मोदी जी ने कहा था - LPG Gas Crisis को COVID की तरह हैंडल करेंगे।
और सच में वही किया।
बिल्कुल COVID के जैसे ही - नीति शून्य, घोषणा बड़ी, और बोझ गरीबों पर।
₹500-800 की दिहाड़ी कमाने वाले प्रवासी मज़दूरों के लिए रसोई गैस पहुंच से बाहर हो गई है। रात को घर लौटते मज़दूर के पास चूल्हे जलाने तक के पैसे नहीं। नतीजा - शहर छोड़ो, गाँव भागो।
जो मज़दूर textile mills और factories की रीढ़ हैं - आज वही टूट रहे हैं।
Textile sector पहले से ICU में है। Manufacturing दम तोड़ रही है। और यह संकट आया कहाँ से? कूटनीति की मेज़ पर हुई उस चूक से जिसे सरकार आज तक स्वीकार नहीं करती।
जब अहंकार नीति बन जाए - अर्थव्यवस्था चरमराती है, मज़दूर पलायन करते हैं, उद्योग बर्बाद होते हैं और देश दशकों पीछे धकेल दिया जाता है।
सवाल एक ही है - हर संकट में सबसे पहले गरीब क्यों मरता है? चुप मत रहो। यह सिर्फ़ गरीब का नहीं, हम सबका सवाल है।
@KaranBhushanSi1 ने स्पष्ट किया कि वे उस समिति की बैठक में उपस्थित नहीं हुए थे और न ही उन्होंने कहीं हस्ताक्षर किए हैं। ऐसा कोई कार्य नहीं किया गया जिससे समाज में विभाजन उत्पन्न हो। इसके अतिरिक्त, इस प्रकार के मसौदों या समझौतों पर सहमति प्रदान करने का कोई प्रश्न ही नहीं उठता। नेताजी द्वारा प्रदान किए गए संस्कारों पर ही वे सभी आगे बढ़ रहे हैं।
सोशल मीडिया एवं समाचार चैनलों के माध्यम से मीडिया के एक धड़े द्वारा नए नियमों को लेकर उनके विश्वास एवं अनेक प्रकार की भ्रांतियां फैलाई जा रही हैं, बिना उनके पक्ष को जाने ऐसी अभियान चलाया जाना अत्यंत दुखदपूर्ण है।
वे स्पष्ट करना चाहते हैं कि संदर्भित स्टैंडिंग कमेटी, जिसके वे सदस्य हैं, का इन नियमों के निर्माण में कोई योगदान नहीं था।
उनकी भावनाएं समाज के लोगों के साथ हैं और उनकी मांग है कि UGC इस नियम पर पूर्ण विचार करे तथा इसमें आवश्यक सुधार लाए, जिससे समाज में आधारित किसी प्रकार की वैमनस्यता न फैले।
वे अपने शिक्षण संस्थानों को जातिगत युद्ध का केंद्र बनाने नहीं दे सकते; वे सभी को साथ लेकर चलना चाहते हैं।
ओह! भाजपा लगी हुई है कि संसद सत्र के आरंभ का वीडियो सोशल मीडिया पर चल जाए, पर हो नहीं पा रहा।
जो तुम्हारे लिए निःस्वार्थ भाव से लिखते-बोलते थे, तुमने उसका उपहास किया, ताने कसे, बिका हुआ कहा, कॉन्ग्रेसी और डीप स्टेट एजेंट कहा, तो अब कौन लिखेगा तुम्हारे लिए?
तुम्हारे किस नेता/प्रवक्ता की (अपवादों को छोड़ कर) रत्ती भर की भी ऑर्गेनिक रीच है? जीवन मोदी जी के रीपोस्ट, वीडियो क्लिप्स के पोस्ट, पुष्पगुच्छ के आदान-प्रदान के फोटो लगाने में बीत रहा है, अब तुम्हें भ्रम है कि लोग तुम्हारे साथ हो लें?
‘वंदे मातरम्’ का अपमान दुर्भाग्यपूर्ण है, हम विपक्ष को पेलेंगे, पर आज नहीं। आज हमारे बच्चों के भविष्य की लड़ाई है जो तुम पतितों ने हमारे ऊपर लाद दी है। तुम चला लो नैरेटिव टुटपुँजिए औसत बुद्धि आइटी सेल के सहारे।
@onepluscareIN All the parts of the phone are original. I have not opened the phone outside nor have I ever got it repaired outside. But your employees who are refusing to repair the phone, And teach them a little about how to behave with customers.@onepluscareIN
@onepluscareIN After a little conversation, they refused to repair my phone and returned my phone to me after writing all sorts of nonsense on it. This is your response.