यारी दोस्ती अच्छे बुरे वक्त के लिऐ होती हैं ऐसे वक्त पर ही मालुम होता हैं
कौन यार हैं कौन चालक लोमड़ी हैं
लोगों की असलियत और चालाकी कुछ ही दिनों तक चलतीं हैं फ़िर सामने ही आ जाती हैं
❤️🩹
ताजमहल को कब्रिस्तान बताते हुए कुमार विश्वास कह रहे हैं- पहले लोग आगरा सफेद कब्रिस्तान देखने जाते थे अब अयोध्या आ रहे हैं।
मुझे लगा कथित जन्मस्थान यानी बाबरी विध्वंश स्थान की बात कर रहे हैं।
खैर छोड़ो, बस ये बताओ कुमार विश्वास ऐसा क्यों बोल रहे हैं?🤔
यूपी –
जिला देवरिया में 7 वर्षीय बच्चे से कुकर्म, मंदिर का 65 वर्षीय पुजारी रमेश चंद्र पुरी गिरफ्तार !!
गांव वालों ने दरवाजा तोड़कर बच्चे को बाहर निकाला, तब सारा केस खुला।
हमें किसी के “वंदे मातरम्” पढ़ने या गाने पर आपत्ति नहीं है, लेकिन मुसलमान केवल एक अल्लाह की इबादत करता है और अपनी इबादत में अल्लाह के सिवा किसी दूसरे को शामिल नहीं कर सकता। और “वंदे मातरम्” का अनुवाद शिर्क से संबंधित मान्यताओं पर आधारित है, इसके चार श्लोकों में देश को देवता मानकर “दुर्गा माता” से तुलना की गई है और पूजा के शब्दों का प्रयोग हुआ है। साथ ही “माँ, मैं तेरी पूजा करता हूँ” यही वंदे मातरम् का अर्थ है। यह किसी भी मुसलमान की धार्मिक आस्था के खिलाफ है। इसलिए किसी को उसकी आस्था के खिलाफ कोई नारा या गीत गाने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। क्योंकि भारत का संविधान हर नागरिक को धार्मिक स्वतंत्रता (अनुच्छेद 25) और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता (अनुच्छेद 19) देता है।
वतन से प्रेम करना अलग बात है, उसकी पूजा करना अलग बात है। मुसलमानों की देशभक्ति के लिए किसी के प्रमाण-पत्र की आवश्यकता नहीं है। स्वतंत्रता संग्राम में उनकी कुर्बानियाँ इतिहास के सुनहरे पन्नो में दर्ज हैं।
हम एक खुदा (अल्लाह) को मानने वाले हैं, अल्लाह के सिवा न किसी को पूजनीय मानते हैं और न किसी के आगे सजदा करते हैं। हमें मर जाना स्वीकार है, लेकिन शिर्क (खुदा के साथ किसी को शामिल करना) कभी स्वीकार नहीं!
#ArshadMadani
बिटिया को देखकर आँख नम हो जाती है जिस बिटिया को ये भी मालूम नहीं कि मेरी माँ मुझे छोड़कर दुनिया से चली गई हे, खैर....... मौत अटल हे ओर अपने तय वक़्त पर ही आनी हे, अल्लाह इस बिटिया की वालिदा की मगफिरत फरमाए व इस गुड़िया की उम्रदराज फरमाए ........ ✍️
नसीब अपना-अपना 🥲
फोटो में दिख रही.मेरी गुड़िया की किस्मत तो देखिए कि तकरीबन 3.5 साल पहले डिलीवरी के तुरंत बाद ही माँ जैसी अज़ीम दौलत का साया इसके सर से उठ गया था मेरी गुड़िया अपनी माँ की पहली ही ओलाद हे जिसे जन्म देते ही माँ दुनिया से रुख़सत हो गई थी