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📢 सहारनपुर
खुली चेतावनी दी है पुलिस प्रशासन को पिंकी चौधरी हिस्ट्री सीटर ने मोहाल बिगाड़ ने समाज में शांति भंग दंगा करा ने जेसी स्थिती बना दी है
इस प्रकरण में पिंकी चौधरी ललित शर्मा जैसे गुंडों पर पुलिस प्रशासन द्वारा कोई कार्रवाई नहीं हुई
दिल्ली शिक्षा विभाग की ओर से ₹90 करोड़ की लागत से 1,30,000 माउंटेन टेरेन बाइक्स (MTB) खरीदने की टेंडर प्रक्रिया बड़े विवादों के घेरे में आ गई है। इस पूरी योजना के तहत प्रति साइकिल की लागत ₹6,957 तय की गई थी, जिसके बाद से साइकिलों के स्तर और टेंडर की कार्यप्रणाली पर कई संशय खड़े हो गए हैं।
आज आम आदमी पार्टी नेता सौरभ भारद्वाज ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बाजार में ₹4,200 में मिलने वाली साइकिल और छात्राओं को बांटी जा रही ₹6,957 वाली महंगी साइकिल को आमने-सामने रखकर तुलना की। इस दौरान एक प्रोफेशनल साइकिल मैकेनिक से साइकिल की लाइव जांच करवाई गई, जिसमें साइकिल में लगाए गए ब्रेक बेहद निम्न और स्थानीय (लोकल) गुणवत्ता के पाए गए। साइकिल का मडगार्ड इतने नाज़ुक प्लास्टिक का था कि थोड़ा सा दबाव पड़ते ही टूट गया ये जानकारी मैकेनिक ने दिया।
सबसे बड़ा और अहम सवाल यह है कि जहां हीरो इकोटेक और एवॉन जैसी दिग्गज साइकिल निर्माण करने वाली कंपनियां इस पूरी प्रक्रिया से बाहर कर दी गईं, वहीं यह करोड़ों का बड़ा टेंडर 'मत्ता स्पोर्ट्स' (Matta Sports) को कैसे मिल गया ?
चौंकाने वाली बात यह है कि इस कंपनी के प्रमोटर ने खुद सार्वजनिक तौर पर इस बात को स्वीकार किया है कि उनका पहले कभी साइकिल उद्योग से दूर-दूर तक कोई नाता या व्यापारिक अनुभव नहीं रहा है।
आम आदमी पार्टी ने आरोप लगाया गया है कि टेंडर के नियमों के साथ सोची-समझी साजिश के तहत खिलवाड़ किया गया। जहां टर्नओवर की अनिवार्य शर्त को चार गुना बढ़ाकर ₹360 करोड़ कर दिया गया था, वहीं इस ठेके को हासिल करने वाली कंपनी का कुल टर्नओवर केवल ₹40 करोड़ ही है।
एसके बाइक्स' जैसी प्रतिष्ठित और स्थापित कंपनियों को प्रतिस्पर्धा से बाहर रखने के नापाक इरादे से टेंडर के नियमों से साल 2025 के प्रावधान को खासतौर पर हटा दिया गया।
'एसके बाइक्स' (SK Bikes) का यह स्पष्ट दावा है कि वे बिल्कुल इन्हीं मानकों और विशेषताओं वाली साइकिलें मात्र ₹4,100 में उपलब्ध कराने को पूरी तरह तैयार थे। यदि यह अनुबंध उन्हें दिया जाता, तो जनता के टैक्स के ₹36.70 करोड़ आसानी से बचाए जा सकते थे।
इस गंभीर कथित भ्रष्टाचार के मामले में एलजी (उपराज्यपाल), सीएम (मुख्यमंत्री) और सीवीसी (केंद्रीय सतर्कता आयोग) के समक्ष औपचारिक शिकायतें दर्ज कराई जा चुकी हैं।
जब संबंधित फर्म के पास साइकिल क्षेत्र का कोई अनुभव ही नहीं है और वितरित की जा रही साइकिलों की क्वालिटी भी बेहद खराब है, तो आखिर इतनी बड़ी डील इसी कंपनी को क्यों सौंपी गई ?
इस पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच कराई जानी चाहिए और इसमें संलिप्त सभी दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।
मुफ्ती शमाइल नदवी ने जावेद अख्तर के साथ खुदा के वजूद पर बहस की थी। इस बहस के बाद मुफ्ती शमाइल नदवी रातों रात स्टार बन गए। उसी दौरान मैंने उनसे बात-चीत की थी। देखिए Exclusive इंटरव्यू।
https://t.co/NMQonYhq4H
यूपी के बलरामपुर के ग्राम सड़वा गुलहरिया निवासी इकबाल अहमद अपनी मोटरसाइकिल में पेट्रोल भरवाने पेट्रोल पंप पहुंचे थे। आरोप है कि तेल भर रहे पेट्रोल पंप कर्मी ने पूरा तेल नहीं भरा, जिससे पेट्रोल पंप कर्मी और इकबाल के बीच बहस होने लगी। इसी बीच पेट्रोल पंप कर्मी मारपीट पर उतर आए। उन्होंने इकबाल की दाढ़ी नोची, जातिसूचक एवं धार्मिक अपशब्द कहे। अब इस घटना का वीडियो वायरल हो रहा है।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री जिस कानून व्यवस्था का दंभ भरते हैं, उसकी ऐसी तस्वीर आए दिन सामने आती रहती हैं। वास्तविकता यह है कि उत्तर प्रदेश अपने इतिहास की सबसे बदहाल कानून व्यवस्था से गुजर रहा है।
#अयोध्या में संत समाज की आवाज़ बुलंद!
“चंदा चोरों, अयोध्या छोड़ो”—इस नारे के साथ संत समाज ने कथित चंदा अनियमितताओं के खिलाफ नाराज़गी जताई। अयोध्या में इस मुद्दे को लेकर माहौल गरमाता नजर आ रहा है।!
दिल्ली में रेखा गुप्ता की सरकार में गरीबों में बंटने को आया हुआ चावल कैसे गायब हुआ सिलसिलेवार तरीके से समझिए।
सबसे पहले 7 जनवरी को केंद्र सरकार की एजेंसी NERAMAC ने दिल्ली के फूड एंड सप्लाई मिनिस्ट्री को एक प्रपोजल भेजा।
इसमें बिना किसी ई टेंडर के ओपन मार्केट के तहत FCI से हर हफ्ते 31000 मीट्रिक टन चावल खरीदेने की बात कही गई जबकि
ओपन मार्केट के अपने नियम हैं लेकिन उन्हें ताक पर रखकर दिल्ली सरकार के मंत्री ने आगे बढ़ा दिया।
मामला जब आगे बढ़ा तो FCI ने एक सख्त पत्र लिखा और विजिलेंस भी शामिल हुई।
विजिलेंस शाखा ने जब पूछा कि जो चावल 50,644 मीट्रिक टन आपने उठाया उसे गरीबों में कैसे और कहां वितरित किया तो NERAMAC के पास कोई जवाब नहीं था।
जब कोई रिकॉर्ड पेश नहीं हुआ तो FCI ने NERAMAC पर 13.67 करोड़ का रिकवरी दी और इसका जिम्मेदार दिल्ली सरकार और NERAMAC को बताया।
AAP नेता सौरभ भारद्वाज ने बताया भी था कि इसमें बड़े घोटाले 3 साल में हर हफ्ते करीब 143 करोड़ और 3 साल में 22000 करोड़ लूटने की योजना थी।
दाढ़ी टोपी वालों के साथ मारपीट का मामला कोई नया नहीं है, नई बात तो ये है कि जब पेट्रोल पंप पर भी किसी दाढ़ी टोपी वाले के साथ ऐसी घटना हुई है। महज़ 5 मिनट के लिए वहाँ कोई जाता है और ऐसे में मारपीट होना हजम नहीं होता। वीडियो वायरल होता है लेकिन कार्रवाई का कोई पता नहीं.
जय हो विजय हो... ✌️
भगवान शंकर विधायक बाबू पर ऐसे ही कृपा बनाये रखें!
हसनपुर विधानसभा के गांव रुखालू से फिर से भारी बहुमत से जीतें,ताकि आने वाले कार्यकाल में शिवजी के मंदिर जाने के लिए नाव का प्रबंध हो सके!🙃🙃
वैसे विधायक जी विधायक निधि में करोड़ों रुपए पड़े होंगे मगर क्या ही कहें ठेकेदार मनमाफिक़ नहीं मिला होगा? 😁
ख़ैर @Bjpmlamahender_ आप भी अगले सोमवार शिवजी पर जल चढ़ाने यहीं जाएं!
ख़ैर इस बहादुर महिला को नमन है 🫡
‘जीरो टॉलरेंस’ का दावा बहुत सुनने को मिलता है, लेकिन मुख्यमंत्री जी के गृह जनपद में अपराधी अगर बेखौफ होकर हत्या कर दें, तो सवाल सिर्फ अपराधियों से नहीं, पूरी कानून-व्यवस्था से पूछा जाएगा।
अधिवक्ता आदित्य त्रिपाठी के पिता श्री शिव कुमार त्रिपाठी की निर्मम हत्या के दोषियों की तत्काल गिरफ्तारी और कठोरतम कार्रवाई हो।
कानून का डर अपराधियों में दिखना चाहिए, विज्ञप्तियों में नहीं।
विकास के दावों के बीच नाला पार कर स्कूल पहुंच रहे बच्चे
बसोहली के हटा, पटेरा समेत कई गांवों में बच्चे आज भी नाला पार कर स्कूल जाने को मजबूर हैं। बरसात में जलस्तर बढ़ने से रास्ता जानलेवा हो जाता है। ग्रामीण लंबे समय से पुल और पक्की सड़क की मांग कर रहे हैं।
सवाल है—जब बच्चों के स्कूल पहुंचने की राह ही सुरक्षित नहीं, तो विकास आखिर पहुंचा कहां?
#BcmForXMarketing
बांकीपुर में प्रशांत किशोर का बड़ा ऐलान
प्रशांत किशोर ने कहा “कम से कम 10 हजार लोगों को नौकरी की व्यवस्था तुरंत करूंगा।
आपका बच्चा पढ़ा-लिखा है और बेरोजगार है तो उसकी CV मेरे ऑफिस में दीजिए।”
BJP is protesting against Congress and LoP Rahul Gandhi Ji, they are basically telling the people that Congress is not good in opposition and it’s the BJP which deserves the opposition position.
GenZ and people of India are waiting to fulfil this wish of the BJP in 2029….😂
अरे भाई, गजब चल रहा है! सदन के अंदर गरीबों के चावल के घोटाले पर जब 'आप' विधायकों ने सवाल पूछे, तो सरकार ने जवाब देने के बजाय विपक्ष के 8 विधायकों को सीधा सदन से बाहर का रास्ता दिखा दिया। अगर सत्ता पक्ष पूरी तरह साफ-सुथरा है, तो विपक्ष के तीखे सवालों से डरकर मार्शलों से बाहर क्यों फिंकवाया ? कायदे से तो मुंहतोड़ जवाब देना चाहिए था, क्योंकि लोकतंत्र का मतलब ही यही है कि सरकार सवालों से भागे नहीं, बल्कि सीना ठोककर जनता के सामने पारदर्शिता रखे।
अब जरा इस पूरे खेल की टाइमिंग देखिए। 7 जनवरी 2026 को असम के एक निगम (NERAMAC) ने दिल्ली सरकार के सामने FCI से चावल लेने का प्रस्ताव रखा। मज़े की बात देखिए—बिना किसी ई-टेंडर के फाइल तुरंत आगे बढ़ा दी गई और देखते ही देखते 50,644 मीट्रिक टन चावल का उठाव भी हो गया। अब जब जनता और विपक्ष पूछ रहे हैं कि भैया, वो गरीबों, मजदूरों और प्रवासियों वाला चावल गया कहां? तो किसी के पास कोई हिसाब-किताब नहीं है! रिकॉर्ड गायब मिलने पर जब FCI ने 13.67 करोड़ की र रिकवरी मांगी. FCI ने दिल्ली सरकार और NERAMAC दोनों की जिम्मेदार बताया है.
वही आम आदमी पार्टी के नेता सौरभ भारद्वाज का आरोप कि हर हफ्ते 143 करोड़ का खेल होने वाला था और तीन साल में यह आंकड़ा सीधे 22,000 करोड़ तक पहुँच जाता!
सदन में मंत्री जी कह रहे हैं दिल्ली सरकार का कोई लेना-देना नहीं है, यह तो सिर्फ उस निगम और FCI का आपसी मामला है।" मंत्री जी, ऐसे हाथ झाड़ लेने से जनता के करोड़ों रुपयों की जिम्मेदारी खत्म हो जाती है क्या ? अगर सच में दिल्ली सरकार का कोई रोल नहीं था, तो फिर दिल्ली सरकार के अधिकारी अरुण कुमार झा (जिनको बाकायदा कारण बताओ नोटिस भी थमाया गया) और बाकी FCI अधिकारियों पर निलंबन की गाज क्यों गिर गई ?
FCI के सीधे निर्देश थे कि यह चावल केवल उन प्रवासी मजदूरों और दिहाड़ी कामगारों को मिलना चाहिए जो राशन कार्ड या PDS के दायरे में नहीं आते। जब सरकार और उस एजेंसी से इस वितरण का पूरा कच्चा-चिट्ठा मांगा गया, तो उन्होंने क्या जवाब दिया ? दिल्ली में जब पहले से इतने सरकारी निगम मौजूद थे जो इस वितरण को चुटकियों में संभाल सकते थे, तो फिर बाहरी एजेंसी पर इतना प्यार क्यों आया और उसी को क्यों चुना गया? सब्सिडी रेट पर (लगभग 23.20 रुपये किलो) चावल उठाया गया, लेकिन जब हिसाब सही नहीं मिला और FCI ने 13.67 करोड़ के प्राइस डिफरेंस की रिकवरी मांगी, तो सत्ता पक्ष सदन में एक भी पुख्ता आंकड़ा क्यों नहीं रख पाया ? जनता सब देख रही है, जवाब तो देना पड़ेगा!