The silence surrounding the brutal five-day gang-rape of an innocent 13-year-old girl by 30 men in Ganganagar is absolutely deafening.
There are no protests, no mainstream news broadcasts and no trending topics on X for an act so monstrous.
It raises a disturbing question: is the public and media look the other way purely because this happened under a BJP administration?
Everything is allowed under BJP watch?
RT Please: गाजियाबाद में 17 साल के ज़ैद की बाइक का हैंडल राहुल मावी उर्फ पहलवान की कार से टकरा गई। इतनी सी बात पर ज़ैद का नाम पूछा गया, बहस हुई। जिसके बाद राहुल मावी और उसका दोस्त अनुज कसाना उसे एक दूसरी जगह ले गए और पीट पीटकर मार डाला। इस मामले पर @StrikeOriginals पर हमने एक ग्राउंड रिपोर्ट रिलीज की है। लिंक- https://t.co/VBap9wzO6X
वायजा खान 4 साल से UP TET की तैयारी कर रही थी, मौक़ा आया बड़े उम्मीद के साथ फार्म भरी।
एडमिट कार्ड पर दिए गए पते मेरठ पहुंची तो वहां सेंटर पर कोई पेपर ही नहीं हो रहा था, शिकायत की और आनन- फानन में दोबारा एडमिट कार्ड प्रिंट कराई तो सेंटर मुरादाबाद निकला।
विभाग की तकनीकी लापरवाही से वायजा खान की परीक्षा छूट गई। वायजा चाहती है अब उनका एग्जाम दोबारा हो या सरकार भरपाई करें।
अमरोहा, उत्तर प्रदेश
यह मामला भी उसी ग़ाज़ियाबाद का है, जिस गाजियाबाद में सूर्य की हत्या के बाद पुलिस ने हत्यारोपी असद को एनकाउंटर में मारकर सूर्या का ‘बदला’ ले लिया था। अब उसी गाजियाबाद में मोहित को गौरव, देव, हरि और अन्य दोस्तों ने मिलकर मौत के घाट उतार दिया। अब सवाल यह है कि जिस तरह सूर्या को ‘इंसाफ’ दिलाया गया है, क्या उसी तरह मोहित को भी इंसाफ दिलाया जाएगा? क्या मोहित के हत्यारोपितों को एनकाउंटर में ढेर करके यूपी पुलिस यह सुनिश्चित करेगी कि उनकी गोली बगैर जाति धर्म देखे, बिना भेदभाव के चलती है।
देखना यह भी है कि हिन्दुवादी संगठनों के फ्रिंज एलिमेंट्स मोहित को न्याय दिलाने के लिए वैसा ही हंगामा करते हैं कि नहीं, जैसा सूर्या को न्याय दिलाने के लिए किया था। या फिर चढ़ावा चोरी की तर्ज़ पर @BHUPENDER_HRD कह देगा कि हिंदू को हिंदू ने मार दिया, तुम्हें क्यों मिर्ची लग रही हैं।
सिर्फ़ दो ही संभावनाएँ हैं।
या तो रक्षा मंत्री @rajnathsingh ने जब संसद को संबोधित किया तो उनकों यह जानकारी ही नहीं थी कि छह सैनिक शहीद हो चुके थे। यदि ऐसा है, तो यह उस मंत्री पर गंभीर प्रश्नचिह्न है, जिसे उसी मंत्रालय के मामलों की जानकारी नहीं है जिसका वह नेतृत्व कर रहे हैं।
या फिर उन्हें सच्चाई मालूम थी और इसके बावजूद उन्होंने संसद को गुमराह करना चुना। यह उससे भी अधिक गंभीर है, क्योंकि इससे यह सिद्ध होता है कि यह सरकार लोकतंत्र के मंदिर में, शपथ के साथ, देश से झूठ बोलती है।
जो भी सच हो, कुछ तथ्य नहीं बदलते -
हमारे छह वीर जवानों ने कर्तव्य निभाते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया। लेकिन उनके बलिदान को छिपाया गया। उन्हें वह सम्मान और मान्यता नहीं दी गई जिसके वे हकदार थे। और उनके परिवारों से वह पारदर्शिता भी छीन ली गई जिसकी वे अपेक्षा रखते थे।
यह हमारे सैनिकों का अपमान है, और कोई भी सच्चा देशभक्त इस पर मौन या संतुष्ट नहीं रह सकता।
वेज चिकन पार्टी थी शायद...
कल तक गंगा में इफ्तार करने से जिनकी भावनाएँ आहत हो रही थीं, आज उसी गंगा में चिकन और शराब की पार्टी से किसी की भावनाएँ आहत क्यों नहीं हो रही हैं? शायद इसलिए कि इस बार पार्टी करने वाले दूसरे समुदाय के हैं।
इधर हम लोग कॉक्रोज प्रोटेस्ट की तरफ देख रहे थे।
उधर कुछ जागरूक लोगों ने मुहम्मद साहब पर अभद्र टिप्पणियां करने वाली नाजिया इलाही पर #FIR करवा दी।
फ्रीडम ऑफ स्पीच की आड़ में आप दुसरो के धर्म को गालियाँ देकर फेम पाना चाहते हो। देश की छवि को डेंट करते हो तो आपसे बड़ा गद्दार कोई दूसरा नहीं है।
पुलिस और कानून का डंडा अब घूमना ही चाहिए।
तुम लोग स्टूडेंट्स हो इसलिए चाहे लटक कर परीक्षा देने जाओ या फिर जनरल बोगी में ठूंसकर,
अगर तुम कांवड़िए होते तो हेलिकाप्टर से पुष्प वर्षा का प्लान करता।
बेंगलुरु में राज्यपाल के काफिले के लिए 30 मिनट तक ट्रैफिक रोका गया।
इस दौरान अपनी गर्भवती पत्नी को अस्पताल ले जा रहा एक व्यक्ति जाम में फंस गया और विरोध में बैठ गया।
ये VVIP संस्कृति अब खत्म होनी चाहिए, उस व्यक्ति को पूरा समर्थन।