🍁السلام عليكم ورحمة الله وبركاته🍁
हुज़ूर ﷺ ने फ़रमाया:
रमज़ान की आख़िरी रात में इस उम्मत की बख्शिश होती है। अर्ज़ की गई क्या वह शबे क़द्र है? फ़रमाया नहीं लेकिन काम करने वाले को उस वक़्त मज़दूरी पूरी दी जाती है, जब काम पूरा कर ले।
(बहारे शरी अत)
💚السلام عليكم ورحمة الله وبركاته💚
रसूलुल्लाह ﷺ ने
एक शख़्स की डकार की आवाज़ सुनी, फ़रमाया, “अपनी डकार कम कर इस लिए कि क़यामत के दिन सबसे ज़्यादा भूखा वह होगा जो दुनिया में ज़्यादा पेट भरता है।
(बहारे शरी अत)