Zindagi me 'Munafiqat' (hypocrisy) ka daur-e-haazir dekh kar ek baat samajh aa gayi... Ki yahan log 'Mulaqat' dil behlane ke liye karte hain, aur 'Mohabbat' apni zarurat ke liye.." ⏳🍂
हम पागल थे जो दूसरों की खुशियों की खातिर खुद को मिटाते रहे। कभी दोस्तों के लिए अपनी रातें खराब कीं, कभी प्यार के लिए अपनी आत्मा को छोटा किया, तो कभी अपनों की खातिर अपने ख्वाबों का गला घोंटा। पर बदले में क्या मिला? सिर्फ अकेलापन और एक गहरी खामोशी।