माननीय सांसद महोदय, आदरणीय श्री @SIGRIWALBJP जी
पूर्व प्रधानमंत्री श्रद्धेय श्री चंद्रशेखर जी भारतीय राजनीति के उन विरले नेताओं में रहे, जिन्होंने सिद्धांत, स्वाभिमान, सादगी और राष्ट्रहित को सदैव सर्वोपरि रखा। उनका संपूर्ण सार्वजनिक जीवन लोकतांत्रिक मूल्यों और जनसेवा के
आज समाजवादी विचारधारा के प्रखर पुरोधा एवं भारत के पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय श्री चंद्रशेखर जी की जयंती समारोह के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में सम्मिलित होकर उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन एवं भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
@SIGRIWALBJP करते हुए उन्हें मरणोपरांत भारत रत्न प्रदान किया जाए। चंद्रशेखर जी को "भारत रत्न" सम्मान केवल एक महान जननायक के प्रति राष्ट्र की कृतज्ञता ही नहीं होगा, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को मूल्य आधारित राजनीति की प्रेरणा भी देगा और यही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
पूर्व
भाजपा ने बांकीपुर से युवा और कायस्थ समाज के चेहरे अभिषेक बंटी को उम्मीदवार बनाया है। वे नितिन नवीन के करीबी माने जाते हैं।
बांकीपुर की जनता से आग्रह है कि बढ़ चढ़कर अभिषेक बंटी का समर्थन करें। आज बिहार में कायस्थ समाज का प्रतिनिधित्व पहले ही सीमित हो चुका है। बांकीपुर लंबे समय से कायस्थ समाज का गढ़ रहा है, इसलिए इस सीट को किसी और खाते में नहीं जाने देना चाहिए।
अगर समाज की राजनीतिक भागीदारी मजबूत करनी है, तो यह चुनाव महत्वपूर्ण है।
जय कायस्थवाद 🔥
मृत्यु शय्या पर लेटे हुए लोकनायक जय प्रकाश नारायण एक 18-19 साल के युवा श्याम रजक का हाथ युवा तुर्क चंद्रशेखर के हाथ में रखते हुए बोले थे- "चन्द्रशेखर अब तो हम जा रहे हैं, तुम इस लड़के का ख्याल रखना।" इसके बाद श्याम रजक आजीवन चंद्रशेखर जी के साथ रहे। एक इंटरव्यू में श्याम रजक जी भावुक होकर कह रहे थे कि चंद्रशेखर जी उन्हें अपने बेटे से भी ज्यादा मानते थे। आज जो भारत की राजनीति में विविधता दिखती है उसमें जय प्रकाश नारायण और चंद्रशेखर का बहुत बड़ा योगदान था। दबे-कुचले समाज के ऐसे हजारों नौजवानों को जय प्रकाश नारायण और चंद्रशेखर सड़क से उठाकर अर्स पर पहुंचाए थे।
चन्द्रशेखर जी का खुद का जीवन अभाव में बीता था, सोशलिस्ट पार्टी के लखनऊ दफ्तर में वे लंबे समय तक दफ्तर के रसोई का सारा बर्तन मांजते थे। यही कारण रहा कि दिल्ली में जब चंद्रशेखर जी की स्थिति थोड़ी बेहतर हुई तो वे अपने समय के पूरे देश भर के स्ट्रगल कर रहे नौजवान नेताओं के लूंगी, गंजी से लेकर रहने, खाने का इंतजाम करते थे।
बीते 17 अप्रैल को चन्द्रशेखर जी के जनशताब्दी के अवसर पर उनकी याद में दिल्ली के कांस्टीट्यूशन क्लब में जब कार्यक्रम का आयोजन हो रहा था तो आयोजन शुरू होने के आधा घंटा पहले तक हॉल लगभग 40% ही भर पाया था। मेरे मन में आशंका थी कि पता नहीं हॉल आधा से ज्यादा खाली रह जाएगा क्या? लेकिन कार्यक्रम शुरू होते-होते 1200 की कैपिसिटी वाला हॉल खचाखच भर गया। यहां तक कि कई लोग खड़े होकर कार्यक्रम को सुन रहे थे।
कार्यक्रम खत्म होने के दो दिन बाद मैंने देश के एक बड़े पत्रकार से पूछा था कि सर बताइए चंद्रशेखर जी को दुनिया से गए हुए 19 साल होने वाला है, उनकी न कोई पार्टी है, न उनके बेटे इतने प्रभावी हैं कि लोगों कि बहुत मदद कर पाए, फिर लोगों में चंद्रशेखर जी के प्रति ऐसी दीवानगी क्यों है?" इस पर उस वरिष्ठ पत्रकार ने मुझे कहा कि "देखो ऐसा है कि चंद्रशेखर जी का व्यक्तित्व ऐसा था कि उनसे मिलने पर कोई भी व्यक्ति उनसे प्रभावित हुए बिना नहीं रह सकता था। दूसरी बात कि तुम जो हॉल में इन दो-तीन हजार लोगों को आते-जाते देखे इसमें से नौजवानों को हटा दिया जाए तो सबसे के सब चंद्रशेखर जी के एहसानों तले दबे हैं। इन सब लोगों के बुरे वक्त में चन्द्रशेखर जी ने मदद की थी।"
आज की राजनीति में स्थापित लोगों को जब देखता हूं कि उसे अपने परिवार, बाल-बच्चे से अलग कुछ और दिखता ही नहीं है तो लोक नायक जयप्रकाश नारायण और चंद्रशेखर बरबस याद आते हैं। काश कि हमारे समय में कोई जेपी, कोई चंद्रशेखर होते! मेरे जीवन के सबसे बड़े आदर्शों में से एक आदरणीय चन्द्रशेखर जी की पुण्यतिथि पर सादर नमन...🌸🙏
एक ऐसी महान शख्सियत, जिनके लिए स्वाभिमान से बड़ा कोई पद नहीं था।
दृढ़ता, साहस और ईमानदारी के साथ राष्ट्रहित एवं जनहित की लड़ाई लड़ने वाले, भारत के पूर्व प्रधानमंत्री, जनप्रिय नेता, श्रद्धेय स्वर्गीय चन्द्रशेखर जी की पुण्यतिथि पर उन्हें कोटि-कोटि नमन।
प्रधानमंत्री के रूप में
"सियासत में यूँ सादगी का धरोहर हो जाना,
आसान नहीं किसी का 'चन्द्रशेखर' हो जाना..."
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एक ऐसी महान विभूति, जिनके लिए स्वाभिमान किसी भी पद से बड़ा था।
जो कभी न राज्य सरकार में मंत्री रहे और न ही केंद्र सरकार में, लेकिन अपने अद्वितीय व्यक्तित्व, जनसेवा, सिद्धांतों और संघर्षशील
जीवन के बल पर सीधे भारत के प्रधानमंत्री बने।
बलिया के बाबू साहब, युवा राजनीति के प्रेरणास्रोत, दृढ़ संकल्प, निष्पक्ष राजनीति, अदम्य साहस और सादगी के प्रतीक, भारत के पूर्व प्रधानमंत्री #ChandraShekhar जी की पुण्यतिथि पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि एवं शत-शत नमन। 💐🙏
सामुहिक हित की सोच नहीं है और ना ही जातीय लाबी है । इसका एक और नुकसान हो गया । साहेबगंज के कद्दावर विधायक राजू सिंह एक ऐसे केस मे जेल चले गए जो उन्होंने जानबूझकर कर नहीं किया था । जो जानबूझकर कर अपराध करते हैं वो अपनी जातीय लाबी की वज़ह से बच जाते हैं लेकिन बेचारे राजू सिंह अपने समाज की मूर्खता की वज़ह से जेल गए। पीढ़ियों नुकसान झेल भी यह समाज नहीं सुधरा। हम सिर्फ एक जाति हैं तो आपस मे शादी विवाह कर लेते हैं लेकिन हम कोई समाज नहीं है । बिहार का तो अस्सी फीसदी राजपूत जनता भी नहीं होगा कि राजू सिंह कौन हैं। इसी मूर्खता की वज़ह से कोई राजपूत बिहार मे पांच साल सीएम नहीं रहा है । बहुत कुछ है बिहार को लेकर लिखने के लिए लेकिन इतना ही लिखूँगा की अपने समाज को जानिए। अपने लोगों का साथ देना सीखिए।
स्वर्गीय नरेंद्र सिंह जी को उनकी पुण्यतिथि पर सादर प्रणाम।
नरेंद्र सिंह बिहार के एक दिग्गज समाजवादी नेता, कद्दावर राजपूत चेहरा और पूर्व कैबिनेट मंत्री थे, जिन्होंने तीन दशकों से अधिक समय तक जमुई जिले की राजनीति की धुरी के रूप में काम किया। पटना विश्वविद्यालय की छात्र राजनीति और 1974 के जेपी आंदोलन से उभरे नरेंद्र सिंह को 21 फरवरी 1991 को जमुई को पूर्ण जिला का दर्जा दिलाने का मुख्य सूत्रधार माना जाता है। वे पहली बार 1985 में चकाई विधानसभा क्षेत्र से विधायक चुने गए थे और साल 2000 के चुनाव में उन्होंने चकाई और जमुई दोनों सीटों से एक साथ चुनाव जीतकर इतिहास रच दिया था। साल 2005 में नीतीश कुमार की सरकार बनवाने में उन्होंने 'किंगमेकर' की भूमिका निभाई और अपने राजनीतिक जीवन में बिहार के कृषि और स्वास्थ्य मंत्री जैसे कई महत्वपूर्ण विभागों का कार्यभार संभाला। लंबे समय तक लीवर की बीमारी से जूझने के बाद 4 जुलाई 2022 को पटना के एक अस्पताल में उनका निधन हो गया ।
यह आपके विचार को अधिक प्रभावशाली और औपचारिक रूप में प्रस्तुत करता है:
महाराजगंज लोकसभा की जनता की यह प्रबल मांग है कि इस बार हमारे क्षेत्र को केन्द्रीय मंत्रीमंडल में उचित प्रतिनिधित्व मिले। हमारे लोकप्रिय जनसेवक एवं माननीय सांसद श्री जनार्दन सिंह सिग्रीवाल जी ने वर्षों से
@narendramodi@SIGRIWALBJP@BJP4India जनता की सेवा और क्षेत्र के विकास के लिए निरंतर कार्य किया है।
अतः हम माननीय प्रधानमंत्री जी से विनम्र आग्रह करते हैं कि श्री जनार्दन सिंह सिग्रीवाल जी को इस बार केन्द्रीय मंत्रीमंडल में स्थान देकर महाराजगंज लोकसभा की जनता की भावनाओं का सम्मान करें। हमें विश्वास है कि उनके
राजा मान सिंह (कछवाहा) ने अफ़ग़ानों के पाँचों क़बीलों पर फ़तह करके अपने ध्वज को पचरंगा किया। बोलना था; राजा मान सिंह या कच्छवाहा आ रहा है, ना कश्मीर में पठान रहते हैं, ना चौहानों का कोई सीधा वास्ता रहा पठानों से। जिनको पठान बहुत प्यारे, वो अफ़ग़ानिस्तान का हाल देखें। बॉलीवुड सुविधानुसार क्षत्रिय आइडेंटिटी का उपयोग बंद करे। #Chauhan
बिहार मे ब्राह्मण, कायस्थ, भूमिहार और कुर्मी समाज मे शिक्षा के लिए माहौल आजादी से पहले से है और इनकी यूपीएससी और bpsc की नौकरियों मे अच्छी उपस्थिति है। लेकिन जिस तरह पहले ये दूसरी जातियों से इन सेवाओं मे काफी आगे थे वही अब राजपूत, अहिर,koeri और बनिया ने खुद के प्रदर्शन मे काफी सुधार किया है। एकतरफ़ा दबदबा किसी का नहीं है।सबसे ज्यादा सुधार राजपूत और अहिर के रिजल्ट मे आया है। यह सिर्फ upsc और bpsc के रिजल्ट मे स्थिति है।
अब IIM,Medical,IIT, Banking sector, ssc cgl, Bihar Police SI के रिजल्ट को देखना होगा तभी पूरी तस्वीर समझ आएगी।
राजपूतों मे समाज को लेकर कोई भी जानकारी निकालना बिल्कुल असंभव है क्यूंकि कोई लिखता ही नहीं है।
इस बार के bpsc मे किसी भी जाति के पास 75 से ज्यादा के रिकॉर्ड नहीं हैं। सफलता इससे ज्यादा को हो सकता है मिली हो पर रिकॉर्ड जब तक नहीं होगा तब तक कोई भी नंबर सिर्फ अनुमान ही है।