रात बरसी बहुत शायद कहीं कोई प्यासा होगा
शहर गीला हुआ
दहलीज़ पर तेरी भी तो पानी होगा
खींच लाये तुझे मेरे ख़्याल
कई किलोमीटर की दूरी से
यूँ तो कोई आता नहीं कभी
किसी के बुलाने से
बरसते मौसम में तुझे भी शायद
मेरा ख़्याल आया होगा :)
किस उलझन से क्षुब्ध आज
निश्चय यह तुमने कर डाला
घर चौखट को छोड़ त्याग
चड़ बैढीं तुम चौथा माला
अभी समय है, जीवन सुरभित
पान करो इस का बाला
ऐसे कूद के मरने पर तो
नहीं मिलेगी मधुशाला
#cmshivraj
@SonOfBharat7 चुनाव से पहले अपने आपको हिंदू सिद्ध कर रहे हैं और अब हिंदू को हिंसक कह रहे हैं, वाकई विदेशी मां से पैदा हुए पुत्र का इस देश और धर्म से कोई लेना देना नहीं है