दिल्ली में इस वक़्त जो हो रहा है, उसका एक ही पैटर्न है - जो औरत सवाल पूछे, उसे चुप कराओ।
जंतर-मंतर पर सैकड़ों लोग हिरासत में लिए गए। महिला प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि पुरुष पुलिसकर्मियों ने उनके साथ बदसलूकी की। महिला पत्रकारों के कैमरे छीने गए, उन्हें घसीटा गया। एक पत्रकार की शिकायत पर FIR तक दर्ज नहीं हुई।
कुछ हफ्तों पहले शाहीन और नफ़ीसा ने साकेत थाने के अंदर अपने साथ हुई हिंसा और बदसलूकी की आपबीती सुनाई है। सोचिए, थाने के अंदर - वो जगह जहां महिलाएं शिकायत लेकर जाती हैं।
जिन पर महिलाओं की रक्षा की ज़िम्मेदारी है, वही आज उनके लिए ख़तरा बन रहे हैं। और दिल्ली पुलिस किसके अधीन है - यह पूरा देश जानता है।
साकेत थाने का पूरा CCTV फुटेज सार्वजनिक किया जाए। दोषी पुलिसकर्मियों पर तुरंत कार्रवाई हो। शाहीन, नफ़ीसा और जिनके साथ भी दिल्ली पुलिस ने हिंसा और बदतमीज़ी की है उनको न्याय मिले।
अमित शाह जी - आप और आपकी पुलिस महिलाओं से डरती क्यों है?
हम इस देश के लोकतंत्र को बचाने के लिए लड़ रहे हैं। नरेंद्र मोदी, अमित शाह, मोहन भागवत और ज्ञानेश कुमार - इन लोगों ने देश के लोकतंत्र को खत्म कर दिया है। इन्होंने देश को वोट चोरी से हाईजैक किया है। मेरे देश के खिलाफ जो किया गया है, वह देशद्रोह है। जो लोग भी इसमें शामिल हैं, कोई भी बचेगा नहीं। इन सबके खिलाफ कार्रवाई होगी।
~ राहुल गांधी जी, नेता प्रतिपक्ष
महाराष्ट्र के छात्र फडणवीस सरकार की शिक्षा व्यवस्था और अन्याय से त्रस्त हैं।
आदिवासी छात्र अपनी माँगें लेकर मुंबई पहुँचे - कुछ बस से, और कुछ पैदल चलकर।
उनकी माँगें क्या हैं? आदिवासी आश्रमशालाओं और छात्रावासों में बुनियादी सुविधाएँ। छात्रवृत्ति। वही चीज़ें जो किसी भी बच्चे का हक़ हैं।
मुंबई में रुकने की जगह नहीं थी, तो कांग्रेस ने उन्हें तिलक भवन में ठहराया। और आज सुबह होने से पहले - पुलिस कांग्रेस कार्यालय के अंदर घुसी और इन बच्चों को उठाकर ले गई। आज़ाद मैदान पर प्रदर्शन शुरू होने से पहले ही। जो बच्चे नासिक से पैदल चलकर आए, उनको ये जवाब मिला।
उधर पुणे में MPSC के अभ्यर्थी सत्याग्रह पर बैठे हैं। ये माँगें नई नहीं हैं - मैंने मुख्यमंत्री फडणवीस से इन पर बात की थी। तब कुछ नहीं हुआ। इसीलिए आज ये बच्चे सड़क पर हैं।
मैं और कांग्रेस पार्टी महाराष्ट्र के छात्रों के साथ खड़े हैं। हम एक इंच भी पीछे नहीं हटेंगे।
बिहार में बाढ़ फिर कहर बनकर टूटी है। लाखों लोग प्रभावित हैं, सैकड़ों गांव डूबे हुए हैं। कई लोगों की मौत और लापता होने की खबर है। जिन परिवारों ने अपनों को खोया है, उनके प्रति मेरी गहरी संवेदना है।
सबसे दुखद बात यह है कि बिहार में यह संकट नया नहीं है। हर साल बाढ़ आती है, मौतें होती हैं, परिवार उजड़ते हैं और लोग पलायन करते हैं। BJP की डबल इंजन सरकार बताए - पिछले 17 साल में इस सालाना त्रासदी से निपटने के लिए क्या किया? ज़मीन पर क्या बदला? बिहार के लोगों को हर साल राहत और आश्वासन नहीं, स्थायी समाधान चाहिए।
जंतर-मंतर पर एक महिला पत्रकार ने एक पुलिस अधिकारी पर बदसलूकी का आरोप लगाया है।
घंटों से सैकड़ों पत्रकार सिर्फ़ इतनी माँग लेकर बैठे हैं कि FIR दर्ज कर ली जाए। ये तो पुलिस का बुनियादी काम है न? वो भी नहीं किया।
आज ही जंतर-मंतर पर सैकड़ों लोग हिरासत में लिए गए। महिला प्रदर्शनकारियों के साथ बदसलूकी के आरोप हैं। कैमरे छीने गए, पत्रकार घसीटे गए।
और ये पहली बार नहीं है - इससे पहले भी हमने वीडियो सबूतों के साथ देखा है कि पुलिस के अफसर महिलाओं के साथ घिनौनी बदसलूकी करते हैं।
पूरी दिल्ली की महिलाएं, छात्राएं अपनी सुरक्षा को लेकर घबराहट में हैं, सत्याग्रह कर रही हैं - मगर जिस पुलिस पर महिलाओं की हिफ़ाज़त की ज़िम्मेदारी है, वही महिलाओं पर हाथ उठा रही है।
और एक महिला की शिकायत दर्ज करने से जो सरकार डरती है - वो आख़िर किसकी हिफ़ाज़त कर रही है?
दिल्ली पुलिस गृह मंत्रालय के अधीन है। अमित शाह जी, कहाँ हैं आप? जवाब आपको ही देना है।
महाराष्ट्र के चंद्रपुर में सवाल बापू के जीवन से थे, लेकिन मकसद आज की पीढ़ी से जुड़ा था।
कांग्रेस सेवादल की देशव्यापी पहल के तहत आयोजित महात्मा गांधी क्विज़ में बच्चों और युवाओं ने उत्साह से हिस्सा लिया।
कोशिश यही है कि नई पीढ़ी गांधी को सिर्फ इतिहास में पढ़े नहीं, बल्कि उनके जीवन, संघर्ष और विचारों को समझे।
यह सिलसिला देशभर में जारी है। 🇮🇳
देशभर में लोग अपने हक़ के लिए लड़ रहे हैं - और अक्सर अकेले लड़ रहे हैं।
Gen Z, छात्र, किसान, आदिवासी, दलित, महिलाएँ - हर संघर्ष की अपनी कहानी है। पर जो आवाज़ अकेली उठती है, वो अक्सर दब जाती है।
'सत्याग्रह' इन्हीं आवाज़ों को एक नक्शे पर साथ लाने की पहल है।
बापू ने यही सिखाया था - सच सबसे बड़ा हथियार है। पर उससे भी बड़ा हथियार है, एकता में सच के साथ खड़े होना।
अगर आप भी किसी अन्याय से लड़ रहे हैं - अपनी कहानी भेजिए। दो मिनट लगेंगे।
आपकी कहानी नक्शे पर आएगी। आप देखेंगे कि आपकी तरह और कौन-कौन लड़ रहा है। और मैं जो कर सकता हूँ, करूँगा - संसद में, सड़क पर, खत लिखकर, जहां भी मेरी ज़रूरत हो वहां आपके साथ खड़े होकर - नेता विपक्ष के रूप में ये मेरी ज़िम्मेदारी है।
अपने सत्याग्रह को कहानी मुझे यहां बताएं
👉 https://t.co/hJ8iARr5La
भारत के पूर्व प्रधानमंत्री श्री लाल बहादुर शास्त्री जी की जयंती पर उन्हें सादर नमन।
‘जय जवान, जय किसान’ का नारा देकर उन्होंने देशवासियों के अधिकारों और सम्मान की रक्षा का संकल्प लिया और देश को नई राह दिखाई।
शास्त्री जी की सादगी और देश के प्रति उनका समर्पण हमेशा हमारा मार्गदर्शन करते रहेंगे।