"You will not see OBC or SC ST as news anchor on media channel"
- Rahul Gandhi 🔥
Arnab Goswami, Rajat Sharma, Aman Chopra all come from GCs
Can they bend BJP govt on UGC guideline issue? 😭😭
एंकर “क्या UGC नैचुरल जस्टिस के ख़िलाफ़ है”
बहुजनों के साथ अन्याय को इतना नेचुरल बना दिया है की उनपर अत्याचार करने का अधिकार भी नेचुरल लगने लगा है!
ये चिंता नहीं की रोहित, पायल और दर्शन की माँ अपने बच्चों को खोने के बाद सुप्रीम कोर्ट गई केवल इसलिए की 2012 का UGC क़ानून देश में ढंग से लागू नहीं हुआ और उनके बच्चे उनसे छिन गए!
ये चिंता नहीं की विश्वविद्यालयों में Caste Discrimination को आज तक civil act माना गया है Criminal Act नहीं बनाया गया इसलिए जेल जाने की नौबत नहीं आती तो धड़ल्ले से जातिगत भेदभाव कर रहे हैं।
अंत में Equity कमिटी मामले को VC के पास भेजेगी और VC की देश में कितनी डाइवर्सिटी है सबको पता है !
शर्म नहीं आती उन लोगों को जो आज भी दमन का अधिकार जारी रखना चाहते हैं!
मैडम जी!
मीडिया में तो कोई जातिगत आरक्षण नहीं है, 90 % एंकर सवर्ण और उसमे भी ब्राह्मण है सर्वाधिक। आपकी विश्व में क्या रैंकिंग है, भारतीय मीडिया तो टॉप पर होनी चाहिए, क्यूंकि सर्वश्रेष्ठ जाति के ही सारे एंकर और रिपोर्टर है। उसके बाद भी 180 में से 151 वा स्थान है इनका, और बातें करते है मेरिट की।
आपके जैसे निम्न दर्जे के पत्रकार क्यों पैदा हो रहे है ? जिनको एक सीधा सा नियम समझ नहीं आता।
'एक फोन लगाऊंगा सारी सड़कें बंद हो जाएंगी, हाथ मत लगाना'
◆ पुलिस से भिड़े भीम आर्मी चीफ चंद्रशेखर रावण
◆ मेरठ जाने की जिद पर अड़े थे सांसद चंद्रशेखर
#Chandrashekhar | @BhimArmyChief | Chandrashekhar
भाजपा सरकार में अगर रत्ती भर भी शर्म बची हो तो अपराधियों की तरफ़दारी छोड़कर ‘मेरठ की बेटी’ को बचाया जाए और मृतक माँ के पार्थिव शरीर को यथोचित सम्मान दिया जाए और पीड़ित परिवार को न्याय सुनिश्चित किया जाए।
सत्ता सजातीयों का ये खेल अब केवल शासन तक सीमित नहीं रह गया है बल्कि प्रशासन की भी पूरी संलिप्तता है। ऐसे अयोग्य अधिकारियों से ये मामला कैसे सुलझ सकता है जो उप्र में पूरब में गोरखपुर से लेकर पश्चिम में मेरठ तक अपने कांडों के लिए कुख्यात रहे हैं।
जो लोग सजातीयों को बचाने में लगे हैं, वो अपने नाम के विपरीत ‘सुर’ बिगाड़कर मुंबई तक को निशाने पर ले लेते हैं। ऐसे बड़बोले ‘असंगत’ लोग कान खोलकर सुन लें कि वो चाहे जितनी कोशिश कर लें पर अब वो पीडीए समाज की माँ के हत्यारों और बेटी के अपहरणकर्ताओं को बचा नहीं पाएंगे। वो जान लें अपराधी की ‘संगति’ करनेवाला भी, अपराधी ही होता है।
अपराधी को पनाह भी गुनाह है!