'लड़की हूँ, लड़ सकती हूँ' केवल एक नारा नहीं था, बल्कि महिलाओं के आत्मविश्वास, नेतृत्व और अधिकारों का जनआंदोलन हैं।
आज "Fight like a girl" को शक्ति और प्रतिरोध के प्रतीक के रूप में देखना उसी सोच की जीत है। यह लेख ज़रूर पढ़िए।
@priyankagandhi@NayakRagini
इथेनॉल मुद्दे पर ‘गाड़ी मार्च’ की अनुमति नहीं मिलने पर @tehseenp ने किया ऐलान, 1 अगस्त सुबह दस बजे अब्दुल कलाम मार्ग से अकेले गांधी स्मृति तक मार्च करेंगे, वहां बैठ मौन व्रत करेंगे और एक दिन का उपवास रखेंगे
लोकसभा के दूसरे हफ्ते का आज आखिरी दिन है।
और आज भी सुबह प्रश्नकाल नहीं चल सका। सदन शुरू होते ही विपक्ष द्वारा गृहमंत्री अमित शाह के इस्तीफे की जोरदार मांग के बाद सदन 12 बजे तक के लिए स्थगित।
अप्रिय गोदी मीडिया, अहंकारी सांसदों और पुलिस,
प्रोटेस्ट में शामिल बच्चों की जो विच-हंटिंग शुरू कर दी है तुमने, मीडिया और संसद में ब्लेम-गेम का पूरा सीज़न चल रहा है, गलतियाँ निकाल-निकालकर इन्हें ‘गटर जनरेशन’ और न जाने क्या-क्या मेडल बाँट रहे हो; याद रखना कि अब भी विक्टिम ये बच्चे ही हैं, तुम्हारे सिस्टम के. इन्हें अपराधी की तरह दिखाना बंद करो. ये हताश बच्चे सिर्फ गालियाँ उगल सकते हैं, गोलियाँ चलाने का लाइसेंस अब भी तुम्हारे ही पास है. फ़ौज तुम्हारी है, आँसू गैस तुम्हारी है, वाटर कैनन तुम्हारे हैं, पैलेट गन तुम्हारे हैं, मारने के आदेश तुम्हारे हैं.
इन बच्चों ने कील ठुकी लाठियों से पिटने के बाद अपनी भड़ास निकाली बस, लेकिन तुम निहत्थे बच्चों से बदला ले रहे हो. पूरा सिस्टम हाथ में रखकर बदला ले रहे हो.
तुम्हारे सिस्टम और नीतियों से, पहले से परेशान और सताए हुए लोगों को सिर्फ इसलिए अपराधी ठहराना कि उन्होंने विरोध का कोई अटपटा तरीका चुना, यह सिर्फ़ अनैतिक नहीं, बल्कि शर्मनाक भी है.
आपकी ग़लती पर उनका रिएक्शन अपराध है यह कहकर जनता को गैसलाइट करना बंद करो. अपने फ़ेलियर को ओन करो. बड़े बनो, और बच्चों को माफ़ करके प्यार से मना लो. इसी में देश और समाज का भला है. उम्र और पॉवर की धमकियाँ शोभा नहीं देतीं आपको.
चढ़ावा चोरी पर देखिए किस तरह का प्रतीकात्मक प्रदर्शन किया जा रहा है।
राहुल गांधी दान पत्र में चंदा देना चाह रहे हैं लेकिन चढ़ावा चोरी करने वाले उसे राहुल के हाथ से छीन कर अपनी जेब में डाल रहे हैं।
आज संसद में विपक्ष ने ऐसा प्रतीकात्मक शॉर्ट प्ले किया, जिसने सत्ता पक्ष की बेचैनी बढ़ा दी।
सांसद पप्पू यादव पुजारी के वेश में दानपात्र लेकर आए। समाजवादी पार्टी समेत विपक्षी दलों के सांसदों ने उसमें चंदा डाला। फिर पुजारी बने पप्पू यादव ने अयोध्या के सांसद के पैर भी छुए। लेकिन अगले ही पल दानपात्र उठाकर भाग गए।
पूरा दृश्य उस सवाल पर तीखा राजनीतिक व्यंग्य था, जो पिछले कई दिनों से देशभर में चर्चा का विषय बना हुआ है - आख़िर रामभक्तों का चढ़ावा और दान कहाँ गया? विपक्ष ने इसी मुद्दे पर भाजपा को संसद परिसर के भीतर कटघरे में खड़ा कर दिया।
जिस पार्टी ने वर्षों तक आस्था के नाम पर राजनीति की, आज उसी से आस्था से जुड़े सवालों का जवाब माँगा जा रहा है। अब नारे नहीं, जवाब चाहिए। भाजपा बताए कि जिन सवालों पर पूरा देश चर्चा कर रहा है, उनका सच क्या है? संसद में उठे इन सवालों से बचना अब आसान नहीं होगा।
चंदा चोरी मामला
संभवतः ‘टिन्नू यादव’ की निशानदेही पर पप्पू यादव को पकड़ा गया… 🤣🤣🤣
संसद में ग़ज़ब की नाट्य प्रस्तुति
नया डिस्क्लेमर: इस नाटक के सारे पात्र काल्पनिक नहीं है, कुछ की समानता असल ज़िंदगी के चंदा चोरों से है।
विपक्ष ने आज संसद में विरोध के दौरान एक शॉर्ट प्ले किया। सांसद पप्पू यादव पुजारी बनकर आए। राहुल गांधी ने भी चंदा दानपात्र में डाला और पुजारी अयोध्या सांसद के पैर छूते दिखाई दिए।
फिर पुजारी बने पप्पू यादव दानपात्र लेकर भाग गए
#Parliament
यह है यशस्विनी राजे. यूपी के पूर्व भाजपा विधायक विक्रम सिंह की बेटी। इनके पिता गौ रक्षा और हिंदुत्व के रक्षक हैं ।
यशस्विनी जंतर मंतर पर पेपर लीक प्रोटेस्ट में शामिल हुई थीं। यशस्विनी बीफ खाती हैं, फिलिस्तीन पर हो रहे जुल्म के खिलाफ आवाज उठाती हैं जिसे लेकर पहले भी सोशल मीडिया पर राइट विंग बवाल कर चुका है।
यशस्विनी का कहना है कि वह सेल्फ डिपेंडेंट हैं
इसलिए पॉलीटिकल बातें अपने घर में डिस्कस नहीं करती हैं। जो सही लगता है वो करती हैं
भगवान को चूना लगाने के बाद अपने पितृ पुरुष को भी चूना लगा दिया इन लोगों ने,
कांस्य प्रतिमा की मूर्ति लगाई,
अब पता चल रहा है कि कंक्रीट प्रतिमा को कांस्य प्रतिमा के रंग में रंग दिया था,
अटल बिहारी वाजपेयी जी की आत्मा माफ ना करेगी,