ये मनोबल और एकता की जीत है!
हर आंदोलनकारी और उनका किसी भी तरह सहयोग करनेवाले हर एक को इस ‘Big-Win’ की अनंत बधाई!!!
युवाओं ने Examination & Education की लड़ाई जीतकर जो शुरुआत की है वो :
- अब संविधान को हाथ में लेकर EVM और चुनाव सुधार तक भी पहुंचेगी
- अब भाजपा चुनावी घपलों और सांसदों-विधायकों की ख़रीद की जो नेगेटिव पॉलिटिक्स करती है, अब उसका भी अंत होगा
- कमीशनख़ोरी के भाजपाई भ्रष्टाचार का पर्दाफ़ाश होगा
- सत्ता पोषित मीडिया के ‘दाने-गाने’ के संबंधों का भी अंतकाल होगा
- पीड़ित, दुखी, अपमानित पर अब न बुलडोज़र चल पायेगा, न किसी निर्दोष का एनकाउंटर होगा
- अब किसी दुखी माँ का अपमान कोई नहीं कर पाएगा
- अब बच्चियों और युवाओं पर कोई हाथ नहीं उठाएगा
- अब किसानों, मजदूरों, दुकानदारों, कारोबारियों का पर कोई अत्याचार नहीं कर पाएगा
- अब भगवान तक को धोखा देनेवालों पर कोई रत्ती भर भी ऐतबार नहीं करेगा
- साम्प्रदायिक राजनीति का सूरज आज से ढल जाएगा
- अब संविधान के दिये हक़ कोई नहीं मार पाएगा।
अब नया दौर आयेगा, जो बदलाव लाएगा!
पिस्तौल निकालनेवाले ये भूल गये कि अगर उनकी पढ़ाई बीच में रुक जाती, तो ये पुलिस की नौकरी इनके हाथ न आती।
विश्वविद्यालय हमेशा आक्रांताओं ने तोड़े हैं, और कुछ नहीं कहना है।
#जौहर_यूनिवर्सिटी_रामपुर_उप्र
मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी सिर्फ़ एक इमारत नहीं, बल्कि तालीम, तहज़ीब और हज़ारों नौजवानों के मुस्तक़बिल की पहचान है।
इसकी बुनियाद में जनाब आज़म ख़ान साहब का वह ख़्वाब शामिल है, जिसमें हर तबक़े के बच्चों तक बेहतर तालीम पहुँचाने का जज़्बा था।
अगर यूनिवर्सिटी के कैंपस की किसी इमारत में अप्रूवल या नक्शे से जुड़ी कोई कमी है, तो उसका समाधान कम्पाउंडिंग या अन्य क़ानूनी प्रक्रिया के ज़रिए भी निकाला जा सकता है।
हर मसले का हल बुलडोज़र नहीं होता। एक यूनिवर्सिटी बनने में बरसों की मेहनत, हज़ारों लोगों की कोशिशें और लाखों नौजवानों के ख़्वाब शामिल होते हैं, जबकि उसे गिराने में कुछ ही पल लगते हैं। ऐसे तालीमी इदारों को बचाना समाज और मुल्क—दोनों के बेहतर मुस्तक़बिल के लिए ज़रूरी है।
हमारी सरकार से मांग है कि इस फ़ैसले पर दोबारा ग़ौर किया जाए। अगर कोई क़ानूनी कमी है तो उसे क़ानून के दायरे में दूर किया जाए, लेकिन तालीम के इस मरकज़ को महफ़ूज़ रखा जाए।
यूनिवर्सिटियाँ गिराने से नहीं, उन्हें आबाद रखने से मुल्क तरक़्क़ी करता है।
शाह आलम 'गुड्डू जमाली'
विधान परिषद सदस्य
पूर्व विधायक मुबारकपुर
@yadavakhilesh@samajwadiparty
***बहुत ही अफ़सोसनाक ख़बर***
إِنَّا لِلّٰهِ وَإِنَّا إِلَيْهِ رَاجِعُونَ
हम सभी के सरपरस्त एवं निज़ामाबाद के विधायक जनाब आलम बदी चचा का इंतक़ाल हो गया है।
उनका इंतक़ाल मिल्लत, समाज और सियासत के लिए एक बड़ा ख़सारा है।
उनकी ख़िदमात, रहनुमाई और ख़ुलूस को हमेशा याद रखा जाएगा।
अल्लाह तआला मरहूम की मग़फ़िरत फ़रमाए, उन्हें जन्नतुल फ़िरदौस में आला मुक़ाम अता फ़रमाए और तमाम अहल-ए-ख़ाना को सब्र-ए-जमील अता फ़रमाए। आमीन।
जनाज़े की नमाज़ 23 July शाम 4:00 बजे जामिअतुर रशाद में अदा की जाएगी। इसके बाद तद्फ़ीन (मिट्टी) भी वहीं की जाएगी।
शाह आलम 'गुड्डू जमाली'
विधान परिषद सदस्य
पूर्व विधायक मुबारकपुर
@yadavakhilesh@samajwadiparty
हमारे तिरंगे में भारत की आत्मा बसती है। इस राष्ट्रीय ध्वज अंगीकरण दिवस पर आइए, इसके सम्मान और आदर्शों की रक्षा का संकल्प लें।
शाह आलम 'गुड्डू जमाली'
विधान परिषद सदस्य
पूर्व विधायक मुबारकपुर
#NationalFlagAdoptionDay
दिल्ली में छात्रों का समर्थन कर रहें माननीय राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अखिलेश यादव जी को पुलिस द्वारा डिटेन किया जाना अति निंदनीय है।
लोकतंत्र की है हत्यारी
भाजपा सरकार अत्याचारी
दिल्ली में छात्रों का समर्थन कर रहें माननीय राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अखिलेश यादव जी को पुलिस द्वारा डिटेन किया जाना अति निंदनीय है।
लोकतंत्र की है हत्यारी
भाजपा सरकार अत्याचारी
निराशा में आँख का पानी
जब समुंदर बन जाता है
‘इंक़लाब’ तब आता है!!!
कोई अपनी ताक़त पर
जब सर उठा इठलाता है
‘इंक़लाब’ तब आता है!
हुक़ूमतों का घमंड-गुरूर
जब पर्वत सा बन जाता है
‘इंक़लाब’ तब आता है!!!
दौर जब नाइंसाफ़ी का
हद ही पार कर जाता है
‘इंक़लाब’ तब आता है!
जब-जब देश का भविष्य
पूरा दांव पर लग जाता है
‘इंक़लाब’ तब आता है!!!