8 साल का इंतज़ार किसी भर्ती प्रक्रिया का नहीं, लाखों युवाओं के धैर्य की परीक्षा बन चुका है।
अब आश्वासन नहीं, प्राथमिक शिक्षक भर्ती का विज्ञापन चाहिए।
#UP_एक_लाख_शिक्षक_भर्ती@myogiadityanath ji
किसी भी सभ्य समाज में अगर हक मांगने की कीमत खून बहाकर चुकानी पड़े, तो समझ लेना चाहिए कि व्यवस्था अंदर से सड़ चुकी है और उसे सुधार की नहीं, बल्कि सवाल खड़े करने वाले मजबूत आंदोलनों की सख्त जरूरत है।