माननीय राष्ट्रीय अध्यक्ष, @BhimArmyChief एवं नगीना से लोकप्रिय सांसद भाई चन्द्रशेखर आज़ाद जी की उपस्थिति में उत्तर प्रदेश कैडर के 1993 बैच के सेवानिवृत्त भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) अधिकारी श्रद्धेय प्रेम प्रकाश जी (पूर्व अपर पुलिस महानिदेशक) ने आज आज़ाद समाज पार्टी (कांशीराम) की सदस्यता ग्रहण की।
आज़ाद समाज पार्टी (कांशीराम) परिवार में आपका हार्दिक स्वागत एवं अभिनंदन हैं।
भाजपा के “डबल इंजन” राज में बहुजन समाज न्याय के लिए अपनी जान देने को मजबूर है।
17 अप्रैल को मुजफ्फरनगर में हिमांशु जाटव के साथ जातंकवादी द्वारा बेरहमी से मारपीट की गई और जातिसूचक शब्दों से अपमानित किया गया। पीड़ित द्वारा पुलिस को सूचना देने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की गई। यह प्रशासन की संवेदनहीनता और मिलीभगत को उजागर करता है।
हिमांशु ने इंसाफ की उम्मीद में आरोपी के परिजनों से भी दो बार शिकायत की। वहाँ से निराश होने पर 17 अप्रैल की ही रात तीसरी बार आरोपी के घर पहुँचकर उसने खुद को आग लगा ली। दिल्ली के अस्पताल में जिंदगी और मौत से जूझने के बाद 22 अप्रैल को उसकी मृत्यु हो गई।
मुख्यमंत्री @myogiadityanath जी, यह मौत नहीं, बल्कि एक सुनियोजित सामाजिक हत्या है, जिसमें दोषी केवल आरोपी ही नहीं, बल्कि वह तंत्र भी है जिसने समय पर न्याय नहीं दिया।
यह घटना अत्यंत दुखद और दंडनीय है। हम शोकसंतप्त परिवार के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हैं और प्रकृति से प्रार्थना करते हैं कि उन्हें इस असहनीय दुख को सहने की शक्ति प्रदान करे।
@UPGovt से हमारी माँगें:- सभी आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी हो।SC/ST अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत कड़ी धाराओं में मुकदमा दर्ज हो।लापरवाही बरतने वाले पुलिस अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई हो।पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा और सरकारी सुरक्षा प्रदान की जाए।
@CMOfficeUP
अतिशीघ्र ध्यान नहीं दिया तो मामला आगे बढ़ सकता हैं @saharanpurpol थाना देहात कोतवाली गॉंव लखनौती मे कैसे खुलेआम कैमरा के सामने मुसलमानो और दलितों के प्रति अपशब्द बोले जा रहे हैं @Uppolice जल्द गिरफ़्तारी हो @dgpup हमारा नेता हमारा स्वाभिमान @BhimArmyChief का अपमान बर्दास्त नहीं
देशभक्ति, पराक्रम एवं बलिदान के अद्वितीय प्रतीक महान क्रांतिकारी अमर शहीद भगत सिंह, सुखदेव, राजगुरु जी के शहादत दिवस पर उन्हें शत-शत नमन एवँ विनम्र आदरांजलि।
#ShaheedDiwas#BhagatSingh#भगतसिंह
पश्चिम एशिया में चल रहे संकट के बीच केंद्र सरकार ने यह कहा है कि देश में कच्चे तेल और गैस की कोई कमी नहीं है तथा घरेलू रसोई गैस की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक वस्तु अधिनियम (ESMA) लागू किया गया है।
इन परिस्थितियों में यह आवश्यक है कि जब तक यह संकट पूरी तरह समाप्त नहीं हो जाता, तब तक मिड-डे मील संचालित करने वाले विद्यालयों को उनकी आवश्यकता के अनुसार घरेलू गैस सिलेंडर की निरंतर और प्राथमिकता के आधार पर आपूर्ति सुनिश्चित की जाए, ताकि बच्चों के भोजन की व्यवस्था किसी भी प्रकार से प्रभावित न हो और पोषण कार्यक्रम सुचारु रूप से चलता रहे।
इसके साथ ही शादी-विवाह के कार्यक्रमों में भी घरेलू गैस सिलेंडर के सीमित और नियंत्रित उपयोग की अनुमति दी जानी चाहिए, ताकि आम नागरिकों को अनावश्यक कठिनाइयों का सामना न करना पड़े।
अतः @mygovindia से आग्रह है कि संकट की इस स्थिति में गैस आपूर्ति व्यवस्था को पारदर्शी, संतुलित तथा आम जनता की आवश्यकताओं के अनुरूप बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं।
@PMOIndia@narendramodi@PetroleumMin@DrSJaishankar@HardeepSPuri
निजी स्कूलों की मनमानी, महंगी किताबों व यूनिफॉर्म के नाम पर अभिभावकों के शोषण तथा आरटीई के प्रावधानों के उल्लंघन के संबंध में आवश्यक कार्यवाही की मांग को लेकर माननीय मुख्यमंत्री @myogiadityanath जी को पत्र लिखा।
आशा है कि अभिभावकों और विद्यार्थियों के हित में इस गंभीर विषय पर शीघ्र और प्रभावी कदम उठाए जाएंगे।
@UPGovt@CMOfficeUP
कल उत्तर प्रदेश के जिला भदोही के ज्ञानपुर क्षेत्र के पिपरगांव में दलित चौकीदार जैसलाल सरोज जी को केरोसिन डालकर जिंदा जलाने की अमानवीय और रोंगटे खड़े कर देने वाली घटना पूरे समाज को झकझोर देने वाली है। यह घटना न केवल क्रूरता की पराकाष्ठा है, बल्कि हमारे समाज और कानून व्यवस्था के लिए भी एक गंभीर चेतावनी है।
80 प्रतिशत झुलसे जैसलाल सरोज जी की आज सुबह उपचार के दौरान मृत्यु हो गई।
हम शोकसंतप्त परिवार के प्रति अपनी गहरी संवेदना प्रकट करते हैं। प्रकृति से प्रार्थना है कि शोकसंतप्त परिवार को यह असहनीय दुख सहने की शक्ति प्रदान करे।
हम @UPGovt से मांग करते हैं कि इस मामले के सभी आरोपियों को तुरंत गिरफ्तार किया जाए और पीड़ित परिवार को शीघ्र न्याय दिलाया जाए। साथ ही परिवार को सुरक्षा और उचित मुआवजा भी दिया जाए।
@CMOfficeUP@myogiadityanath
देहरादून-दिल्ली राष्ट्रीय राजमार्ग पर “मुसलमानों के लिए रोड नहीं” जैसा घृणित और विभाजनकारी संदेश लिखा जाना न केवल सामाजिक सौहार्द पर हमला है, बल्कि यह सीधे-सीधे भारतीय संविधान की मूल भावना पर प्रहार और संविधान के आर्टिकल 15,19 व 21 का उल्लंघन है। इस प्रकार का संदेश यह दर्शाता है कि कुछ ताकतें सुनियोजित तरीके से देश को धार्मिक आधार पर बाँटने की साज़िश कर रही हैं।
भारत का संविधान सभी नागरिकों को समान अधिकार देता है-धर्म, जाति, वर्ग या समुदाय के आधार पर किसी भी प्रकार का भेदभाव असंवैधानिक और दंडनीय है।
आज अगर रास्ते मुसलमानों के लिए बंद करने की बात लिखी जा रही है, तो कल यही सोच दलितों,पिछड़ी जातियों,आदिवासियों व अन्य धार्मिक अल्पसंख्यको के खिलाफ भी खड़ी की जाएगी। यह केवल एक समुदाय का सवाल नहीं, बल्कि भारत के लोकतांत्रिक चरित्र और सामाजिक न्याय की अवधारणा का प्रश्न है।
हम मुख्यमंत्री @myogiadityanath जी से पूछना चाहते हैं कि ऐसे तत्वों को आखिर किसका संरक्षण प्राप्त है? सार्वजनिक संपत्ति पर नफरत फैलाने वाले संदेश लिखना और समाज को बाँटने की कोशिश करना गंभीर अपराध है।
हम @UPGovt से मांग करते हैं कि दोषियों की तत्काल पहचान कर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। यदि यह कृत्य देश की एकता, अखंडता और सामाजिक सद्भाव को नुकसान पहुँचाने की मंशा से किया गया है, तो राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) सहित कठोर धाराओं में कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए।
भारत नफरत से नहीं, संविधान से चलेगा।
समानता, भाईचारा और न्याय - यही इस देश की असली पहचान हैं।
राजस्थान के जिला बीकानेर में शनिवार को आठवीं कक्षा की 13 वर्षीय नाबालिग छात्रा का शव झाड़ियों में अर्धनग्न अवस्था में मिलने की घटना अत्यंत दुखद, शर्मनाक और गंभीर चिंता का विषय है।
13 वर्षीय छात्रा परीक्षा देने के लिए घर से निकली थी। लेकिन वह स्कूल नहीं पहुंची ऐसे में शिक्षकों की सूचना पर स्वजन ने तलाश शुरू की तो रात में छात्रा का अर्धनग्न शव मिला।
प्रारंभिक तौर पर छात्रा के साथ दुष्कर्म के बाद हत्या की आशंका जताई जा रही है।
हमारी संवेदनाएँ मृतक परिजनों के साथ हैं।प्रकृति उन्हें इस असीम दुःख को सहने की शक्ति प्रदान करे।
@RajGovOfficial से हमारी मांगें हैं: मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई। पीड़ित परिवार को 1 करोड़ रुपये मुआवजा और एक सरकारी नौकरी।
@RajCMO@BhajanlalBjp
उत्तर प्रदेश का किसान आज दोहरी नहीं, तिहरी मार झेल रहा है–प्राकृतिक आपदा, आर्थिक बदहाली और सरकारी उदासीनता। वर्ष 2025 की खरीफ फसल प्रदेश के अनेक जिलों में अतिवृष्टि से पूरी तरह बर्बाद हो गई, लेकिन हजारों किसानों को आज तक न समुचित मुआवजा मिला और न फसल बीमा क्लेम। अब रबी की फसल भी असमय बारिश, ओलावृष्टि और छुट्टा/नीलगाय पशुओं की भेंट चढ़ गई है।
भाजपा की तथाकथित “डबल इंजन” वाली मुख्यमंत्री @myogiadityanath जी की सरकार हर वर्ष अपने बजट को “ऐतिहासिक रूप से बड़ा ” बताने के साथ-साथ “किसान हितैषी” बताती है। लेकिन सच यह है कि बजट के आंकड़े और खेत की हकीकत एक-दूसरे से मेल नहीं खाते।
वित्त वर्ष 2025–26 में सरकार ने कुल 8,08,736 करोड़ रुपये का बजट पेश किया, जिसमें फिर लगभग 89,353 रुपये करोड़ कृषि एवं ग्रामीण विकास के नाम पर रखे गए – यानी कुल बजट का लगभग 11%। इसके बावजूद कृषि विभाग को आवंटित लगभग 8,620 रुपये करोड़ में से केवल करीब 3,906 करोड़ रुपये (लगभग 45%) ही खर्च हो सके।चिंताजनक बात यह है कि इनमें भी कई महत्वपूर्ण योजनाओं पर एक रुपया तक खर्च नहीं किया जा सका। सीड पार्क और पीएम कुसुम जैसी महत्वपूर्ण योजनाएँ शून्य व्यय की स्थिति में रहीं।
यह साफ दर्शाता है कि समस्या संसाधनों की कमी नहीं, बल्कि प्राथमिकता और इच्छाशक्ति की कमी है।
किसानों ने कर्ज लेकर चना, मटर, राई, गेहूं, मसूर जैसी फसलें बोईं। फसल बर्बाद हुई तो आय शून्य हो गई। लेकिन सरकार की मशीनरी मुआवजा देने में धीमी और वसूली करने में तेज है। बिजली बिल के नोटिस, ऋण वसूली का दबाव–यह सब उस किसान पर डाला जा रहा है जिसकी फसल खेत में खड़ी-खड़ी खत्म हो चुकी है। यह अन्याय है, और इसे अब चुपचाप स्वीकार नहीं किया जाएगा।
हम @UPGovt से स्पष्ट और समयबद्ध निर्णय की मांग करते हैं–
1. खरीफ 2025 और रबी 2025–26 फसल नुकसान का प्रदेशव्यापी विशेष सर्वे 15 दिनों में पूरा कर मुआवजा जारी किया जाए।
2. लंबित फसल बीमा क्लेम तत्काल जारी किए जाएँ।
प्राकृतिक आपदा से प्रभावित किसानों का संपूर्ण सरकारी ऋण माफ किया जाए और वसूली पर तत्काल रोक लगे।
3. बिजली बिल वसूली पर राहत अवधि घोषित की जाए।
छुट्टा पशु/नीलगाय समस्या के स्थायी समाधान हेतु विशेष बजट का वास्तविक उपयोग सुनिश्चित किया जाए।
4. यदि बजट में हजारों करोड़ दिखाकर जमीन पर किसानों को राहत नहीं दी जाती, तो यह केवल प्रशासनिक विफलता नहीं, बल्कि अन्नदाता के साथ विश्वासघात है।
किसान प्रदेश की रीढ़ हैं। अगर उनकी पीड़ा नहीं सुनी गई, तो यह आवाज खेत से सड़क तक और सड़क से विधानसभा तक गूंजेगी।
अब तो जनता कहने लगी- “डबल इंजन का दावा… और काम नहीं आधा!”
उत्तर प्रदेश की जनता अब घोषणाएँ नहीं, बल्कि बदलाव चाहती है।
#ASP_K_Mission2027
#UPBudget2026
आज जिला संभल के गाँव धर्मपुर रत्ता में महान त्याग समर्पण की मूर्ति राष्ट्र माता रमा बाई आंबेडकर जी की जन्मजयंती पर कोटि कोटि नमन व श्रद्धा सुमन अर्पित और उनके विचारो को उजागर किया ।
सभी महापुरुषों के विचारो को हर गाँव हर घर तक पहुंचाना आज़ाद समाज पार्टी कांशीराम का लक्ष्य
कई दिनों से लगातार संविधान निर्माता बाबा साहब डॉ. आंबेडकर जी और बहुजन समाज पर अभद्र टिप्पणी करने वाला मनुवादी भड़ूये दिनेश LLM आज पिटाई हो गई बाद में जब डिबेट के लिय बोला तो अज्ञानी फर्जी दिनेश LLM ने अपनी इज़्ज़त बचाकर बगैर डिबेट करे ही भागा।
यह चेतावनी है उन सबके लिए जो बाबा साहब का अपमान करने की हिम्मत करते हैं।
अब बहुजन समाज चुप नहीं बैठेगा —अपमान का जवाब ज़मीन पर मिलेगा।
पिछले 5 वर्षों में 18,727 सरकारी स्कूलों का बंद होना और सिर्फ 1 साल में 8,475 प्राइवेट स्कूलों का खुलना यह साबित करता है कि सरकार की नीतियाँ शिक्षा को अधिकार नहीं, व्यापार बना रही हैं।
यह आँकड़े केवल संख्या नहीं हैं-यह गरीब, दलित, आदिवासी, पिछड़े और अल्पसंख्यक बच्चों के भविष्य पर सीधा हमला हैं, जिनके लिए सरकारी स्कूल ही शिक्षा का एकमात्र सहारा थे।
यह नई शिक्षा नीति नहीं, नई असमानता की नीति है। जो हमारे बहुजन महापुरुषों के विचारों के बिल्कुल विपरीत है।
उत्तर प्रदेश के जिला गाजियाबाद में तीन मासूम बहनों की आत्महत्या की हृदयविदारक घटना ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है।
ऑनलाइन गेमिंग और आभासी दुनिया की लत किस हद तक जानलेवा हो सकती है, यह त्रासदी उसका भयावह सच हमारे सामने रखती है।
बच्चों से मोबाइल छीन लेना समाधान नहीं है-समाधान है संवाद, समझ, भावनात्मक सुरक्षा और मानसिक सहयोग।
माननीय @AshwiniVaishnaw जी से आग्रह है कि इस विषय पर तत्काल संज्ञान लिया जाए-ऑनलाइन गेमिंग और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर सख्त नियंत्रण हो, नाबालिगों की डिजिटल सुरक्षा के लिए प्रभावी कानून लागू किए जाएँ,स्कूलों में मानसिक स्वास्थ्य और डिजिटल साक्षरता को अनिवार्य किया जाए
सरकार इस घटना को “निजी मामला” मानकर न टाले, बल्कि इसे सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट के रूप में देखे।
डिजिटल लापरवाही की भेंट चढ़ीं तीन मासूम बेटियों को नमन।
इस अपार दुख की घड़ी में शोकाकुल परिवार के प्रति गहरी संवेदना।
@mygovindia
यह आस्था सिंह हैं, जो HDFC बैंक में एक कर्मचारी हैं।
एक ग्राहक बैंक की सेवाओं के लिए रोज चक्कर लगाने पड़ते है तो उस ग्राहक का मनोबल टूट जाता है.
लेकिन आस्था सिंह की गुंडाई देखो कैसे अपनी जाति की धौंस दिखा रही है ऐसे लोगों को सबक सिखाने के लिए ही यूजीसी जरूरी है औऱ SC एक्ट।
मेरे अपने नगीना लोक सभा क्षेत्र के विकास तथा सम्मानित जनता के सहयोग के लिए सदैव तत्पर रहने वाले PSU में से एक, SAIL (स्टील अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया लिमिटेड) के स्थापना दिवस के अवसर पर @SAILsteel परिवार के सभी अधिकारियों, कर्मचारियों एवं श्रमिक साथियों को हार्दिक बधाई एवं मंगलकामनाएँ।
देश के औद्योगिक विकास, आत्मनिर्भर भारत और सामाजिक उत्तरदायित्व के निर्वहन में SAIL का योगदान अतुलनीय रहा है। आशा है कि SAIL भविष्य में भी राष्ट्र निर्माण के साथ-साथ क्षेत्रीय विकास और जनकल्याण में अपनी सशक्त भूमिका निभाता रहेगा।
@amrohapolice ऐसे लोगों पे कार्यवाही क्यों नहीं हुई खुलेआम संविधान की धज्जियां उड़ाकर मुसलमानों को देश से बाहर करने की बात कर रहा है @Uppolice@myogiadityanath
अमरोहा, उत्तर प्रदेश भारत को मुल्ला मुसलमान से आज़ाद होना चाहिए
हिंदू रक्षा दल द्वारा एक मस्जिद के बाहर आयोजित एक धार्मिक कार्यक्रम
के बाद, युद्धि राणा ने कथित तौर पर एक भड़काऊ बयान दिया, जिसमें कहा गया कि भारत को "मुल्ला (मुसलमानों से मुक्त) होना चाहिए।
@dmamroha@amrohapolice
@ghaziabadpolice आखिर चाहते क्या हो इन जैसे लोगों पर कार्यवाही कब होगी एक छोटी बच्ची को गाली देने वाला खुलेआम घूम रहा है @myogiadityanath आपका बुलडोजर और मुकदमा के लिए कलम गरीब कमजोरों पे ही चलता है @dgpup इसे गिरफ्तार करो @Uppolice हमारी बहन के लिए हम कुछ भी करेंगे
यह है @DRPRAKASHSING14
जो मुझ जैसी 14 साल की नाबालिक बच्ची को इतनी गंदी गंदी गलियां दे रहा है..
मैं ऐसा क्या ही संदेश देती हूँ समाज को जो इन्हें इतनी परेशानी है कि ये मुझको गलियाँ देकर नीचा दिखा रहे हैं..
@Uppolice@ghaziabadpolice@dm_ghaziabad से निवेदन है कि कृपया करके इस गंदी मानसिकता वाले व्यक्ति @DRPRAKASHSING14 पर जल्द से जल्द और कड़ी से कड़ी कार्रवाई कर उसके ऊपर एससी एसटी एक्ट लगाइए और प्रशासन के पास 3 दिन का समय है नहीं तो 15 तारीख को गाजियाबाद कमिश्नर ऑफिस का मैं खुद करूँगी घेराव करूंगी
@BhimArmyChief@SatyapalChASP@priyanshu__63
40 साल तक झाड़ू लगवाओ, पूरी ज़िंदगी खपा लो और फिर कहो—नौकरी अस्थायी है!
पंजाब एवं हरियाणा माननीय उच्च न्यायालय की यह कड़ी टिप्पणी केवल एक कर्मचारी के लिए नहीं, बल्कि उस पूरे तंत्र के लिए आईना है, जो श्रम से सब कुछ लेता है, पर सम्मान और सुरक्षा देने से भागता है।
माननीय उच्च न्यायालय ने हरियाणा सरकार को “संस्थागत शोषक” बताया और साफ कहा—
जिस श्रम से सार्वजनिक संस्थान चलते हैं, उसी श्रम को दशकों तक अस्थायी बनाए रखना संविधान की आत्मा, समानता, गरिमा और सामाजिक न्याय का खुला उल्लंघन है।
1986 से लगातार सेवा देने वाले सफाईकर्मी बीर सिंह उर्फ भीरा का रिकॉर्ड बेदाग है। उनका काम न तो अस्थायी है, न ही कभी-कभार किया जाने वाला —वह इस व्यवस्था की रीढ़ है।
फिर सवाल उठता है—क्या यही “मॉडल एम्प्लॉयर” है? ,क्या यही समाजवादी गणराज्य की परिकल्पना है? , क्या सफाईकर्मी का पसीना सस्ता है?
माननीय उच्च न्यायालय ने स्पष्ट कर दिया है—
तकनीकी बहानों के पीछे छिपकर श्रम का शोषण न कानूनी है, न नैतिक।