Journalist । Writer । Activists । Thinker ।
My Education Is Not For My Family, My Education Is For My Society.
Master Of Journalism At Mcu Bhopal.
Jai Bhim 🙏
इतने खूबसूरत शुभकामना संदेश के लिए @yadavakhilesh जी को भी बधाई। 💐।
राजनीतिक प्रतिद्वंदी के लिए साफ दिल से सब कुछ लिख देना, संघर्षों को याद करके सामाजिक न्याय का प्रतिबिंब कह देना, संविधान संरक्षक के रूप में प्रस्तुत करना; बड़े दिल की बात है।
बढ़िया पॉलिटिक्स बड़े दिल से ही होती है ।♥️।
आ. अखिलेश यादव जी की यही सोच राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर सम्मान देना उन्हें खास ही नहीं, बल्कि महान बनाती है।
इतने खूबसूरत और गरिमापूर्ण शुभकामना संदेश के लिए अखिलेश यादव को भी हार्दिक बधाई। 💐
राजनीतिक प्रतिद्वंदी के लिए खुले दिल से लिखना, उनके स���घर्षों को याद करना, सामाजिक न्याय का प्रतीक मानना और उन्हें संविधान के संरक्षणकर्ता के रूप में सम्मान देना यह बड़े दिल और बड़ी राजनीति की पहचान है।
सच है, अच्छी राजनीति हमेशा बड़े दिल से ही होती है। ♥️
आज बहन कुमारी मायावती भले ही कुछ कारणों से शांत हों और PDA की आवाज़ उस रूप में सामने न आ पा रही हो, लेकिन अखिलेश जी आज भी दिल से, सम्मान के साथ, बहुजन आंदोलन की ऐतिहासिक लड़ाई के लिए उन्हें धन्यवाद दे रहे हैं—और आगे की लड़ाई जारी रहने की उम्मीद भी जता रहे हैं।
सोकर उठा तो पता चला बहनजी के जन्मदिन बधाई का संदेश, 3 साल पुराना वाला वायरल कर दिए हैं आप लोग।
तब से बहुत कुछ बदल गया है फिर भी नहीं बदला है बहनजी का वो मिज़ाज।
सख़्त सशक्त आज़ाद नेतृत्व का अंदाज़।
आत्म��म्मान सर्वोपरि वाला विचार।
फिर से ढेर सारी शुभकामनाएं बहन @Mayawati जी 🎂💐
बहन कुमारी मायावती जी का जीवन केवल एक राजनीतिक यात्रा नहीं, बल्कि बहुजन समाज के आत्मसम्मान, अधिकार और सत्ता में भागीदारी की ऐतिहासिक संघर्षगाथा है। एक ऐसे समाज से निकलकर, जहाँ आवाज़ दबाई जाती थी, अवसर सी���ित थे और सत्ता के द्वार बंद माने जाते थे, मायावती जी ने डॉ. बाबासाहब आंबेडकर के विचारों को राजनीतिक ताक़त में बदलने का साहसिक कार्य किया।
लगातार साज़िशों, अपमानजनक भाषा, जातिगत हमलों और सत्ता के दबावों के बावजूद उन्होंने बहुजन मूवमेंट को संगठन, अनुशासन और सत्ता की दिशा दी।
उनका स्पष्ट संदेश रहा—बहुजन समाज केवल वोट बैंक नहीं, बल्कि राज्य सत्ता का निर्णायक भागीदार बने।
उत्तर प्रदेश जैसे विशाल और जटिल राज्य में चार बार मुख्यमंत्री बनना आसान नहीं था। यह उस संघर्ष, दृढ़ इच्छाशक्ति और बहुजन समाज के विश्वास का परिणाम था, जिसे उन्होंने वर्षों की तपस्या से अर्���ित किया। उन्होंने सत्ता को आत्मसम्मान का औज़ार, प्रशासन को संवैधानिक न्याय का माध्यम और राजनीति को सामाजिक परिवर्तन का रास्ता बनाने की कोशिश की।
मायावती जी की सबसे बड़ी उपलब्धि यही है कि उन्होंने करोड़ों दलित-पिछड़े, वंचित और उपेक्षित लोगों को यह विश्वास दिलाया कि
“हम शासन कर सकते हैं, हम निर्णय ले सकते हैं, और हम इतिहास बदल सकते हैं।”
आज जब बहुजन राजनीति कई चुनौतियों से गुज�� रही है, तब मायावती जी का संघर्षपूर्ण जीवन हमें यह सिखाता है कि आंदोलन केवल नारों से नहीं, बल्कि संगठन, विचार और धैर्य से जीवित रहते हैं। बहुजन मूवमेंट को मज़बूत करने की उनकी कोशिशें इतिहास में दर्ज रहेंगी।
आदरणीय सुश्री मायावती जी को जन्मदिन की हार्दिक बधाई।
आज 15 जनवरी है, आपका जन्मदिन, और आपके लाखों समर्थक आपको "बहन जी" और "आयरन लेडी" कहकर पूजते हैं।
आपके जीवन की यात्रा प्रेरणादायक ह��� और दलित-बहुजन समाज के लिए एक मिसाल।
यहाँ आपके कुछ प्रमुख जीवन की उपलब्धियाँ हैं:
आप भारत की पहली दलित महिला बनीं, जिन्होंने किसी राज्य की मुख्यमंत्री का पद संभाला (उत्तर प्रदेश)।
1995 में मात्र 39 वर्ष की उम्र में उत्तर प्रदेश की सबसे युवा मुख्यमंत्री बनीं — यह भी एक ऐतिहासिक रिकॉर्ड था।
आपने चार बार उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री का पद संभाला:
• 1995
• 1997
• 2002-2003
• 2007-2012 (इस दौरान पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बनाई, जो दलित राजनीति में मील का पत्थर साबित हुई)
बहुजन समाज पार्टी (BSP) की राष्ट्रीय अध्य��्ष के रूप में आपने 2003 से पार्टी का नेतृत्व किया और इसे मजबूत बनाया। कांशी राम जी के बाद आप उनके चुने हुए उत्तराधिकारी बनीं।
आपके शासनकाल में कानून-व्यवस्था मजबूत हुई, अपराध दर घटी, और दलित-वंचित वर्गों के उत्थान के लिए कई कदम उठाए गए।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान मिली:
• 2008 में Forbes की दुनिया की 100 सबसे प्रभावशाली महिलाओं में 59वें स्थान पर रहीं
• Newsweek ने आपको टॉप महिला achievers में शामिल किया
• पोलियो उन्मूलन जैसे कार्यों के लिए Paul Harris Fellow Award भी मिला
आपने एक साधारण परिवार से आकर, शिक्षिका से राजनीति तक का सफर तय किया और लाखों लोगों के लिए उम्मीद की किरण बनीं।
आपका जन्मदिन न सिर्फ व्यक्तिगत उत्सव है, बल्कि आपके समर्थकों द्वारा "जनकल्याणकारी दिवस" के रूप में भी मनाया जाता है।
एक बार फिर, बहुत-बहुत जन्मदिन मुबारक हो, बहन जी!
आप स्वस्थ रहें, खुश रहें और समाज के लिए आपका संघर्ष हमेशा जारी रहे।
जय भीम! जय भारत!
1996 में BSP कांग्रेस गठबंधन की शर्त-मुख्यमंत्री मायावती ही होंगी।
कांग्रेस की आपत्ति: गांधी को उल्टा सीधा बोलती हैं-कैसे चलेगा!
कांशीराम बोले-जी हां तल्ख़ तो बोलती हैं मगर वही बोलती हैं जो अंबेडकर बोलते थे।
पता है क्या हुआ?
उन्हीं की शर्तों पर गठबंधन हुआ
ओए सफेद कपड़ा... इधर... इधर सुनो 👇
अंबेडकर-अंबेडकर करना फैशन नहीं, फ्यूचर है।
भगवान का नाम जपो या ना जपो, अंबेडकर- अंबेडकर तो करना पड़ेगा, तुम्हें भी।
इस देश की 90 फ़ीसदी से ज्यादा आबादी, यानी दलित पिछड़े आदिवासी अल्पसंख्यक और महिलाएं; अंबेडकर को ही भगवान मानती हैं।
इसलिए भगवान से तुलना करके खुद मुसीबत मोल ले रहे हो।
जाकर नरेंद्र मोदी की टाइमलाइन चेक करो, उन्हें सफाई देनी पड़ र���ी है।
बताना पड़ रहा है कि अपमान हम नहीं कांग्रेस वाले कर रहे हैं।
जरूरत पड़ेगी तो बोलेंगे-जिस शाह ने बयान दिया है उससे हमारा कोई वास्ता नहीं है।
माफी मांग लो नहीं तो बेरोजगार हो जाना पड़ेगा।
CHAMAR PASWAN और MAHAR केवल जाति का नाम नही है. ये आंदोलन का नाम है.
दलित जागरूकता और दलित चेतना का नाम है. बहुजन विचारधारा का नाम है.
CHAMAR जाति ने उत्तरभारत में डॉ आंबेडकर के विचारों को फैलाया. आंदोलन चलाया. आरक्षण और संविधान के रक्षा के लिए लड़े.
CHAMAR, PASWAN और MAHAR स्ट्रीट फाइ��र हैं. जब जब SC समाज पर संकट आता है तीनों जातियां आंदोलन में अग्रणी भूमिका निभाती हैं.
जिस जाति ने समाज के लिए बलिदान और संघर्ष किया है आप इन जातियों पर SC आरक्षण अकेले हड़पने आरोप कैसे लगा सकते हैं ?
हे मूर्ख जाहिल प्राणी "India That Is Bharat"
ना की हिंदुस्थान और न हिंदुस्तान
ये अलग ���ात है की हम जानते है की तुम संघी मानसिकता के लोग संविधान और उसकी प्रस्तावना को नहीं मानते
तुम क्या लिख रहे हो दिक्कत उससे नही, दिक्कत ये है की तुम संविधान का अपमान कर रहे हो जाहिल
मोहम्मद इंब्राहिम अपने भाई जान लोगो की करतूत को LIVE करके दुनिया को दिखा रहा है।
की हम चाहे हिंदुस्थान में हो या फिर इंग्लैंड में आगजनी और पथराव करन�� खून में है।
और कुछ नेता अपने ही हिंदुस्थान में हिंदुओ को “हिंसक” बोलते है।
सदियों से भीख मांगकर खाने वाले अपना इतिहास और वर्तमान भी नही देखते
इतिहास में भी भीख मांगकर खाते थे और आज भी Sc-St-Obc के घरों में दक्षिणा के साथ ही ठुसकर खाकर जाते है
तुम जैसे मुफ्तखोर पंडितो को तो इंतजार ही रहता है की कब हम बुलाए मुफ्त की दावत पर
हिन्दुओ के भंडारे बहुत खाए और देखे होंगे
सिखो के लंगर बहुत खाए और देखे होंगे
चलो कुछ कुछ lisIam पर चर्चा करते हैं
क्या रे बीमटो जा नही रहे रोटी खाने, तुम्हारे अब्बा लंगर लगाए 😹😹😹😹😹😹😹😹😹😹😹😹😹😹😹
सुनो बे @ajeetbharti
बे शब्द इसलिए क्योंकि तुम्हे भी यही भाषा पसंद है।
तुम जैसे चुतीयापो को ही लगता है की मनु का विधान होना चाहिए जहा ना समानता है ना भाईचारा । तुम एक काम करो दोनो पढ़ो फिर बकचोदी पेलो
शब्द - तुम्हारी भाषा से लिए गए है
मनुस्मृति पर सरकार के शिक्षा मंत्री का वामपंथियों के भय से पीछे जाना बताता है कि इनमें रीढ़ की हड्डी नहीं है। अम्बेडकर जैसे लोगों के, जिसने जीवन में कभी संस्कृत नहीं पढ़ी, अ���ुवाद के अनुवाद पढ़ कर, अपने समय की समझ के हिसाब से इस पर टिप्पणियाँ कर के इसे एक घृणित पुस्तक बता कर जो प्रपंच फैलाया, उसका भार हम आज भी ढो रहे हैं।
मनु स्मृति पर अम्बेडकर कोई फायनल वर्ड नहीं हैं। अम्बेडकर से बड़े-बड़े विचारक और ज्ञाता उनके पहले भी थे, आज भी हैं। अंग्रेजी माध्यम में, ईसाइयत से रंगे लोग हिन्द�� धार्मिक पुस्तकों पर अधपकी टिप्पणी दे गए और राजनैतिक लाभ के लिए एक पक्ष ने उसे सर पर उठा कर नृत्य किया।
भाजपा एक तरफ ‘संविधान हत्या दिवस’ का डंका पीटती है, दूसरी तरफ इनसे सिलेबस में एक पुस्तक नहीं जोड़ी जा रही है। भाजपा की समस्या यह है कि इनके लोग ‘भगवा’ शब्द सुन कर वामपंथियों से अधिक बिदकने लगे हैं।
छाती ठोक कर कहो कि हाँ, हमारी सरकार है और हम पाठ्यक्रम तय करेंगे। लोग कोर्ट में जाएँ तो स्पष���ट रूप से कहो कि कोर्ट केजरीवाल को अंतरिम बेल देने जैसे सुहावने शब्द ढूँढने में समय लगाए, हमें नीतियाँ बनाने पर ज्ञान न दे क्योंकि यह उसका अधिकार क्षेत्र नहीं है।
हिन्दुओं से जुड़ी कोई भी पुस्तक, चाहे वेद हो, पुराण, उपनिषद्, स्मृतियाँ, इतिहास या कुछ और, वह हजारों वर्षों के ज्ञान का निचोड़ है जिसे हम क��सी नीली सूट धारी व्यक्ति के सीमित ज्ञान के आगे सरेंडर नहीं कर सकते।
वापस कहता हूँ, मुझे अम्बेडकर जैसे लोगों के ज्ञान के आधार पर किसी भी तरह की धारणा नहीं बनानी। चाहे वो विचार इस्लाम पर हों या मनुस्मृति या अन्य ग्रंथों पर। मैं अपनी अवधारणा स्वयं के अध्ययन पर बनाऊँगा।
और, यदि मैं अनपढ़ हूँ तब भी मेरे विश्वास का आधार सदैव वो ऋषि रहेंगे जिन्होंने समाज को देखा, जिया, शोध किया और दिशा दी न कि कोई वैसा व्यक्ति जिसे राजनैतिक कारणों से पैगंबर बनाने की योजना चल रही है।
मेरे लिए अम्बेडकर, राजा राम मोहन रॉय, गाँधी सब एक ही जैसे थे। वो कैसे थे इस पर शोध कीजिए जा कर।
ये भी तो बताइए कि इन 127 बकर�� को मरने तक रखा जाएगा या इन्हे भी खरीददारों द्वारा बेचा जाएगा ?
ये किसानों और पशुपालकों की आमदनी के मुख्य स्त्रोत में से एक है ।
अपना झूठा एजेंडा काहे चला रहे हो?
ये ढाबे उच्च वर्गो के कारण ही चल रहे है,कोई मुसलमान नही खाने जाता वहा मांस मटन
पुरानी दिल्ली में धर्म पूरा जैन मंदिर के लोगों ने ग्यारह लाख रुपए इकट्ठा करके 127 बकरों क��� कटने से बचाया हैं।
यह एक ब��ुत अच्छी पहल है, सभी बकरे हिंदू किसानों और व्यापारियों से ख़रीदे गएं है।
जैन समाज को ❤️ से धन्यवाद
सपा को तीसरी बड़ी पार्टी बनाने में अहम योगदान देने वाले लालजी वर्मा, रामअचल राजभर, बाबू सिंह कुशवाहा, आरके चौधरी, रामशिरोमणि वर्मा, इंद्रजीत सरोज
इन सबका कैडर एक ही रहा है।
कुछ लोग एक पेपर कटिंग डालकर बता रहे हैं कि BSP, BJP की B टीम है क्योंकि BSP को ऐसी 16 सीटों पर सपा प्रत्याशी की हार के मार्जिन से ज़्यादा वोट मिले हैं यानि वहां बसपा का प्रत्याशी न होता तो सपा का प्रत्याशी जीत जाता।
दरअसल यह आधा सच है और भ्रामक है
यूपी में ऐसी 31 सीटें हैं जहां BJP हारी और BSP को मिला वोट BJP के प्रत्याशी की हार से ज़्यादा निकला
यानि इस तरह से BJP वाले भी कह सकते हैं कि BSP सपा की B टीम है।
यह ल���कतंत्र है और यहां सबको लड़ने का अधिकार है और कोई किसी की B टीम तब माना जायेगा जब वह केवल एक ही पार्टी का नुकसान करे मगर
यहां तो BSP ने जितनी स��टों पर सपा का नुकसान किया उससे लगभग दोगुनी सीटों पर BJP का नुकसान किया है।
कांग्रेस अगर ओडिशा और पश्चिम बंगाल में कैंडिडेट खड़े न करती तो बीजेपी को वहां 19 सीटों का नुकसान होता. कांग्रेस की गद्दारी की वजह से टीएमसी और बीजेडी के उम्��ीदवार हार गए.
कांग्रेस को जीतना तो था नहीं. सिर्फ बीजेपी को जिताने के लिए कैंडिडेट खड़े कर दिए.
निंदा कीजिए सब लोग.