पति की मृत्यु के बाद ही उसकी विधवा को एक कटोरा भांग और धतूरा पिलाकर नशे में मदहोश कर दिया जाता था। जब वह श्मशान की ओर जाती थी,कभी हँसती थी, कभी रोती थी और तो कभी रास्ते में जमीन पर लेटकर ही सोना चाहती थी और यही उसका सहमरण (सती) के लिए जाना था।इसके बाद उसे चिता पर बैठा कर कच्चे बांस की मचिया
बनाकर दबाकर रखा जाता था क्योंकि डर रहता था कि शायद दाह होने वाली नारी दाह की यंत्रणा न सह सके। चिता पर बहुत अधिक राल और घी डालकर इतना अधिक धुआँ कर दिया जाता था कि उस यंत्रणा को देखकर कोई डर न जाए और दुनिया भर के ढोल, करताल और शंख बजाए जाते थे कि कोई उसका चिल्लाना,रोना-धोना,अनुनय-विनय न सुनने पाए। बस यही तो था सहमरण......" सतीप्रथा । सतीप्रथा से छुटकारा दिलाने वाले लोर्ड विलियम बेन्टीक और राजा राममोहन राय को सलाम !!
सत्य शिव हैं, अनंत शिव हैं
अनादि शिव हैं, ओंकार शिव हैं
शिव ही ब्रह्म, शिव ही शक्ति हैं
#श्रावण_मास के प्रथम सोमवार की सभी को हार्दिक शुभकामनाएं।
भगवान शिव की कृपा से आपका जीवन सुख, समृद्धि और शांति से परिपूर्ण रहे। महादेव की अपार कृपा आप पर सदा बनी रहे
ॐ नमः शिवाय 🙏🏻
मेरे पिता जी की बेरहमी से अपराधियों ने हत्या कर दी है। पिताजी को इतनी क्रूरता से मारा गया कि शब्दों में बयां करना मुश्किल है। उनका खून हमारे घर की दीवारों पर लगा हुआ है।
यह घटना हमारे पूरे परिवार के लिए अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और असहनीय है। हमारी आत्मा रो रही है। निषाद समाज के लिए यह दिन 'काला दिवस' के रूप में जाना जाएगा, लेकिन यह हमें डरा नहीं सकता। हम बिहार सरकार से आग्रह करते हैं कि वह जल्द से जल्द इस घटना की जांच कर दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा दिलाने का काम करे।
आज शाम 7 बजे दरभंगा जिले के सुपौल बिरौल बाजार में दाह संस्कार कार्यक्रम होगा। आप सभी से निवेदन है कि इस समय हमारी पीड़ा में शामिल हों और अपनी उपस्थिति से हमें समर्थन प्रदान करें।
पिताजी के अंतिम संस्कार में कंधा देकर मुखाग्नि दिया। यह क्षण मेरे लिए अत्यंत दुःखद, भावनात्मक और हृदय विदारक है। उनकी विदाई ने मेरे हृदय में एक गहरा घाव छोड़ दिया है, जो कभी भर नहीं पाएगा।
पिताजी की यादें, स्नेह व मार्गदर्शन हमेशा मेरे साथ रहेंगी। उनकी क्षति अपूरणीय है और उनके बिना जीवन अधूरा सा लग रहा है।
भावभीनी श्रद्धांजलि!