुए कमजोर बच्चों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
🔸 प्रत्येक बच्चे को सीखने और आगे बढ़ने का समान अवसर दिया जाएगा।
✨ FLN प्रशिक्षण केवल सीखने का माध्यम नहीं, बल्कि बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के प्रति शिक्षकों की प्रतिबद्धता का भी मंच बन रहा है।
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राष्ट्रीय खेल दिवस पर खेल प्रतिभाओं का उत्साहवर्धन
हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद जी की जयंती एवं राष्ट्रीय खेल दिवस के अवसर पर स्पोर्ट्स स्टेडियम में विभिन्न खेल प्रतियोगिताओं एवं कार्यक्रमों का आयोजन किया गया।
🔸दीप प्रज्वलित कर मेजर ध्यानचंद जी एवं मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण किया।
🔸 हॉकी टूर्नामेंट में प्रतिभाग कर रहे खिलाड़ियों से परिचय प्राप्त कर उनका उत्साहवर्धन किया।
🔸 उपस्थित खिलाड़ियों एवं प्रतिभागियों को ‘फिट इंडिया मूवमेंट’ की शपथ दिलाई।
🔸 उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को सम्मानित कर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
🔸 सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत करने वाली छात्राओं की प्रतिभा की सराहना करते हुए उन्हें सम्मानित किया।
🏑 राष्ट्रीय खेल दिवस पर अंडर-14 बालक हॉकी प्रतियोगिता के साथ जूनियर बालक-बालिका वर्ग की ताइक्वांडो एवं जूडो प्रतियोगिताएं भी आयोजित हुईं, जिनमें खिलाड़ियों ने उत्साहपूर्वक अपनी खेल प्रतिभा का प्रदर्शन किया।
युवाओं को मेजर ध्यानचंद जी के समर्पण, अनुशासन एवं खेल भावना से प्रेरणा लेते हुए खेलों को जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाने के लिए प्रेरित किया।
जिला क्रीड़ा अधिकारी सहित संबंधित अधिकारी-कर्मचारी, प्रशिक्षक एवं खिलाड़ी उपस्थित रहे।
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शिक्षित देवीपाटन, विकसित देवीपाटन 📚
पुस्तकों से ज्ञान, ज्ञान से राष्ट्र निर्माण!
देवीपाटन मण्डल के विद्यालयों में लाइब्रेरी एवं रीडिंग कल्चर के माध्यम से बच्चों में पढ़ने की आदत विकसित कर उनके उज्ज्वल भविष्य की मजबूत नींव रखी जा रही है।
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✨ नो बैग डे: किताबों से आगे, खेल-खेल में सीखने की नई राह
जनपद के प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों में प्रत्येक शनिवार को ‘नो बैग डे’ के अंतर्गत बच्चों के लिए रोचक, रचनात्मक एवं गतिविधि आधारित कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इसका उद्देश्य बच्चों को नियमित पढ़ाई के साथ खेल, कला, क्राफ्ट, टीमवर्क और व्यावहारिक गतिविधियों के माध्यम से सीखने का आनंददायक अवसर प्रदान करना है।
इसी क्रम में कंपोजिट विद्यालय आदर्श, नगर क्षेत्र बलरामपुर में नो बैग डे पर विभिन्न खेलकूद गतिविधियों का आयोजन किया गया। बच्चों ने पूरे उत्साह के साथ गतिविधियों में प्रतिभाग किया और खेल-खेल में अनुशासन, आपसी सहयोग, टीम भावना एवं स्वस्थ प्रतिस्पर्धा जैसे महत्वपूर्ण जीवन कौशल सीखे।
🏃♀️ खेलों में उत्साह
🎨 रचनात्मक गतिविधियों से प्रतिभा को मंच
🤝 टीमवर्क और आपसी सहयोग की सीख
तनावमुक्त एवं आनंददायक शैक्षिक वातावरण
‘नो बैग डे’ बच्चों के लिए सिर्फ बस्ते से छुट्टी का दिन नहीं, बल्कि अपनी प्रतिभा को पहचानने, कुछ नया सीखने और विद्यालय को आनंद के साथ जोड़ने का दिन बन रहा है।
खेलेंगे भी, सीखेंगे भी — हर शनिवार सीखने का नया अंदाज़।
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जनपद के प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों में प्रत्येक शनिवार आयोजित ‘नो बैग डे’ के क्रम में बच्चों को पढ़ाई के साथ-साथ रचनात्मक एवं गतिविधि आधारित सीखने के अवसर प्रदान किए जा रहे हैं।
इसी क्रम में विद्यालय में बच्चों द्वारा कला एवं क्राफ्ट गतिविधि के तहत पेड़-पौधों की पत्तियों का उपयोग कर आकर्षक कलाकृतियां तैयार की गईं। बच्चों ने अपनी कल्पनाशक्ति और रचनात्मकता का परिचय देते हुए पत्तियों से मोर एवं तितली जैसी सुंदर आकृतियां बनाईं।
🍃 प्रकृति से जुड़कर रचनात्मकता की सीख
🎨 पत्तियों से आकर्षक कलाकृतियों का निर्माण
🤝 सामूहिक गतिविधि से सहयोग एवं टीम भावना
✨ कल्पनाशक्ति एवं कलात्मक प्रतिभा को मिला मंच
‘नो बैग डे’ बच्चों के लिए सीखने को रोचक और आनंददायक बनाने के साथ उनकी छिपी प्रतिभाओं को सामने लाने का माध्यम बन रहा है।
किताबों से आगे भी है सीखने की दुनिया—‘नो बैग डे’ में बच्चे कर रहे हैं, सीख रहे हैं और अपनी कल्पनाओं को आकार दे रहे हैं।
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बाराबंकी से बहराइच राष्ट्रीय राजमार्ग पर टोल प्लाजा शाहवपुर टोल पर रक्षा बंधन पर्व के पूर्व अनावश्यक लगभग 10 किलोमीटर लंबा जाम। जिम्मेदार कहां हैं?
#Fastag@Uppolice@Barabankipolice@NHAI_Official
अपने हाथों से बनी राखी, अपनेपन से सजा त्योहार—विद्यालयों में शिक्षा के साथ संस्कार, सृजन और सौहार्द का भी पाठ।
रक्षाबंधन के पावन पर्व को जनपद के परिषदीय विद्यालयों में बच्चों ने उत्साह, उमंग और रचनात्मकता के साथ मनाया। बच्चों ने अपने हाथों से आकर्षक राखियां तैयार कीं, रक्षाबंधन की थालियां सजाईं और एक-दूसरे को राखी बांधकर स्नेह, सम्मान, आपसी सहयोग एवं भाईचारे का सुंदर संदेश दिया। 🎨🧿
प्राथमिक विद्यालय पाननकुइयां, उच्च प्राथमिक विद्यालय चमरूपुर, उच्च प्राथमिक विद्यालय शेखापुर एवं प्राथमिक विद्यालय बघनी सहित विद्यालयों में आयोजित गतिविधियों के माध्यम से बच्चों ने न केवल अपनी प्रतिभा और क्रिएटिविटी दिखाई, बल्कि भारतीय संस्कृति और परंपराओं से भी जुड़ने का अवसर प्राप्त किया।
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जिला प्रशासन ने जनपदवासियों से अपील की है कि वे किसी भी अपुष्ट सूचना अथवा अफवाह पर विश्वास न करें। नेपाल में अतिवृष्टि के बाद नारायणी एवं कोसी नदियों में संभावित जलस्तर वृद्धि से जनपद बलरामपुर पर कोई प्रभाव पड़ने की संभावना नहीं है। इसका संभावित प्रभाव मुख्य रूप से बिहार के संबंधित नदी क्षेत्रों में हो सकता है। जनपद बलरामपुर में स्थिति सामान्य है तथा प्रशासन पूरी तरह सतर्क एवं तैयार है।
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मुख्य विकास अधिकारी द्वारा प्राइमरी स्कूल तुलसीपुर साउथ, बलरामपुर का निरीक्षण किया गया। इस दौरान विद्यालय में बच्चों को उपलब्ध कराई जा रही शैक्षणिक सुविधाओं, पठन-पाठन के वातावरण एवं अन्य व्यवस्थाओं का जायजा लिया गया।
बच्चों के साथ बैठकर मध्याह्न भोजन ग्रहण किया तथा भोजन की गुणवत्ता, स्वाद एवं स्वच्छता को प्रत्यक्ष रूप से परखा।
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हौसलों के आगे छोटी पड़ गई हर बाधा, कुलसुम की 95% उपस्थिति बनी मिसाल
जनपद में प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षा के साथ-साथ बच्चों की प्रतिभा को पहचानने, उन्हें समान अवसर देने और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने का अवसर दे रहा है।
इसकी प्रेरक मिसाल नगर क्षेत्र बलरामपुर के कम्पोजिट विद्यालय विशुनापुर में कक्षा-8 की छात्रा कुलसुम हैं।
अगर मन में सीखने की ललक और आगे बढ़ने का दृढ़ संकल्प हो, तो कोई भी बाधा सफलता की राह नहीं रोक सकती। दिव्यांगता को अपनी कमजोरी न बनने देते हुए कुलसुम नियमित रूप से विद्यालय पहुंचती हैं। विद्यालय में उनकी उपस्थिति 95 प्रतिशत है, जो पढ़ाई के प्रति उनके समर्पण, अनुशासन और मजबूत इच्छाशक्ति को दर्शाती है।
कुलसुम पढ़ाई में भी मेधावी हैं। कक्षा में नियमित अध्ययन, सीखने की उत्सुकता और शिक्षा लोकआ1के प्रति उनका लगाव उन्हें अन्य छात्र-छात्राओं के लिए प्रेरणास्रोत बनाता है। चुनौतियों के बावजूद उन्होंने अपनी पढ़ाई को कभी पीछे नहीं छूटने दिया।
जनपद के सरकारी विद्यालयों में उपलब्ध समावेशी एवं प्रोत्साहनपूर्ण शैक्षिक वातावरण बच्चों को अपनी क्षमताओं को पहचानने और आगे बढ़ने का अवसर दे रहा है। शिक्षक भी बच्चों की व्यक्तिगत जरूरतों और प्रतिभाओं को ध्यान में रखते हुए उन्हें निरंतर प्रोत्साहित कर रहे हैं। कुलसुम की नियमित उपस्थिति और शैक्षिक प्रगति इसी सकारात्मक वातावरण की खूबसूरत तस्वीर प्रस्तुत करती है।
उनकी कहानी बताती है कि दिव्यांगता किसी की प्रतिभा और सपनों की सीमा तय नहीं करती। मजबूत इच्छाशक्ति, निरंतर प्रयास, शिक्षकों का मार्गदर्शन और विद्यालय का सहयोग मिले तो हर चुनौती को पीछे छोड़ा जा सकता है।
कुलसुम की 95 प्रतिशत उपस्थिति केवल एक आंकड़ा नहीं, बल्कि उनके हौसले, अनुशासन और आगे बढ़ने की जिद की कहानी है। साथ ही यह सरकारी विद्यालयों में बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ते हुए उनकी प्रतिभा को आगे बढ़ाने के प्रयासों की भी प्रेरक मिसाल है।
“बाधाएं रास्ता कठिन जरूर कर सकती हैं, लेकिन दृढ़ इच्छाशक्ति हो तो मंजिल तक पहुंचने से रोक नहीं सकतीं।”
आज कुलसुम अपने विद्यालय के साथ-साथ उन सभी बच्चों के लिए प्रेरणा हैं, जो चुनौतियों का सामना करते हुए शिक्षा के सहारे अपने सपनों की ओर कदम बढ़ा रहे हैं।
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नन्हे हाथों की कला से सजा विद्यालय, छात्र की प्रतिभा बनी आकर्षण का केंद्र
प्रतिभा को अवसर और प्रोत्साहन मिले तो बच्चों की कल्पनाएं खूबसूरत आकार लेने लगती हैं। इसकी शानदार मिसाल नगर क्षेत्र बलरामपुर के कम्पोजिट विद्यालय विशुनापुर में देखने को मिल रही है, जहां कक्षा-8 के छात्र आमिर की क्राफ्टिंग कला विद्यालय की सुंदरता में नए रंग भर रही है।
आमिर को पढ़ाई के साथ-साथ आर्ट एवं क्राफ्ट में विशेष रुचि है। अपनी कल्पनाशक्ति और रचनात्मकता से वह कागज एवं अन्य सामान्य सामग्रियों को आकर्षक कलाकृतियों का रूप देते हैं। आमिर द्वारा तैयार किए गए रंग-बिरंगे फूल, वॉल हैंगिंग एवं विभिन्न सजावटी क्राफ्ट विद्यालय की दीवारों और कक्षाओं की शोभा बढ़ा रहे हैं।
विद्यालय में सजी उनकी कलाकृतियां न केवल आमिर की प्रतिभा को प्रदर्शित करती हैं, बल्कि दूसरे बच्चों को भी सीखने, कुछ नया बनाने और अपनी रचनात्मक क्षमता को पहचानने के लिए प्रेरित कर रही हैं।
विद्यालय में बच्चों को किताबी ज्ञान के साथ उनकी रुचि और प्रतिभा को निखारने का अवसर मिलने से उनमें आत्मविश्वास और सृजनात्मक सोच भी विकसित हो रही है।
आमिर की कला बताती है कि हर बच्चे में कोई न कोई विशेष प्रतिभा होती है—जरूरत है उसे पहचानने, प्रोत्साहित करने और आगे बढ़ने का अवसर देने की।
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पीएम पोषण योजना के अंतर्गत विद्यालयों में बच्चों के लिए पौष्टिक भोजन तैयार करने वाले रसोइयों के सम्मान एवं कैशलेस चिकित्सा कार्ड वितरण का जिला स्तरीय कार्यक्रम एमएलके पीजी कॉलेज में आयोजित हुआ।
इस अवसर पर लखनऊ में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम का सजीव प्रसारण हुआ तथा उपस्थित रसोइयों ने माननीय मुख्यमंत्री जी का संबोधन सुना।
✨ शासन की पहल से जनपद के 4,851 रसोइयों को मिलेगा लाभ—
🔸 मानदेय वृद्धि
🔸 ₹2 लाख तक कैशलेस चिकित्सा सुविधा
कार्यक्रम में माननीय विधायक बलरामपुर सदर श्री पल्टूराम एवं डीएम डॉ विपिन कुमार जैन ने रसोइयों को बढ़े मानदेय के प्रतीकात्मक चेक एवं कैशलेस चिकित्सा कार्ड प्रदान कर सम्मानित किया।
मानदेय वृद्धि एवं कैशलेस चिकित्सा सुविधा रसोइयों के परिश्रम के सम्मान के साथ आर्थिक एवं स्वास्थ्य सुरक्षा को और मजबूत करेगी।
यह पहल बच्चों के पोषण की जिम्मेदारी निभाने वाले रसोइयों के सम्मान, कल्याण और सुरक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
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अपना स्टडी स्पेस, अपनी किताबें और आगे बढ़ने का नया उत्साह।
जनपद में कक्षा 06 से 08 के 5850 मेधावी छात्र-छात्राओं को स्टडी टेबल उपलब्ध कराकर घर पर पढ़ाई के लिए बेहतर वातावरण तैयार करने का प्रयास किया गया है।
इस पहल से विशेष रूप से उन बच्चों को सहूलियत मिलेगी, जिनके घरों में पढ़ाई के लिए अलग एवं सुविधाजनक स्थान उपलब्ध नहीं था। अब बच्चे एक निश्चित स्थान पर बैठकर होमवर्क, पाठ की पुनरावृत्ति और नियमित स्वाध्याय कर सकेंगे।
अभिभावकों को भी बच्चों की नियमित पढ़ाई के लिए सकारात्मक वातावरण बनाने एवं उनकी शैक्षिक प्रगति में सहभागी बनने के लिए जागरूक किया जा रहा है।
📚 आज स्टडी टेबल पर खुलने वाली हर किताब, बच्चों के बेहतर भविष्य की नई कहानी लिखेगी।
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शिक्षा की राह होगी और आसान, दिव्यांग छात्राओं को मिलेगा ई-ट्राईसाइकिल।
दिव्यांग छात्राओं को शिक्षा एवं प्रशिक्षण से जोड़ते हुए उनके सुगम आवागमन और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के लिए दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग द्वारा वित्तीय वर्ष 2026-27 में ई-ट्राईसाइकिल योजना संचालित की जा रही है।
🔸 जनपद की 16 वर्ष या उससे अधिक आयु की अध्ययनरत/प्रशिक्षण प्राप्त कर रही पात्र दिव्यांग छात्राएं कर सकती हैं आवेदन।
🔸 दिव्यांगता 40 प्रतिशत से अधिक होना आवश्यक।
🔸 ई-ट्राईसाइकिल के लिए अधिकतम ₹65,000 तक का अनुदान अनुमन्य।
🔸 गरीबी रेखा से नीचे जीवनयापन करने वाले पात्र आवेदकों को चयन में प्राथमिकता।
🔸 विगत 5 वर्षों में ई-ट्राईसाइकिल प्राप्त न करने वाले पात्र आवेदकों को मिलेगा लाभ।
🔸 आवेदन प्रक्रिया पूर्णतः ऑनलाइन है।
ई-ट्राईसाइकिल से दिव्यांग छात्राओं के लिए विद्यालय, कॉलेज एवं प्रशिक्षण संस्थानों तक पहुंच आसान होगी और वे अधिक स्वतंत्रता एवं आत्मविश्वास के साथ अपनी शिक्षा और भविष्य की ओर आगे बढ़ सकेंगी।
📍 अधिक जानकारी एवं आवश्यक अभिलेखों के संबंध में संपर्क करें—
कार्यालय जिला दिव्यांगजन सशक्तीकरण अधिकारी, विकास भवन, बलरामपुर।
बच्चों को नियमित एवं गुणवत्तापूर्ण अध्ययन के लिए प्रेरित करने के उद्देश्य से जनपद-बलरामपुर के650विद्यालयों में कक्षा 06 से 08 में अध्ययनरत मेधावी कुल5850स्टडी टेबल का वितरण विकास विभाग-बलरामपुर के सहयोग से जिलाधिकरी महोदय की उपस्थिति में कराया गया है।@CMOfficeUP@basicshiksha_up
बच्चों के चेहरे पर खुशी, पढ़ाई के लिए नया उत्साह
जनपद के सरकारी विद्यालयों में कक्षा 06 से 08 में अध्ययनरत 5850 मेधावी छात्र-छात्राओं को घर पर बेहतर एवं व्यवस्थित अध्ययन की सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से स्टडी टेबल प्रदान की गई हैं।
इस पहल के अंतर्गत पूर्व में मा० प्रभारी मंत्री/मा० राज्यमंत्री खाद्य एवं रसद तथा नागरिक आपूर्ति श्री सतीश शर्मा जी, मा० विधायक बलरामपुर श्री पल्टूराम जी एवं मा० विधायक तुलसीपुर श्री कैलाश नाथ शुक्ल जी द्वारा छात्र-छात्राओं को स्टडी टेबल का वितरण किया जा चुका है।
स्टडी टेबल मिलने से सरकारी विद्यालयों के बच्चों को घर पर पढ़ाई के लिए अपना एक व्यवस्थित स्टडी स्पेस मिला है। यहां वे नियमित रूप से गृहकार्य, पाठ की पुनरावृत्ति एवं स्वाध्याय कर सकेंगे। इससे बच्चों में पढ़ाई के प्रति रुचि, एकाग्रता और नियमित अध्ययन की आदत को और बढ़ावा मिलेगा।
🔸 घर पर पढ़ाई के लिए बेहतर एवं व्यवस्थित स्थान
🔸 नियमित स्वाध्याय और सीखने की आदत को प्रोत्साहन
🔸 किताबों एवं अध्ययन सामग्री को व्यवस्थित रखने की सुविधा
🔸 बच्चों में आगे बढ़ने और बेहतर करने का नया उत्साह
✨ सरकारी विद्यालयों में बेहतर शिक्षा के साथ बेहतर सुविधाएं—हर बच्चे को आगे बढ़ने का अवसर और हर सपने को उड़ान देने की पहल।
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आधार नामांकन एवं आधार अपडेट से संबंधित सेवाएं निर्धारित दरों पर उपलब्ध कराए जाने के उद्देश्य से आधार सेवाओं की निर्धारित शुल्क सूची सभी आधार सेवा केंद्रों पर स्पष्ट रूप से प्रदर्शन किए जाने के निर्देश दिए गए हैं। नागरिक आधार संबंधी सेवा प्राप्त करते समय निर्धारित शुल्क का ही भुगतान करें।
🔸 नया आधार नामांकन (सभी आयु वर्ग) — निःशुल्क
🔸 5–7 वर्ष एवं 15–17 वर्ष के बच्चों का अनिवार्य बायोमेट्रिक अपडेट — निःशुल्क
🔸 7–15 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों का अनिवार्य बायोमेट्रिक अपडेट — 30 सितंबर 2026 तक निःशुल्क
🔸 बायोमेट्रिक अपडेट (फिंगरप्रिंट, आइरिस एवं फोटोग्राफ) — ₹125
🔸 डेमोग्राफिक अपडेट (नाम, पता, जन्मतिथि, मोबाइल नंबर, जेंडर आदि) — ₹75
🔸 डॉक्यूमेंट अपडेट (आधार नामांकन केंद्र पर) — ₹75
🔸 आधार PVC कार्ड (ऑनलाइन) — ₹75
🔸 आधार सर्च एवं कलर प्रिंट (A4 साइज) — ₹40
📢 आधार सेवा केंद्र पर प्रदर्शित रेट लिस्ट अवश्य देखें तथा निर्धारित शुल्क से अधिक धनराशि का भुगतान न करें।
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किताबों से दोस्ती, सीखने की नई उड़ान...
जनपद के परिषदीय विद्यालयों में बच्चों को बेहतर एवं रुचिकर शैक्षिक वातावरण उपलब्ध कराने में स्कूल लाइब्रेरी एवं स्टडी कॉर्नर महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
इसी क्रम में विकास खंड बलरामपुर के प्राथमिक विद्यालय बांकी, प्राथमिक विद्यालय कटिया एवं प्राथमिक विद्यालय धर्मनगर में छात्र-छात्राएं लाइब्रेरी एवं स्टडी कॉर्नर में उपलब्ध ज्ञानवर्धक, प्रेरणादायी एवं रुचिकर पुस्तकों का उत्साहपूर्वक अध्ययन कर रहे हैं।
📖 कहानी, सामान्य ज्ञान एवं प्रेरक पुस्तकों के माध्यम से बच्चों में पढ़ने, समझने और स्वयं सीखने की आदत विकसित हो रही है।
🔸 लाइब्रेरी बच्चों को पाठ्यक्रम से इतर नई जानकारियों से जोड़ रही है।
🔸 स्टडी कॉर्नर बच्चों को सहज एवं आकर्षक वातावरण में अध्ययन का अवसर दे रहे हैं।
🔸 नियमित पुस्तक अध्ययन से बच्चों की भाषा, शब्दावली, कल्पनाशक्ति एवं अभिव्यक्ति क्षमता को भी बढ़ावा मिल रहा है।
✨ परिषदीय विद्यालयों में शिक्षा अब केवल पाठ्यपुस्तकों तक सीमित नहीं—लाइब्रेरी और स्टडी कॉर्नर बच्चों में पढ़ने की संस्कृति विकसित कर सीखने को आनंददायक बना रहे हैं।
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विकास खंड बलरामपुर के प्राथमिक विद्यालय कटिया में छात्र-छात्राएं लाइब्रेरी में उपलब्ध रुचिकर एवं प्रेरणादायी पुस्तकों के माध्यम से ज्ञान की नई दुनिया से जुड़ रहे हैं।
विद्यालय का स्टडी कॉर्नर बच्चों को सहज एवं आकर्षक वातावरण में पढ़ने और स्वयं सीखने का अवसर प्रदान कर रहा है। नियमित पुस्तक अध्ययन से बच्चों में पठन कौशल, शब्दावली, समझ एवं अभिव्यक्ति क्षमता को बढ़ावा मिल रहा है।
✨ पाठ्यपुस्तकों के साथ पुस्तकालय से जुड़ाव बच्चों की सीखने की रुचि को और बेहतर बना रहा है।
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