वीडियो में साफ दिख रहा है कि पानी की बौछारों का रुख सीधे कांग्रेस सांसद दीपेंद्र हुड्डा की तरफ था। लेकिन इन सबके बीच देशभर में चल रहे NSUI के NEET आंदोलन में उनकी मौजूदगी ने छात्रों और कार्यकर्ताओं के हौसले को और मजबूत कर दिया। किसी भी आंदोलन में जब बड़ा नेतृत्व मैदान में उतरता है, तो लोगों का जोश अपने आप बढ़ जाता है।
अफसोस की बात है कि देश का बड़ा मीडिया इस तस्वीर को आपको नहीं दिखाएगा, क्योंकि उसकी अपनी मजबूरियां और हित हैं।
लेकिन अगर आम लोग भी छात्रों के भविष्य से जुड़े ऐसे मुद्दों को अनदेखा करेंगे, तो इसका नुकसान किसी नेता या पार्टी का नहीं, बल्कि आपके अपने बच्चों और देश के युवाओं का होगा।
मोदी तुम वाटर कैनन चलवाओ , जेल में डालो लाठी मारो,डंडा मारो NSUI का कार्यकर्ता तब तक नहीं रुकेगा जब तक धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफ़ा नहीं दे देता !
#SackDharmendraPradhan
एक दौर था जब कांग्रेस के भीतर भी कई लोग सार्वजनिक रूप से राहुल गांधी की लीडरशिप स्वीकार करने से कतराते थे।
सालों तक मीडिया और प्रचार तंत्र ने "राहुल" नाम को मज़ाक का विषय बनाकर पेश किया। माहौल ऐसा बना दिया गया कि राहुल कहना ही कई लोगों को हास्य का पर्याय लगने लगा। मैंने तो ऐसे अंधभक्त माता-पिता भी देखे जो अपने बच्चों का नाम राहुल रखने से हिचकते थे।
लेकिन उसी दौर में एक पीढ़ी बड़ी हो रही थी। वह सब कुछ देख रही थी, समझ रही थी और अपने निष्कर्ष भी बना रही थी।
हर माता-पिता चाहते हैं कि उनका बच्चा पढ़े-लिखे, सवाल पूछे, सही-गलत में फर्क करना सीखे और एक बेहतर इंसान बने। पिछले 20 वर्षों में राहुल गांधी ने लगातार शिक्षा, सामाजिक न्याय और लोकतांत्रिक मूल्यों की बात की। गलत को गलत और सही को सही कहने की राजनीति की।
आज वही पीढ़ी, जिसने राहुल गांधी को उपहास का पात्र बनते भी देखा और संघर्ष करते भी, अपनी राय बना चुकी है।
अंजाम आज सबके सामने है।
@akhileshsharma1 इनको अनुमति कैसे मिल गई वैसे विपक्ष के नेताओ को नही मिलती है औऱ उनकी पिटाई होती है उठाकर बंद कर दिया जाता है।
सवाल पूछने की हिम्मत करो सरकार से।
PM @narendramodi जी,
INS Baaz, UPA सरकार में स्थापित किया गया नौसैनिक अड्डा, पिछले पाँच साल से विस्तार की माँग कर रहा है। मगर, सरकार ने नौसेना की बात अनसुनी कर दी।
अगर आप Great Nicobar project को देश की सुरक्षा से जोड़ते हैं तो आज ही INS Baaz का विस्तार कीजिए। मैं पूरी तरह समर्थन में हूं और पूरा विपक्ष आपके साथ है।
INS Baaz तट पर है - इसके लिए न 1.5 करोड़ पेड़ काटने की ज़रूरत है, न जनजातियों को विस्थापित करने की।
पर सच्चाई यह है - यह project देश की सुरक्षा के लिए नहीं है। यह project है हमारे देश की सबसे अनमोल ज़मीन को एक व्यापारी के हाथों सौंपने के लिए। और हमेशा की तरह इसके लिए भी सेना के नाम का सहारा लिया जा रहा है।
@narendramodi जी - देश की रक्षा सेना करती है। होटल और casino नहीं।
https://t.co/Cihlf8gfXh
मैं अंडमान और निकोबार के विनाश के खिलाफ़ पूरी शक्ति के साथ खड़ा हूँ।
अंडमान और निकोबार भारत की सबसे अनमोल प्राकृतिक धरोहर हैं। वर्तमान और आने वाली पीढ़ियों के लिए उनकी रक्षा करना मेरा कर्तव्य है।
मेरे साथ जुड़िए - याचिका पर हस्ताक्षर कीजिए और इस अमूल्य संपत्ति को बचाने की लड़ाई का हिस्सा बनिए।
#GreenOverGreed
खान सर के बयान के कुछ ही समय बाद पटना स्थित उनके कोचिंग सेंटर में फायरिंग की खबर सामने आई है, जिसमें गार्ड घायल हुआ है।
यह बेहद गंभीर मामला है। सवाल यह है कि आखिर कानून-व्यवस्था को चुनौती देने की हिम्मत किसने की? क्या यह सिर्फ संयोग है या इसके पीछे कोई सुनियोजित साजिश?
पुलिस को जल्द से जल्द निष्पक्ष जांच कर दोषियों की पहचान करनी चाहिए। जब तक जांच पूरी न हो, किसी पर आरोप लगाना सही नहीं होगा, लेकिन घटना ने कई बड़े सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं।
#Patna #KhanSir #LawAndOrder
महंगाई ने बिगाड़ा बजट: खाने-पीने से लेकर दवाइयों और यात्रा तक सब महंगा, परिवारों पर ₹3,000 अतिरिक्त खर्च का बोझ; जानिए क्या-क्या बदला
दैनिक भास्कर की रिपोर्ट।
@aajtak@Himanshu_Aajtak@anjanaomkashyap कुर्सियाँ बदली गईं, लेकिन जवाबदेही तय हुई या नहीं?
18.5 लाख छात्रों से जुड़े मामले में जनता सिर्फ़ ट्रांसफ़र नहीं, पारदर्शी जाँच और स्पष्ट जवाब चाहती है।
@ndtvindia जब गलती का बोझ सिर्फ़ अधिकारियों पर डाला जाए और नेतृत्व अछूता रहे, तो आलोचक इसे जवाबदेही नहीं, "damage control" कहेंगे।
असली बहस यही है कि ज़िम्मेदारी कहाँ तय होगी।
CBSE अध्यक्ष - ट्रांसफ़र।
CBSE सचिव - ट्रांसफ़र।
एक-सदस्यीय “जाँच” समिति - गठित।
और असल ज़िम्मेदार, धर्मेंद्र प्रधान - सुरक्षित।
अधिकारियों को हटा दिया। मंत्री को बचा लिया।
यह जवाबदेही नहीं - यह cover-up है।
हमारी माँग आज भी वही है: शिक्षा मंत्री को बर्ख़ास्त किया जाए और स्वतंत्र न्यायिक जाँच हो - ये मांगें कोई मोदी सरकार की एक महीने पुरानी अंदरूनी फ़ाइल नहीं जो यूं ही भुला दी जाए।
अगर प्रधानमंत्री को 18.5 लाख CBSE छात्रों की परवाह होती - धर्मेंद्र प्रधान जी कब के हटाए जा चुके होते।