कोई बताएगा कि उस पत्रकार को
कितने नंबर का चश्मा लगना चाहिए
जो बोल रहा था कि जंतर-मंतर दिल्ली में
आज़ कोकरोच जनता पार्टी के आंदोलन में
युवाओं की संख्या 40 से नीचे थी.....
229 दिनों तक जेल की यातना सहने के बाद बहादुर नेता @MehrajMalikAAP के ऊपर लगाया गया PSA क़ानून J & K हाईकोर्ट ने पूरी तरह रद्द कर दिया।
बधाई हो मेरे भाई।
बाहर आओ स्वागत है।
सलाम है तुम्हारे संघर्ष को।
“जुल्मी कब तक जुल्म करेगा सत्ता के हथियारों से
जर्रा-जर्रा गूँज उठेगा इंक़लाब के नारों से”
एक बार फिर सत्यमेव जयते 🇮🇳
JK हाई कोर्ट ने AAP विधायक मेहराज मालिक पर लगाया गया PSA ही क्वैश कर दिया है और उन्हें तुरंत जेल से रिहा करने के आदेश दिए हैं।
आप नेताओं पर बिना वजह फर्जी मुकदमे लगाने वाली, अहंकारी और तानाशाही भाजपाई सत्ता के गाल पर एक और कानूनी तमाचा।
जम्मू-कश्मीर के सभी AAP workers और लंबी कानूनी लड़ाई लड़ने वाले सभी advocates को बधाई।
मोदी जी ने सदन में बयान दिया और उसके बाद देशभर में Panic create हो गया। इस मुसीबत के समय भाजपा और प्रधानमंत्री कितने सीरियस हैं, वह इस बात से समझिए कि All party meeting बुलाई और प्रधानमंत्री जी उसमें शामिल ही नहीं हुए।
- @attorneybharti जी, AAP नेता
ये गर्व की बात है कि आज हरियाणा विधानसभा में भी पंजाब की आम आदमी पार्टी सरकार के जनहितकारी कामों की चर्चा हो रही है। भगवंत मान जी की सरकार की ‘जिसका खेत, उसकी रेत’ नीति ने पंजाब के किसानों को हक़ दिया और माफ़िया पर लगाम लगाई।
अच्छी नीतियाँ सीमाएँ नहीं देखतीं … अब दूसरे राज्य भी पंजाब मॉडल अपनाने की बात कर रहे हैं।
AQI ऐसा टेम्परेचर है जो कोई भी इंस्ट्रूमेंट्स है नाप सकते हैं! इसके लिए पानी देना ही बस एक मात्र तरीक़ा है। हम भी पानी दे रहा है”!
धन्य हो गई दिल्ली ऐसी विद्वान मुख्यमंत्री पाकर। इन्हें AQI बुखार लग रहा है जिसे थर्मामीटर या छू कर बता देंगे कि ज्यादा गर्म है तो मतलब AQI ज्यादा है।
ये हैं दिल्ली के मुख्यमंत्री! इनको फिजिक्स का नोबल प्राइज़ ज़रूर देना चाहिए
कल पूरे देश ने मोदी जी की डिग्री पर सवाल उठाया...जब डिग्री का सच सामने आया तो ध्यान भटकाने के लिए आज सौरभ भारद्वाज पर ED की रेड कराई जा रही है।
सवाल साफ़ था कि क्या मोदी जी की डिग्री फ़र्ज़ी है? लेकिन उस सवाल का जवाब देने की हिम्मत नहीं पड़ी, इसलिए आम आदमी पार्टी के नेताओं पर रेड डाल दी गई।
जिस दौर का ये केस बताया जा रहा है, उस समय सौरभ मंत्री थे ही नहीं। इसका सीधा मतलब है कि जैसे इनकी डिग्री फ़र्ज़ी है वैसे ही केस भी फ़र्ज़ी हैं।
याद कीजिए सत्येंद्र जैन को। तीन साल जेल में रखा गया, CBI और ED ने दिन-रात खंगाला, लेकिन कोई सबूत नहीं मिला। सच्चाई ये है कि ये सारे केस फ़र्ज़ी हैं। असली लड़ाई सच्चाई की नहीं, बल्कि आम आदमी पार्टी की ईमानदारी को दबाने की है।
वोट चोरी से बनी सरकार से और उम्मीद भी क्या की जा सकती है? जनता से वोट से चुनकर सरकार बनी होती तो इस तरह सरकारी कर्मचारियों के भरोसे रैली नहीं करनी पड़ती। लोग खुद रैली में आते।
कल दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी की सभा है।
👉 इस सभा में सभी सरकारी डिपार्टमेंट के टीचर्स और कर्मचारियों को मैंडेटरी आदेश दिया गया है कि वे रैली में मौजूद रहें।
📝 आदेश साफ़ दिखाता है कि दिल्ली की जनता भाजपा से बेहद नाराज़ है। दिल्ली में भाजपा सरकार जनता के वोट से नहीं, बल्कि वोट की चोरी से बनी है।
अब क्योंकि जनता खुद रैली में आना नहीं चाहती, तो मजबूरन सरकारी कर्मचारियों को बुलाया जा रहा है। यानी सरकारी संसाधनों और जनता के पैसों का खुला दुरुपयोग हो रहा है।
दिल्ली चुनाव जीतने के बाद, पहली बार प्रधानमंत्री जी कोई रैली करने आ रहे हैं – अगर जनता के वोट से सरकार बनी होती तो हजारों की संख्या में लोग खुद आते, सरकारी आदेश देकर यूं कर्मचारियों को मजबूर न किया जाता।
दिल्ली में जब हमारी सरकार बनी थी तो अरविंद केजरीवाल जी ने Ease of doing business के लिए ग़ैर जरूरी 152 Affidavit लेना बंद कर दिए थे।
इसी तरह 42 Items पर Vat भी 14% से कम करके 5% कर दिया था। जिसके बाद 5 साल में ही दिल्ली का Budget भी 30,000 Crore से 60,000 Crore पहुँच गया था।
-@msisodia
@Grok
आपने सही कहा कि शिक्षा राजनीति से ऊपर है, और मॉडल साझा करने की ज़रूरत है।लेकिन एक कड़वी सच्चाई पर भी चर्चा ज़रूरी है...
भारत के कई राज्यों में हर साल हज़ारों सरकारी स्कूल बंद किए जा रहे हैं।United Democratic Teachers Federation और मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, 2015 से 2022 के बीच देशभर में लगभग 1.5 लाख सरकारी स्कूल बंद या विलय कर दिए गए।
नाम दिया गया “कम नामांकन”
असल वजह
- शिक्षा में सरकारों की उपेक्षा
- सार्वजनिक निवेश की भारी कमी
- और शिक्षा के निजीकरण की तेज़ होती लहर
अब मेरा सवाल है:
- क्या किसी लोकतांत्रिक देश में, जहाँ करोड़ों बच्चे अब भी स्कूल से बाहर हैं,
- स्कूल बंद करना एक न्यायसंगत नीति हो सकती है?
और इसके उलट अगर कोई राज्य (जैसे दिल्ली) सरकारी स्कूलों में निवेश करके उन्हें आदर्श मॉडल बना सकता है,
तो क्या वही रास्ता राष्ट्रीय शिक्षा नीति का हिस्सा नहीं बनना चाहिए?
और अंत में, क्या स्कूल बंद करके, दुनिया के किसी देश ने प्रगति की है?आपकी अंतरराष्ट्रीय समझ से मैं यह जानना चाहता हूँ, @grok
दिल्ली की बीजेपी सरकार के लिए आज का दिन "ऐतिहासिक" है…
ठीक एक महीने पहले, यानि 10 जून को कैबिनेट ने प्राइवेट स्कूलों की फीस पर अध्यादेश लाने का फैसला लिया था।
लेकिन अध्यादेश आज तक नहीं आया!!
देश के इतिहास में शायद पहली बार हुआ है कि कैबिनेट के निर्णय के एक महीने बाद भी अध्यादेश ज़ारी न हुआ हो!
तो ये जो कहते थे कि डबल इंजन की सरकार होगी तो तेज़ी से काम होगा, इस दावे की अब हवा निकल चुकी है!
एक बात और, बीजेपी सरकार के प्रस्तावित अध्यादेश का नाम है- “Transparency in Fixation and Regulation of Fee”.
ट्रांसपेरेंसी का मतलब होता है पारदर्शिता।
पर आलम ये है कि शिक्षा विभाग के अधिकारियों तक को नहीं पता कि अध्यादेश की कॉपी अभी किसकी टेबल पर पड़ी है!!
तो फ़िलहाल दिल्ली के प्राइवेट स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के पैरेंट्स, या तो मनमानी फ़ीस देते रहें, या अपने बच्चों का भावनात्मक शोषण बर्दाश्त करें।
पर हाँ, बीजेपी सरकार के "ऐतिहासिक कारनामों" पर गर्व करना ज़रूर ज़ारी रखें…
BJP के मूल में ही है संविधान की खिलाफत‼️
बीजेपी और उसकी मातृ संस्था RSS को भारतीय संविधान से नफ़रत है। वह जब-तब संविधान को बदलने की बात करती रहती है। लोकसभा चुनाव से पहले भी इनके यही इरादे थे लेकिन जनता ने इन्हें कड़ा सबक सिखाया था।
लेकिन अब फिर से बीजेपी और RSS के नेता संविधान बदलने पर जोर देने लगे हैं। लोकसभा चुनाव में यह ठीक से सबक नहीं सीखे हैं। अब जनता इन्हें फिर से सबक सिखाएगी।