As an advocate, I believe every voice deserves to be heard. In my latest podcast, In this episode, I discuss India’s reservation system from a constitutional and social justice perspective — exploring its origins, purpose, and the challenges of equality in modern society
#LegalAwareness #Constitution #EqualityBeforeLaw
संविधान में आरक्षण का आर्टिकल लिखकर कोई संविधान निर्माता बन गया कोई पूरा संविधान लिखकर भी गुमनाम हो गया
बहुत अच्छी पहल है हम समर्थन करते है आदरणीय श्री अनिल मिश्र जी एक अधिवक्ता संगठन बनाने की भी तैयारी में है । फर्जी Scst act से मिश्र जी जैसे क्रांति कारी ही बचा सकता है ।
उनका ये संदेश है आप सब भी शेयर करे ।
#संविधान_निर्माता_बीएन_राउ
मैं अनिल मिश्रा एडवोकेट समस्त सवर्ण, ओबीसी एवं सनातनियों से निवेदन करता हूं कि पूरे भारतवर्ष में जहां-जहां भी जिस जिस व्यक्ति विशेष के विरुद्ध अंधा कानून यानि कि एससी एसटी एक्ट अधिनियम के तहत आपराधिक मामला दर्ज हुआ है
या लंबित कृपया उसकी जानकारी मेरे व्हाट्सएप नंबर पर दें । मैं एड. अनिल मिश्रा तथा मेरी पूरी टीम पूरे भारतवर्ष में उन आपराधिक प्रकरणों में सहयोग करेंगे तथा उचित लीगल परामर्श प्रदान करेंगे जिसके एवज में हम कोई सी फीस या खर्च नहीं लेंगे कृपया मेरा व्हाट्सएप नंबर जो नीचे दिया है उसे पर मुझे दस्तावेजों सहित पीडीएफ बनाकर भेजें तथा उसके स्टेटस के बाबत सूचित करें ।
धन्यवाद
आपका
अनिल मिश्रा एडवोकेट मेरा नंबर 91311 87300
आंबेडकर मुर्दाबाद। आंबेडकर का देश की आजादी एवं संविधान में कोई योगदान नहीं था, आंबेडकर हमेशा दलितिस्तान की मांग कर के देश की विभाजन की मांग करता रहा, ऐसे व्यक्ति को इस देश से उखाड़कर फेंक देंगे।
🔰भिंड पहुंचते ही दहाड़ने लगे अनिल मिश्रा,
🔰एडीशनल SP से बोले कानून आपने भी पढ़ा है, कानून मैंने भी पढ़ा है,
🔰जब गलती दोनो तरफ से हुई है,सजा केवल स्वर्ण लडके को क्यो,
🔰पेशाब कांड पर अनिल मिश्रा ने कर दिया SP की बोलती बंद,
🔰अनिल मिश्रा की दहाड़ सभी सवर्णो तक पहुंचनी चाहिए।
There are two types of reservation in this country. One is a vertical which is based on caste and another is horizontal which is based on the exclusively candidate like EWS, handicapped, women and ex serviceman.
आप आप इसे इस प्रकार समझे वर्टिकल reservation यदि किसी को दिया जाता है तो वहाँ वंशानुगत है एक बार अगर मिल गया तो फिर सदैव मिलता रहेगा
Horizontal रिजर्वेशन केवल कैंडिडेट तक सीमित रहता हूँ यदि कोई व्यक्ति ईडब्लूएस कि निर्धारित आय seema से ऊपर आ जाता है तो यह reservation उसे प्राप्त नहीं होगा
ऐसा नहीं है कि यदि एक व्यक्ति को अगर एक बार मिला तो ये वंशानुगत मिलता रहेगा, क्योंकि यदि उसकी अगली पीढ़ी निर्धारित आय से अधिक आय अर्जित करती है तो वहाँ EWS से बाहर है
स्पष्ट वीडियो में दिखता है कि पुलिस प्रशासन ने मंदिर पर ताला लगाया। दूसरे वीडियो में एक महिला अफसर कहती हैं कि यहाँ हमेशा रामायण का पाठ होता है, फिर 15 तारीख (मंगलवार) को मंदिर क्यों बंद किया गया?
जब रिपोर्टर ने मंदिर के संबंध में पूछा, तो अफसर ने जवाब देने से मना कर दिया। मेरा निवास मंदिर के बगल में है, जो वीडियो में दर्शित है, पेंटिंग और शटर मेरे मकान के साइड की वाल पर दिख रहे हैं।
मैं स्पष्ट करता हूँ कि जय श्री राम के नारे किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि प्रशासन के इस अन्यायपूर्ण कृत्य के खिलाफ हैं। हम किसी प्रोपेगंडा के बहकावे में नहीं आएँगे।
हमारा उद्देश्य स्पष्ट है: अपने आंदोलन को दृढ़ता से जारी रखना और रिजर्वेशन मुक्त भारत एवं सर श्री बी एन राउ साहब जी की स्थापना की माँग को सरकार के समक्ष रखना। आप सभी से अनुरोध है कि वीडियो देखें, सच्चाई समझें। जय श्री राम!
#जय_श्री_राम #रिजर्वेशन_मुक्त_भारत
@grok please answer carefully, otherwise they will lodge an FIR against you under the Scheduled Castes and Scheduled Tribes (Prevention of Atrocities) Act, as you are hitting hard on reality of Dr. B.R. Ambedkar?
@AdvAkramK@highcourtadvo Sir Benegal Narsing Rau, as Constitutional Adviser, prepared the initial draft of the Indian Constitution with 243 articles. This was later expanded by the Drafting Committee to 315, and the final version has 395 articles.
Sir B.N. Rau prepared the initial draft of the Indian Constitution with 243 articles in 1947-48. Dr. B.R. Ambedkar, as Drafting Committee chairman, led revisions expanding it to 315 articles, adopted as 395. It was a collective effort; no specific "original" articles are attributed solely to Ambedkar. Sources: Wikipedia, Constituent Assembly records.
बिना तथ्यों की जाँच किए, सोशल मीडिया पर जारी भ्रामक कथनों पर कुछ भी पोस्ट करना, बहुत ही बचकाना है, आपको जानकारी ही नहीं है, कि यहाँ हुआ क्या है?
वास्तव में रामायण का पाठ पूर्व से निर्धारित था, और कई दिनों पूर्व से इसकी प्रशासन को जानकारी थी, परंतु बिना किसी पूर्व सूचना के पुलिस से आनन फानन में मंदिर में ताला डाला दिया फिर रामायण का पाठ ही होने नहीं दिया, और जय श्री राम के नारे पुलिस प्रशासन के इस कृत्य के विरुद्ध लगाए गए थे, ना की हिना ख़ान के मुस्लिम होने के विरुद्ध, उन्होंने इस ग़लत तरीक़े से अपने ऊपर लेकर जय श्री राम का नारा लगाया।
जब आंदोलन स्थगित हो गया था, तो रामायण के पाठ से किसी को क्या प्रभाव पड़ता
आपसे भ्रामक जानकारी को फैलाया जाना आपक्षेति नहीं जनता को।
गली मोहल्ले के गुंडों ने भगवान श्री राम और सनातन को गुनाहों से बचने के लिए ढाल बना लिया है।
बाबा साहेब को गाली देने वाले अनिल मिश्रा को पुलिस अधिकारी ने अच्छा जवाब दिया।
सभी को नमस्ते! 🙏
कल शाम से X पर हनुमान मंदिर में हुए विवाद को लेकर भ्रामक और आधारहीन जानकारी फैलाई जा रही है। यह अपने आप में आश्चर्यजनक है कि कैसे कुछ लोग सत्य को भटकाने के लिए नए-नए मुद्दे गढ़ लेते हैं। मैं यहाँ पूरी सच्चाई आपके सामने रखना चाहता हूँ, ताकि आप स्वयं सही और गलत का निर्णय कर सकें।
रामायण पाठ की जानकारी स्थानीय प्रशासन को कई दिन पहले से दी गई थी। 13 तारीख़ को ही दोनों पक्षों ने शांति की अपील कर दी थी, तो कोई विवाद की संभावना भी नहीं थी।
इस आयोजन की सभी तैयारियाँ प्रशासन के निर्देशानुसार और उनकी अनुमति के साथ की गई थीं। कई दिनों से इस पाठ की तैयारी चल रही थी, और यह सुनिश्चित किया गया था कि सभी नियमों का पालन हो। कल जब रामायण मंदिर में लाई गई और मैं जब पंडित जी को ऑफिस से मंदिर लेकर की ओर जा रहा था, तभी हमें पता चला कि मंदिर के दोनों गेट्स पर अचानक ताला लगा दिया गया है। यह समझ से परे था, क्योंकि प्रशासन को आयोजन की पूरी जानकारी थी। यह पाठ केवल कुछ लोगों की उपस्थिति में हो रहा था, जैसा कि प्रशासन के नियमों में निर्धारित था। वीडियो फुटेज में भी साफ दिखता है कि वहाँ कोई भीड़ नहीं थी, और सभी नियमों का पालन हो रहा था। लेकिन मंदिर के गेट्स पर ताला लगाए जाने से लोगों की धार्मिक भावनाएँ आहत हुईं। यह स्वाभाविक ही था कि हनुमान जी के मंदिर में ताला देखकर लोग “जय श्री राम” के नारे लगाएँ। ये नारे किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि प्रशासन के इस अप्रत्याशित कदम के विरोध में थे।
इस घटना के दौरान महिला अफ़सर हिना खान ने शायद यह समझा कि “जय श्री राम” के नारे उनके खिलाफ लगाए गए। जो पूर्णतः असत्य है, क्योंकि उस समय किसी को उनकी पहचान तक नहीं थी। नारे प्रशासन के ताले लगाने के खिलाफ थे, न कि किसी व्यक्ति विशेष के। यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि इस घटना को गलत रंग देकर भ्रामक narrative बनाया जा रहा है।
मैं यह भी स्पष्ट करना चाहता हूँ कि रामायण पाठ का आयोजन और प्रसाद वितरण के लिए टेंट लगाना किसी भी तरह से धारा 144 CrPC या धारा 163 भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) का उल्लंघन नहीं करता। यह एक शांतिपूर्ण धार्मिक आयोजन था, जो पूरी तरह से नियमों के दायरे में था
मैं आप सभी से अपील करता हूँ कि भ्रामक खबरों पर ध्यान न दें। सोशल मीडिया पर फैल रही अफवाहों के बजाय तथ्यों पर विश्वास करें। यह हमारी जिम्मेदारी है कि हम सत्य को सामने लाएँ और शांति बनाए रखें। आइए, हम सब मिलकर सही जानकारी को बढ़ावा दें और किसी भी तरह के भ्रम से बचें।
#सच_जानें #जय_श्री_राम