जब तक आप सामाजिक स्वतंत्रता नहीं हासिल कर लेते, कानून आपको जो भी स्वतंत्रता देता है, वो आपके किसी काम की नहीं।
हम सबसे पहले और अंत में भी भारतीय हैं।
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बेसिक शिक्षा परिषद, उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा प्राथमिक विद्यालयों के युग्मन/एकीकरण की आड़ में बहुत सारे स्कूलों को बंद करने वाला जो फैसला लिया गया है, वह ग़रीबों के करोड़ों बच्चों को उनके घर के पास दी जाने वाली सुगम व सस्ती सरकारी शिक्षा व्यवस्था के प्रति न्याय नहीं, बल्कि पहली नजर में ही स्पष्ट तौर पर यह अनुचित, गै़र-ज़रूरी एवं गरीब-विरोधी प्रतीत होता है।
सरकार से अपील है कि वह अपना युग्मन/एकीकरण का यह फैसला ग़रीब छात्र-छात्राओं के व्यापक हित में तुरन्त वापस लेे।
यदि सरकार अपना यह फैसला वापस नहीं लेती है तो फिर हमारी पार्टी इनके सभी माता-पिता व अभिभावकों को यह विश्वास दिलाना चाहती है कि हमारी पार्टी बी.एस.पी. की सरकार बनने पर फिर इस फैसले को रद्द करके पुनः यहाँ प्रदेश में पुरानी व्यवस्था बहाल की जायेगी।
वैसे उम्मीद है कि यूपी सरकार गरीबों व आमजन की शिक्षा के व्यापक हित के मद्दनज़र अपने इस फैसले को बदलने के बारे में ज़रूर सहानुभूतिपूर्वक विचार करेगी।
3. देश में बहुजनों के सामाजिक, आर्थिक व राजनीतिक हालात, कांग्रेस की तरह भाजपा शासनकाल में भी अति-दयनीय तथा इनके आरक्षण के संवैधानिक अधिकार पर भी सुनियोजित कुठाराघात होने से अब इनकी स्थिति कुछ ’अच्छे दिन’ के बजाय बुरे दिन वाली ही बन रही है, जो अति दुःखद व चिन्तनीय।
2. देश के समस्त दलितों, आदिवासियों, पिछड़े वर्गों व अन्य उपेक्षितों को भी वास्तव में मिशनरी अम्बेडकरवादी बनना होगा, जिसमें जुल्म-ज्यादती व अन्याय आदि से मुक्ति पाकर शासक वर्ग बनने की शक्ति उनकी आपसी एकता व सत्ता की मास्टर चाबी की प्राप्ति में ही है।
1. संविधान निर्माता भारतरत्न बोधिसत्व परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर को आज उनकी जयंती पर अम्बेडकरवादी पार्टी बीएसपी के तत्वावधान में पूरे देश भर में उन्हें शत्-शत् नमन्, माल्यार्पण व अपार श्रद्धा-सुमन अर्पित, जिसके लिए सभी लोगों का तहेदिल से आभार व धन्यवाद प्रकट।
1. श्री आकाश आनन्द द्वारा एक्स पर आज अपने चार पोस्ट में सार्वजनिक तौर पर अपनी गलतियों को मानने व सीनियर लोगों को पूरा आदर-सम्मान देने के साथ ही अपने ससुर की बातों में आगे नहीं आकर बीएसपी पार्टी व मूवमेन्ट के लिए जीवन समर्पित करने के मद्देनजर इन्हें एक और मौका दिए जाने का निर्णय।
भारत की पहली महिला शिक्षिका माता सावित्री बाई फुले जी हैं किसी नये व्यक्ति से उन्हे रिप्लेस करने की कोशिश निंदनीय है। सम्मान सबका है परंतु जबरिया किसी को पहली शिक्षिका ना बनाएं।
@bhimArmy1997 PDA वाले ये चाह रहे हैं की बाभन ठाकुर के अत्याचार के खिलाफ बोलो और यादव जी के अत्याचार को बर्दाश्त करना सीखो। छोटे वाले ठाकुर साहब ये भी हैं।
शोषक बनने की इतनी जल्दी ???
जो कार्य प्रशांत किशोर कर रहे हैं वो तेजस्वी यादव को करना चाहिए था। राजनीति प्रशांत भी कर रहे हैं वही राजनीति तेजस्वी भी। मगर मौके पर चौका प्रशांत किशोर ने मार दिया इसे स्वीकार करना होगा।
सोमनाथ सूर्यवंशी की हिरासत में मृत्यु निंदनीय है। कभी कभी पुलिस स्वयं को भगवान समझने लगती है। इन हत्या का मुकदमा चलना चाहिए।
अपराधी की गिरफ्तारी के बाद हिंसक प्रदर्शन कर माहौल बिगाड़ने वालों पर भी रासुका लगनी चाहिए।
लोकतंत्र, संविधान की व्यवस्था,आरक्षण या ऐसी कोई भी व्यवस्था अस्थाई है क्यूकि यदि देश में किसी प्रकार का इकोनामिक संकट आ गया तो शरिया से चलने वाले पाकिस्तान के हर एक निर्णय वहाँ की जनता की जगह IMF की मर्जी से होता है।हम शिक्षित नही हुए तो सत्ता मिलने के बाद भी गुलाम हो जायेंगे।
शिक्षा है तो सवर्ण और अंग्रेजों के राज के बीच से बाबा साहेब अंबेडकर निकलते हैं और शिक्षा छोड़ सिर्फ औकात दिखाने और बदला लेने पर फोकस किया गया तो अब अंबेडकर पैदा नही होते बल्कि दलित वोटों के लालची गिद्ध समाज से निकल रहे हैं।
हम अपने बच्चों को शिक्षा और शोध हेतु प्रेरित करें।
दलित इसी में आत्ममुग्ध है की जिन अगड़ी जातियों ने हमें हेय दृष्टि से देखा,आज उसको गाली देकर एक्ट लगवाकर जेल भिजवा दूंगा। बाबा साहेब ने सबके लिए शिक्षा की परिकल्पना की थी हम शिक्षा की जगह बदला लेने पर फोकस कर रहे हैं और वो लोग शिक्षा पर फोकस करके 'वर्ड आर्डर' बदल रहे हैं।
बाबा साहेब के नाम पर संसद में हंगामा है। सही बात यह है की उनसे प्रेम किसी को उतना नही है जितना दिखा रहे हैं, असली प्रेम दलित वोट बैंक से है। जिस देश में लोग राम,कृष्ण,बुद्ध को गाली दे सकते हैं वहाँ ऐसे विरोध औचित्यहीन हैं।
बाबा साहेब व्यक्तिपूजा के विरोधी थे।