कपिल सिब्बल कह रहे हैं कि "वंदे मातरम को काटने का फैसला संविधान सभा अर्थात कंस्टिट्यूएंट एसेंबली में हुआ."
सिब्बल को लगा कि बोल देता हूं. कौन जाकर कंस्टिट्यूएंट एसेंबली की डिबेट देखेगा.
तो फैक्ट ये है कि गीत को काटने का फैसला कंस्टिट्यूएंट एसेंबली में नहीं हुआ था.
अब तो वह पूरी डिबेट ऑनलाइन है. दसवीं का बच्चा भी बता देगा कि गीत को काटने का फैसला कंस्टिट्यूएंट एसेंबली में नहीं हुआ था. वह कांग्रेस का 1937 का फैसला था.
अब बताओ कपिल सिब्बल, संविधान सभा में कब हुआ था गीत काटने का फैसला. दिन बताओ. ताकि जनता भी ऑनलाइन खोलकर पढ़ ले.
और न बता पाओ तो माफी मांग लो. @KapilSibal@AmitShah
@AnujBajpai_@anandmahindra उन्नाव वाले पे कार्यवाही करिए, हो सकता है आपको चलाई गाड़ी दी हो.....सब कुछ नया करके ......1 साल में ऐसी समस्या ....मतलब एजेंसी और सर्विस सेंटर वाले ने ही खेला किया होगा
@ArvindKejriwal सपने में फोन आया था क्या केजरीलाल ....या रात में कुछ ज्याद�� ही हो गई....
तुम्हारी ये मनोहर कहानियां पुरानी हो गई कुछ नया तरीका लाओ कहानी बनाने का 😂😂😂😂
पवन खेरा @Pawankhera सुबह तो तुम प्रधानमंत्री जी का बहुत मजाक उड़ा रहे थे.....अब देश की जनता को बताओ कि सोनिया जी को क्या हुआ था......वंदे मातरम का अपमान किया है।
तुम लोग अगर कुछ अच्छा नहीं कर सकते तो कम से कम ���िसी चीज का अपमान तो मत करो।
- कांग्रेस नई मुस्लिम लीग है.
- वंदे मातरम किसी एक धर्म का गीत नहीं है. ये किसी के विरुद्ध नहीं है.
यहां जो हुआ, वह अगर वही है, जो आपको लग रहा है तो कांग्रेस के बुरे दिन अभी खत्म होने वाले नहीं हैं.
वंदे मातरम कांग्रेस के अधिवेशनों में 1896 से ही पूुरा ही गाया जाता था. मुसलमान, हिंदू, ई���ाई, गांधी, नेहरू, पटेल, मौलाना आजाद सभी गाते थे. रवींद्र नाथ टैगोर की धुन है.
1937 में मुस्लिम लीग ने कहा कि "वंदे मातरम पूरा मत गाओ और भारत माता की जय मत बोलो... तो हम पाकिस्तान नहीं मांगेंगे."
कांग्रेस ने तुष्टिकरण किया. झुक गई. मुस्लिम लीग ने वंदे मातरम गीत को तो कटवा दिया पर पाकिस्तान की मांग नहीं छोड़ी. देश तो फिर ��ी बंट ही गया. वंदे मातरम को मुफ्त में कटवा दिया.
संसद ने अब जाकर इस भूल को ठीक कर लिया है.
वंदे मातरम पूरा न गाना मुस्लिम लीग और जिन्ना का एजेंडा था. इसलिए मैंने कहा था कि कांग्रेस नई मुस्लिम लीग है.
अंतर्वस्तु में वंदे मातरम धार्मिक गीत नहीं है. ये किसी के विरुद्ध तो बिल्कुल नहीं है.
इसमें राष्ट्र को माता और ईश्वर के रूप में देखा गया है. ऋषि बंकिम राष्ट्र में दुर्गा को इसलिए देख रहे थे क्योंकि वे उनकी अराध्य थी. पूर्वी भारत के लोगों के लिए देवी दुर्गा का महत्व तो आप जानते ही हैं.
राष्ट्र को वे इससे ऊपर कहां रखते? वे मुसलमान होते तो राष्ट्र को अल्लाह बोलते और ईसाई होते तो गॉड.
इसमें दिक्कत क्या है?
बंकिम ने राष्ट्र को अपनी भक्ति के सर्वोच्च शिखर में देखा. भारत को माता और दुर्गा के रूप में देखा. ये उनकी आस्था थी. इसलिए सभी रिलीजन के लोग वंदे मातरम बोलते हैं.
ये सेक्युलरिज्म के विरुद्ध भी नहीं है. यूरोप और अमेरिका के सेक्युलर देशों में राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री बाइ��िल की ही शपथ लेते हैं. इससे उनका सेक्युलरिज्म कम नहीं हो जाता.
@Pawankhera तुम दो कौड़ी के चिरकुटों को यही आता है बस , फिर कोई तुम्हारी अम्मा लोगो का इतिहास बताने लगता है तो ची पो करने लगते हो
खेरा जी मर्यादा में रह कर बात करो , अब राज्यसभा के सांसद हो ऐसी भाषा प्रधानमंत्री के लिए शोभा नहीं देती तुम खुश करने के चक्कर में किसी दिन चक्की पीसोगे।
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UPI पर MDR लगाने का कानून संसद में पारित हो गया है. वित्त मंत्री ने कहा कि UPI ग्राहकों के लिए फ्री रहेगा.
MDR यानी Merchant Discount Rate दुकानदार बैंक और पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर को देता है. 2020 में इसे ज़ीरो कर दिया गया था. अभी यह तय नहीं है कि MDR कितना लगे��ा? कब से लगेगा? यह केंद्र सरकार के नोटिफिकेशन के बाद तय होगा.
अनुमान है कि यह रेट ₹2000 से ज़्यादा के पेमेंट पर लगेगा. यह 0.3% से 0.5% हो सकता है. आपसी लेनदेन पर कोई चार्ज नहीं लगेगा, सिर्फ सामान या सर्विस लेने पर चार्ज लगेगा. हालांकि यह सवाल भी उठ रहा है कि दुकानदार यह चार्ज ग्राहकों से वसूलने के तरीके खोज सकते हैं.
🚨 Railways Should Provide Seat Selection Feature
Make People Pay To Get Their Preferred Seat
Just Like How You Can Book with Airlines
This Will Help Needy and Senior Citizens
Random Seat Allocation Isn't Helping Anyone