आजादी के आंदोलन में जो लोग क़ुर्बानियाँ दे रहे थे आरएसएस या तथाकथित हिन्दूवादी उन सबके विरुद्ध थे। ये भारत को कभी अपना देश माने ही नहीं।इनकी लड़ाई देश के लिए नहीं बल्कि देशवासियों से अपने वर्चस्व की लड़ाई है।इसीलिए ये आम जनता के शोषण में विश्वास करते हैं ।
सोचिए कि ये क्यों नहीं हेडगेवार,गोलवरकर,श्यामा प्रसाद मुखर्जी व अन्य हिन्दूवादी नेताओं का नाम देश के संदर्भ में लेते? क्योंकि उनका देश के लिए कोई योगदान नहीं था।वस्तुतः ये देश विरोधी गतिविधियों में लिप्त थे।
ये उन नेताओं का नाम लेते हैं जो इनकी सोच के विरोधी थे। कभी सुभाष चंद्र बोस, कभी सरदार पटेल तो कभी आजाद भगत सिंह की नाम लेते हैं।
आरएसएस और इसके पाले हुए लोग कभी देशप्रेमी हो ही नहीं सकते और न ही देश की जनता को समान दृष्टि से देखते हैं।
Look at those cameras 🤯
The press turnout for the CJP conference is insane. The whole country is tuning in. The youth are speaking, and the nation wants to know! (No wonder Godi media is so rattled).