आपका नाम राजू नारायणस्वामी है।
1991 में आपने UPSC में AIR 1 हासिल की थी। पूरे देश में पहला स्थान।
आप IIT मद्रास से कंप्यूटर साइंस ग्रेजुएट थे। MIT ने स्कॉलरशिप ऑफर की। लेकिन आपने ठुकरा दी। आपने कहा — IIT की पढ़ाई गरीब भारतीयों के टैक्स से हुई है, अब देश को लौटाना मेरा कर्तव्य है।
फिर आपने IAS जॉइन किया।
पहली पोस्टिंग में एक बिल्डर धान के खेत को भरना चाहता था। 60 गरीब परिवारों ने कहा इससे उनका इलाका डूब जाएगा। आपने अनुमति नहीं दी। आपका ट्रांसफर हो गया।
केरल के PWD मंत्री के बच्चों के अवैध जमीन सौदे उजागर किए। मंत्री को इस्तीफा देना पड़ा। आपका ट्रांसफर हो गया।
Coconut Development Board में भ्रष्टाचार पकड़ा। अफसर सस्पेंड हुए। आपका ट्रांसफर हो गया।
सिविल सप्लाई विभाग में भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई शुरू की। जांच पूरी होने से पहले हटा दिए गए।
34 साल की सेवा में 32 ट्रांसफर।
एक बार आपने सरकार को चिट्ठी लिखकर पूछा “जब मुझे कोई काम ही नहीं दिया जा रहा, तो मुझे वेतन क्यों दिया जा रहा है?”
2025 में सुप्रीम कोर्ट ने उनकी Chief Secretary पदोन्नति की याचिका खारिज कर दी।
AIR 1 होने के बावजूद।
30 साल की ईमानदार सेवा के बावजूद।
उन्होंने 34 किताबें भी लिखीं। साहित्य अकादमी पुरस्कार जीता। कानून में PhD की।
MIT उन्हें अमेरिका देना चाहता था।
उन्होंने भारत के लोगों को चुना।
लेकिन भारत की व्यवस्था ने उन्हें 34 साल तक सिर्फ एक संदेश दिया
“ईमानदारी की कीमत सब कुछ खोकर चुकानी पड़ती है।”
और उन्होंने हर बार वो कीमत चुकाई।
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