इस्तीफा देने वाले IAS रिंकू सिंह का घर देखिए!🥹👇👇
उनके पिता जी का दर्द देखिए🫢👇
घर देखिए, 🥹 क्या क्या बोलूं
निःशब्द 👇 काश वो घूसखोर होता 🤔 तो आज ये दिन न आता 👏
@atulshukla2905@mktyaggi Nahi suvar me kaise fark karte ho? Uska general toh suvar hi hoga.. maa baap suvar hi hoga... Suvar ko toh varah avtar mante ho na.. apne isht devta ko aise mat bola karo .. Neela aur Neeladu kya hota hai? Aapke mata pita ka naam hai kya?
The one who endured 7 bullets to expose a 100 crore scholarship scam, today the same IAS officer Rinku Singh Rahi is facing discrimination in the system.
No field posting, no work, just salary and neglect. In the end, she has given her resignation.
Thinking about how much a Dalit IAS officer must have been harassed by the 'parallel system', it gives goosebumps. Why is the price of honesty still so heavy today?
क्या आप जानते हैं कि सन 2009 में मुजफ्फरनगर के जिला समाज कल्याण अधिकारी रिंकू सिंह राही पर हमला किसने किया था?
चलिए,आज मैं बताता हूँ!
तत्कालीन जिला समाज कल्याण अधिकारी रिंकू सिंह राही पर सपा नेता मुकेश चौधरी ने 7 अन्य लोगों के साथ मिलकर जानलेवा हमला करवाया।
इस हमले में रिंकू सिंह राही को 7 गोलियाँ लगीं। रिंकू सिंह की एक आँख और जबड़ा खराब हो गया।
अखिलेश यादव ने अपनी सपा सरकार में सन 2015 में मुकेश चौधरी को रेशम विभाग में मन्त्री का दर्जा और लाल बत्ती दी।
सन 2017 में सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने मुकेश चौधरी को मुजफ्फरनगर की चरथावल विधान सभा से टिकट दिया।
बिहार के नालंदा में हुई घटना यह दर्शाती है कि हमारा समाज गंभीर मानसिक बीमारी की ओर जा रहा है।
वायरल वीडियो में दिख रहा था कि..
कैसे ये लड़का कुत्तों की भीड़ में सामने इस महिला के स्तन को हवस की वस्तु समझकर अनैतिक कृत्य करने का प्रयास कर रहा था.
और किस तरह बेबस महिला अपने इज्ज़त की भीख मांग रही थी
यही आरोपी जब शिशु था तो अपनी मां के इसी स्तन से दूध पीकर उसको शक्ति मिली,
और उसी शक्ति का इस्तेमाल आज एक महिला को सबके सामने प्रताड़ित करते हुए कर रहा था.
आरोपी अशोक यादव, मतलू महतो और रविकांत कुमार को ऐसा घिनौना कृत्य करने के लिए सख्त से सख़्त सज़ा देनी चाहिए।
SDM रहते हुए वकीलों के सामने उठक-बैठक लगाने वाले IAS रिंकू सिंह राही ने इस्तीफा दे दिया।
शाहजहांपुर में SDM के रूप में अपनी पहली पोस्टिंग के दौरान उन्होंने एक क्लर्क को खुले में पेशाब करने पर उठक-बैठक लगवाई थी।
जब वकीलों ने इसका विरोध किया और तहसील की गंदगी का मुद्दा उठाया, तो रिंकू सिंह राही ने खुद कान पकड़कर उठक-बैठक लगाई।
इस घटना के बाद उन्हें कोई पोस्टिंग नहीं दी गई, केवल वेतन मिलता रहा। उन्हें जनसेवा का अवसर नहीं मिला।
ये वही है जो ईमानदारी की मिसाल पेश करते हुए उन्होंने 100 करोड़ के घोटाले का खुलासा किया था।
इसके बाद उन पर हमला हुआ, उन्हें 7 गोलियां लगीं, एक आंख की रोशनी चली गई और चेहरा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। इसके बावजूद उन्होंने UPSC पास किया और IAS बने।
जिन्हें विभाग में होना चाहिए था, उन्हें सरकार ने बाहर रखा और जनसेवा का अवसर नहीं दिया।
न जाने कितने भ्रष्ट अधिकारी होंगे जो आराम से बैठे हैं।
उत्तर प्रदेश में जहां एक ओर आईएएस अधिकारी दलित समाज के मंत्रियों के साथ प्रोटोकॉल का पालन नहीं कर रहे और उन पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही, वहीं दूसरी ओर एक दलित आईएएस अधिकारी उपेक्षा के चलते इस्तीफा देने को मजबूर हैं। यह स्थिति बेहद चिंताजनक और सवालों से भरी है।
रिंकू सिंह राही, जो दलित समाज से आते हैं, उनका इस्तीफा किसी एक अधिकारी का व्यक्तिगत निर्णय नहीं, बल्कि पूरी प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिन्ह है; एक ऐसा अधिकारी जिसने 2009 में भ्रष्टाचार उजागर किया, जानलेवा हमले में 7 गोलियां खाईं, फिर भी सिस्टम के भीतर रहकर जनसेवा करना चाहता रहा। आज वही यह कहने को मजबूर है कि उसे काम ही नहीं दिया जा रहा और इसी उपेक्षा के कारण उसे इस्तीफा देना पड़ा।
अभी तीन दिन पहले ही कन्नौज में राज्य मंत्री असीम अरुण जी को मुख्य अतिथि बनाकर बुलाया गया, लेकिन 45 मिनट तक इंतजार कराया गया और अंत में बिना कार्यक्रम के लौटना पड़ा।
वहीं, पिछले साल भूतपूर्व राज्यपाल और वर्तमान कैबिनेट मंत्री बेबी रानी मौर्य जी द्वारा अपने गृह जनपद आगरा में बुलाई गई किसानों की बैठक में अधिकारी पहुंचे ही नहीं, जिससे उन्हें बैठक स्थगित करनी पड़ी।
यह विरोधाभास केवल संयोग नहीं, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था के भीतर मौजूद गंभीर असंतुलन और सवालों की ओर इशारा करता है।