#सुधीजन ध्यान देवें!
आदि सृष्टि में तीन प्रकार के #बुद्धि की कल्पना की गई परस्पर - लकड़, रबड़ और बांस बुद्धि ।
अब एक हथौड़ा लीजिए और कील, एक प्रयोग करेंगे...
पहले #लकड बुद्ध पे कील रखकर ठोकिए.. कील अंदर गई? एक बार में..
अब #रबड़ बुद्धि को उठाइए, उसपे भी कील ठोकिये, ध्यान दिए
शाक्त परंपरा में महामाई और उनकी योगिनियाँ किस तरह काम करती हैं, यह समझने के लिए किसी ग्रंथ से पहले एक बार मधुमक्खी का छत्ता देख लेना चाहिए। छत्ता चलता तो एक ही केंद्र से है, पर रानी किसी को आदेश नहीं देती। वह बस होती है, और उसका होना ही काफ़ी है। बाक़ी सब एक अदृश्य संकेत-जाल से चलता रहता है, जिसमें हर मक्खी बिना सुने अपना काम जान लेती है। योगिनियाँ भी ऐसी ही हैं। महामाई से अलग नहीं, पर अपने आप में स्वतंत्र। एक ही चेतना के फैले हुए हाथ।
और सबसे गहरी बात यह कि मधु वही मक्खी बनाती है जो डंक मारती है, और डंक मारकर ख़ुद मिट जाती है। पोषण और प्रलय के लिए दो अलग देवियाँ गढ़ना हमारी सुविधा रही है, प्रकृति की नहीं।
मितावली का चौंसठ योगिनी मंदिर गोल है, बिना छत के, केंद्र खाली और शक्ति चारों ओर बँटी हुई। छत्ते की षट्कोणीय जालिका भी यही करती है। तंत्र का अर्थ ही तानाबाना है, यंत्र है, कम से कम पदार्थ में ज़्यादा से ज़्यादा धारण। इसलिए शायद यह कहना ठीक होगा कि तंत्र किसी ने रचा नहीं। देख लिया, और लिख दिया। प्रकृति ने शक्ति की परिभाषाएँ बहुत पहले लिख रखी थीं। हमने बस नाम बाद में दिए।
महामाई की कृपा आप सब पर बनी रहे। 🙏
रोना पुरुष के लिए एक कमजोरी के रूप में प्रस्तुत किया गया है किन्तु ये सत्य नहीं, किसी को भी रोने से रोकना नहीं चाहिए यदि पुरुषार्थ है उसमें तो एक मजबूत कंधा मिलते ही उसका रोना छूट जाएगा
ज्ञान बाँचने के स्थान पर किसी के लिए वो कंधा बनिए जिसके मजबूती के आगे रोना बचकाना लगने लगे 😈
@balajidhaam वैसे आज कल का समय इतना गंदा है कि अगर किसी को वर्जिन मिल भी जाए तो भी वो किसी को बता नहीं सकता क्योंकि लोग विश्वास नहीं करेंगे और वर्जिन ना भी मिले तो भी नहीं बता सकता
वैसे सब मजाक तक ही है ये सब चीजे कभी चर्चा का विषय होना ही नहीं चाहिए ।
@balajidhaam सभी सेलिब्रिटी आकंठ तांत्रिक परम्पराओं में डूबे हुए है, ज्योतिषियों की बड़ी डिमांड है इनमें, बड़े बड़े नामी लोग जो है उनके यहां इनकी भीड़ मिलती है