You’ve heard a lot about Umar Khalid through the media. But amid the media witch-hunt against him, there has been very little space for him to speak for himself, especially since he’s spent the last six years in jail.
So I want to tell you a little about my friend Umar, in his own words, as shared with his family and friends.
सर @TexMinIndia क्या आपको पता है कि यार्न की कीमतों में भारी बढ़ोतरी वाराणसी, सूरत, मालेगांव, मुबारकपुर आदि के MSMEs और माइक्रो पावरलूम बुनकरों को बुरी तरह प्रभावित कर रही है। इसके कारण यूनिट्स बंद हो रही हैं और बेरोज़गारी बढ़ रही है।
क्या आप एक मंत्री के रूप में कॉटन यार्न के निर्यात पर रोक लगा सकते हैं और रॉ कॉटन पर इम्पोर्ट ड्यूटी खत्म कर सकते हैं? फैब्रिक्स और RMG एक्सपोर्ट्स के लिए इस सेक्टर को incentives की आवश्यकता है।
क्या @narendramodi सरकार चीन पर एंटी-डंपिंग ड्यूटी लगा सकती है?
आप सरकार में हैं, पावरलूम सेक्टर को बचाइए।
अपने शपथ ग्रहण को याद रखिए, और “शुद्ध अंतःकरण” शब्द को भी याद रखिए।
तमिलनाडु के गवर्नर ने TVK के थलपति विजय को कहा है कि जब तक वो 118 विधायकों के समर्थन की लिस्ट नहीं देंगे, सरकार बनाने का निमंत्रण नहीं मिलेगा।
ऐसी शर्त रखते हुए गवर्नर minority government के प्रावधान को नकार रहे हैं।
केंद्र में प्रधानमंत्री पीवी नरसिंह राव की सरकार पूरे पाँच साल अल्पमत की सरकार थी। क्या वो वैधानिक /लीगल सरकार नहीं थी? प्रदेशों में भी कई minority government बनी हैं।
दरअसल एक MP या MLA के पास वोटिंग के तीन विकल्प होते हैं: yes, no, abstain
उन्हें abstain या वोट न डालने के फैसले का भी हक है। गवर्नर इस अधिकार को नकार नहीं सकते हैं।
इस अधिकार के चलते ही confidence motion या विश्वास मत का नियम कहता है कि सदन में मौजूद सदस्यों का बहुमत चाहिए। सदन की कुल संख्या का बहुमत ज़रूरी नहीं है।
अर्थात, अगर सदन की कुल संख्या 200 है और केवल 180 ‘हाँ या ना’ का वोट डालते हैं, तो विश्वास मत जीतने के लिए 101 नहीं, सिर्फ़ 91 वोट चाहिए होंगे।
इसीलिए गवर्नर का यह कहना ग़लत है कि पहले 118 सदस्यों के समर्थन की लिस्ट उन्हें मिलेगी, तभी वो सरकार बनाने का न्यौता देंगे।
TVK सबसे बड़ा दल है। कोई दूसरा दल दावा पेश नहीं कर रहा है। इसलिए उसे सरकार बनाने का निमंत्रण मिलना चाहिए और बहुमत सदन में साबित करने का अवसर मिलना चाहिए।
संभव है कि कोई पार्टी या कोई सदस्य abstain का विकल्प चुनें और वोट न देने का फ़ैसला करें। तब 118 के समर्थन की कोई ज़रूरत नहीं होगी और @actorvijay थलपति विजय अल्पमत की सरकार चला सकते हैं।
उनका ये अधिकार गवर्नर नहीं छीन सकते हैं।
पहले के गवर्नर समर्थकों की पूरी लिस्ट न होने के बावजूद न्यौता देते रहे हैं। सबूत के तौर पर 16 मई, 2018 की कर्नाटक राज्यपाल की चिट्ठी देख सकते हैं, जिसमें बीजेपी के येदियुरप्पा को संख्या बल न होने के बावजूद सरकार बनाने का निमंत्रण मिला था।
@INCIndia@kharge@RahulGandhi
पाकिस्तान ने UNSC की द्विवार्षिक सीट इस वर्ष फिर से हासिल की। उसे 182 वोट मिले।
जुलाई में वह उसका अध्यक्ष बनेगा।
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ईरान से बार्डर शेयर करने वाला वह एक अमेरिकी एलाई है। लेकिन वहां कोई ईरानी मिसाइल नही गिरी। ट्रम्प ने उस पे कोई टैरिफ नही लगाया, बल्कि पाकिस्तानियों साहिब को व्हाइट हाउस बुलाकर भोज खिलाया, तारीफ की।
रूस ने उसे तेल में डिस्काउंट ऑफर किया है। और संयुक्त युद्धाभ्यास कर चुका है।
उसे चीन से जेट मिल रहे हैं।
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सऊदी अरब के साथ स्ट्रेटजिक म्युचुअल डिफेंस साइन कर रहा है। तुर्की के साथ 24 समझौते किये हैं। $5 बिलियन ट्रेड टारगेट रखा है। UAE से इन्वेस्टमेंट आ रहा है।
पड़ोस के बंग्लादेश, नेपाल, मालदीव, श्रीलंका में नई सरकारें उसके पाले में हैं। सीमा पर तंग कर रहे दुष्ट अफगानियों पर मिसाइल मार मारकर उसने 500 लोग मार दिये, पर किसी ने प्रतिबन्ध लगाया, न निंदा की।
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उस पर से युवान में पेमेंन्ट करके स्ट्रेट ऑफ हरमुज से अपने तेल टैंकर निकालकर ले जा रहा है। यहां तक ठीक है, पर इस बात पर हमसे मात खा गया..
कि उसके विदेशमंत्री की आंखों से लेजर लाइट नही निकलती।
🌸🥴
#धुरंधर
Dearest @AshwiniVaishnaw ji,
Why should a RAC passenger bear full charge for 50% of a side lower seat? Isn't it unfair?
Once the chart is prepared, Railways must refund 50% of the fare with interest for RAC passengers. The same source of payment can be used for the refund.
Pls implement this immediately. I see many ladies and senior citizens who travel by RAC, without sleep and they pay full charge.
If any of you reading this feel that this should be implemented immediately, comment with your thoughts and share until Railways makes it a fair deal for passengers.
This is long long overdue.
On behalf of Indian Passengers,
#FI
भारत को गब्बर सिंह टैक्स नहीं, सरल GST चाहिए। कांग्रेस और देश की जनता ने लड़कर कई वस्तुओं पर 28% टैक्स ख़त्म करवाया है।18% CAP के साथ एक रेट के लिए हमारा संघर्ष जारी रहेगा। अगर भाजपा ये काम नहीं करेगी, तो कांग्रेस करके दिखाएगी।
मुसलमान इस मिट्टी के लिए फांसी पर झूल जाए
इस मिट्टी के लिए पाकिस्तान के टैंक तक उड़ा दे
इस मिट्टी के लिए मर मिटे लेकिन भगवा आतंकी अंग्रेजों से पेंशन लेंगे मुखबिरी करेंगे और राष्ट्रवाद का सर्टिफिकेट भी बंटेंगे।
इस युद्ध की ग़लतियाँ और सीख:
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-हम बिना डिप्लोमेटिक तैयारी के गए, हमारे सपोर्ट में कोई देश नहीं था। पिछले दस सालों में एक एक करके सारे देश इंडिया से दूर हो गए
- मोदी सिर्फ़ मीडिया मैनेज करने के लिए पहले दिन अटैक किया। इसके बाद से ही हम डिफेंसिव रहे।
- अटैक हमने किया और हम ही एक हफ़्ते के अंदर सीजफ़ायर के लिए रेडी हो गए इससे हमारी छवि पर इंटरनेशनली बट्टा लगा है
- पाकिस्तान का मनोबल बहुत बढ़ा है वो इसे जीत की तरह ले रहा है। उसने हमारे सिविलियंस पर भी अटैक किया लेकिन हम जवाब देने के बजाय सीजफ़ायर के लिए राजी हो गए।
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-एक मैच्योर सरकार जनदबाव में युद्ध नहीं छेड़ती। युद्ध का निर्णय महीनों की तैयारी के बाद लिया जाता है
- युद्ध से पहले कम से कम 6 महीने हम अपने मित्र देशों को तैयार कर लें कि क्या चीन और तुर्की जैसे खुले दुश्मनों की स्थिति में वे हमारे साथ आएंगे?
-बिना डिप्लोमेटिक और मिलिट्री प्रिपरेशन के युद्ध में ना कूदें।
- अब इस साल हम अपने डिप्लोमेटिक एफ़र्ट्स क्लियर करें। और सच कहूँ तो गुट निरीपेक्ष नीति को अब उतार फेंकें। इससे हमें आर्थक सहयोग मिलता है लेकिन मिलिट्री मामले में जोकर नज़र आते हैं। कोई हमारे साथ खुलकर नहीं आता।
- युद्ध से बचें, युद्ध की स्थिति में बड़ी सुपरपावर हमारे देश को दबाने और फ़ायदा उठाने की स्थिति में होती हैं। और हमारी भूमिका एक आज्ञाकारी बालक जैसी हो जाती है। युद्ध तब लड़ने जाएँ जब हम डिप्लोमेटिक-मिलिट्री प्रिपरेशन पूरी कर लें।
- ये सर्जिकल स्ट्राइक, और छूकर आने वाले मिलिट्री मिशन बंद हों। ये छुटमुट फोटो कार्रवाइयां बंद हों। जब आप किसी सीमा में घुसें तो वो फाइनल दिन हो। भारत में हेडलाइन बनाने और गोदी मीडिया में वाहवाही के लिए “एक दिवसीय युद्ध” ना लड़े । युद्ध कभी “एक दिवसीय” नहीं होता, अगर युद्ध छिड़ता है तो लास्ट तक जाता है। अगर एक हफ़्ते के भीतर ही बिना कुछ बड़ा किए सीजफ़ायर कर लेना है तो ये छुटमुट कार्रवाइयां छोड़ दें।
- विपक्ष ने आँख बंद करके आपको सपोर्ट दिया। मुस्लिम नेताओं ने पाकिस्तान को जितना सुनाया उतना किसी ने नहीं। इसका अर्थ है कि भारत उस भिखारी मुल्क की तरह नहीं है। भारत अंदर से भी मजबूत है।
-अगर बात दूसरे मुल्क से युद्ध की हो तो पूरा देश प्रधानमंत्री के साथ है। लेकिन प्रधानमंत्री विवेक का काम लें। जनदबाव में ना आएँ। जो देश के लिए निर्णय अच्छा हो वही लें। फोटो-केंद्रित सर्जिकल स्ट्राइक के चक्कर में ना पड़ें। पूरी तैयारी करें। और जब हम पर युद्ध थोप ही दिया जाए तो ठोक दें पाकिस्तान को लाहौर-करांची तक। फिर कुछ ना देखें। POK और बलूचिस्तान की आजादी तक कुछ ना देखें।