रसूलुल्लाह ﷺ ने फ़रमाया:-
कब्र आख़िरत की पहली मंज़िल है। अगर कोई उससे बच गया, तो उसके बाद की मंज़िलें आसान होंगी, और अगर उससे न बच सका, तो उसके बाद की मंज़िलें उससे भी कठिन होंगी।
Jami' al-Tirmidhi:2308
रसूलुल्लाह ﷺ ने फ़रमाया:-
जिस व्यक्ति में ये तीन बातें होंगी, वह ईमान की मिठास पाएगा: अल्लाह और उसके रसूल उसे हर चीज़ से अधिक प्रिय हों.
Sahih al-Bukhari:16
नबी ﷺ ने फ़रमाया:-
क़ियामत के दिन घमंडी लोगों को इंसानों के रूप में चींटियों के समान छोटा करके उठाया जाएगा। हर तरफ़ से उन पर जिल्लत छाई होगी।
Jami at-Tirmidhi:2492
रसूलुल्लाह ﷺ ने फ़रमाया:-
जब अल्लाह तआला ने सारी मख़लूक़ को पैदा कर लिया, तो उसने अपने पास अर्श के ऊपर रखी हुई किताब में लिख दिया: ‘बेशक मेरी रहमत मेरे ग़ज़ब (क्रोध) पर ग़ालिब है।
सहीह अल-बुखारी:7418
रसूलुल्लाह ﷺ ने फरमाया:-
अल्लाह की मख़लूक़ उसका परिवार है, और अल्लाह को सबसे अधिक प्रिय वह है जो उसकी मख़लूक़ के साथ सबसे अच्छा व्यवहार करे।
अल-मु'जम अल-अव्सत:5787
नबी ﷺ ने फ़रमाया:-
"जो लोगों का माल लौटाने की नीयत से लेता है, अल्लाह उसकी मदद करता है; और जो हड़पने की नीयत से लेता है, अल्लाह उसे तबाह कर देता है।
Sahih al-Bukhari:2387
नबी ﷺ ने फ़रमाया:-
अरफ़ाह के दिन के रोज़े के बारे में मुझे अल्लाह से उम्मीद है कि वह पिछले साल और अगले साल के गुनाहों का कफ़्फ़ारा (माफ़ी) बन जाएगा.
सहीह मुस्लिम:1162
रसूलुल्लाह ﷺ ने फ़रमाया:
“ख़ुत्बे में हाज़िर रहो और इमाम से क़रीब रहो, क्योंकि आदमी बराबर दूर होता रहता है, यहाँ तक कि वह जन्नत में भी पीछे कर दिया जाता है, अगरचे वह उसमें दाख़िल होता है।”
(सुनन अबू दाऊद: 1108)
बुध के दिन दुआ की क़बूलियत
हज़रत जाबिर रज़ियल्लाहु तआला अन्हु फ़रमाते हैं:
“मैं बुध के दिन ज़ुहर से अस्र के दरमियान दुआ करता हूँ, मेरी दुआ क़बूल हो जाती है।”
(मुस्नद इमाम अहमद बिन हम्बल, 5/87, हदीस: 14569)
रसूल अल्लाह ﷺ ने फ़रमाया:-
“किसी अरब को किसी अजमी पर, और किसी अजमी को किसी अरब पर, किसी गोरे को किसी काले पर, और किसी काले को किसी गोरे पर कोई बड़ाई नहीं; सिवाय तक़वा के।”
Musnad Ahmad:22978