हमने हमेशा अँधेरों को पहचानने में भूल की
उससे भी ज़्यादा अपने सवेरों को पहचानने में भूल की
अब क्या भूल की
वह भी भूलते जा रहे हैं हम।
-शिरीष कुमार मौर्य
रीवा:-नगर निगम की चयनात्मक कार्यवाही पीड़ित की गोमती उठाकर ले गई उड़न दस्ता टीम बाकी राखी गोमतीयों पर कोई कार्यवाही नहीं फुटपाथ पर अवैध बने शेड पर कोई कार्रवाई नहीं क्या नगर निगम अब चुनकर करेगा कार्यवाही
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बग़ैर संघर्ष के जीना
अपमान है परिश्रम का
बग़ैर संघर्ष के खाने से
ख़ुश नहीं होता अनाज
बग़ैर संघर्ष के प्यास बुझे तो
प्यासा रह जाता है पानी।
~ सारुल बागला
"मैं पूरे का पूरा थक गया हूँ
इस मशीनी-सी अफरा-तफरी में चलते हुए
जहाँ रिश्ते अँधे वेग में, अपने अर्थों से टकरा गए हैं
मैं - जो सिर्फ़ एक आदमी बनना चाहता था
यह क्या बना दिया गया हूँ?"
पाश
उदास बस आदतन हूँ कुछ भी हुआ नहीं है
यक़ीन मानो किसी से कोई गिला नहीं है
अधेड़ कर सी रहा हूँ बरसों से अपनी परतें
नतीजतन ढूँढने को अब कुछ बचा नहीं है
- इरफ़ान सत्तार
मीर पर बातें करो
तो वे बातें भी उतनी ही अच्छी लगती हैं
जितने मीर
और तुम्हारा वह कहना सब
दीवानगी की सादगी में
दिल-दिल करना
दुहराना दिल के बारे में
ज़ोर देकर कहना अपने दिल के बारे में कि
जनाब यह वही दिल है
जो मीर की गली से हो आया है।
आलोक धन्वा
इतनी रेलें चलती हैं
भारत में
कभी
कहीं से भी आ सकती हो
मेरे पास
कुछ दिन रहना इस घर में
जो उतना ही तुम्हारा भी है
तुम्हें देखने की प्यास है गहरी
तुम्हें सुनने की
कुछ दिन रहना
जैसे तुम गई नहीं कहीं
आलोक धन्वा
मन बैरागी, तन अनुरागी, क़दम-क़दम दुश्वारी है
जीवन जीना सहल न जानो, बहुत बड़ी फ़नकारी है
औरों जैसे होकर भी हम बाइज़्ज़त हैं बस्ती में
कुछ लोगों का सीधापन है, कुछ अपनी अय्यारी है
- निदा फ़ाज़ली
सीधी लकीर खींचना टेढ़ा काम है। सहज भाषा पाने के लिए कठोर तप आवश्यक है। जब तक आदमी सहज नहीं होता, तब तक भाषा का सहज होना असम्भव है।
हज़ारीप्रसाद द्विवेदी