इस पुस्तक में कहा गया है कि: चमार अपनी महिलाओं को जाटों, गुर्जरों, कुछ राजपूतों और मुसलमानों को 200 -300 रुपयों में रखैल के रूप में बेचे देते थे। 1/3
सुहागरात वाली रात की बात कमेंट बॉक्स में।
@nandu_parasher
@Acrf_India अबे जाहिलों गुफ़ा की ओलाद,मुगलों अग्रेजों को अपनी बहने देने वाले,
सुन बे न दलित आदिवासी ने ओबीसी आरक्षण रोका, न उसका हक खा रहा,
ओबीसी समाज को अच्छे से पता है फटे cndom की ओलाद,ने रोका बो ही bosdk घाघरा उठा के कोर्ट गए,
दलित आदिवासी ओबीसी समाज बराबर लड़ रहा है,
@AshwiniUpadhyay@PMOIndia@narendramodi अबे तुम्हारा देश महान था सोने की चिड़िया थी तो किस कानून संविधान के तहत तुम्हे चीन का उदाहरण क्यों देना पड़ रहा ?
बाबू नफरत करना बंद करो चमार जाति के
लोगों से भी हमारे अच्छे संबंध हैं हा बस उनसे जो खेती किसानी से जुड़े थे और हैं ।
जानवर की खाल उतारने वाले, और साइकिल पे हांड लटका के घूमने वाले लोगों से मैं ही नहीं हमारे प्रिय वनवासी मुसहर तक भी उनसे दूरी बनाते हैं।
समझा ।
@Acrf_India@AdvAbhishekSinh लगता है सारे दलित SC जातियों में खराब हालत से निकल के सबसे ज्यादा वो जूता सिलने वाले रविदास चमार के चमार(जाटव) ने पलट के बहुत पेल दिया है इसलिए दलित बोलकर सिर्फ उसका नाम ले रहा है शाबाश ये साबित करने के लिए🤣रविदास का खलास चमार होता है और देख ये चमार तो तेरी लेने की तैयारी कर रहे
Despite BJP govt admitting it's own failures and poor governance in Court, the opposition is silent on this!!
No leader from opposition is picking this up, neither any Media channel is talking about this!
Shows everyone is united against GCs in this country!
‼️Very shocking ‼️
1871 में बहुत सी गाय जहर देने के कारण मरने लगी तो अंग्रेजों ने कमीशन गठित की और पाया कि ये सब गंदा काम करने वाले सब जगह चमार जाति के लोग थे
ये उन्हीं अंग्रेजों की रिपोर्ट है जिन्हें उस समय खुद फुले न्याय प्रिय कहता था