*क्या सच में कोई बदलाव आया है?* 🤔✨
आज जब आचार्य जी का वीडियो सुनते-सुनते खुद को टटोला, तो लगा कि बदलाव सिर्फ विचारों तक सीमित नहीं रहा... *अब वह मेरे जीने के ढंग में उतर चुका है।* 🧘♀️💭
एक वक्त था जब ज़िंदगी बहुत 'आरामदेह' सुकून से कट रही थी—सबकी तारीफें बटोरना 😇, अच्छे बने रहना और कामनाओं के सामने आसानी से घुटने टेक देना। 🍕🍩 तब कभी खुद को तोड़ने, कष्ट सहने या इतनी मेहनत करने की जरूरत ही महसूस नहीं हुई थी।
*पर आज तस्वीर बिल्कुल बदल चुकी है... 🔥*
अब खुद को दिन-रात पसीना बहाते और तपाते हुए पाती हूँ। 🏋️♀️🏸 सबसे हैरानी की बात यह है कि यह मेहनत किसी फल की लालच में नहीं है, बल्कि इस पूरी प्रक्रिया में अब *मज़ा आने लगा है*! ✨
कभी-कभी तो खुद पर विश्वास नहीं होता कि क्या यह वही 'मैं' हूँ, जो आज इतनी शिद्दत और डटकर मैदान में लगी हुई है! 💪💯
अब कामनाओं के आगे झुकना बंद हो गया है। आज जब मैं बैडमिंटन कोर्ट पर उतरती हूँ या फिटनेस पर काम करती हूँ, तो दिमाग में एक ही संकल्प होता है—
*"मुझे एक सच्चा Player बनना है, और मैं अपनी इस साधना को किसी क्षणिक स्वाद या आलस के लिए नहीं बिगाड़ सकती।"* 🏸🏆⚡
कष्ट और कामना से ऊपर उठकर जब सिर्फ *'कर्त्तव्य'* और अपनी धुन पर चलना आ जाता है, असली आंतरिक मजबूती वही से शुरू होती है। 🌱➡️🌳
*तपस्या में ही असली सुकून है और खुद से जीतने में ही असली आनंद!* 🔥✨
*धन्यवाद आचार्य जी, मुझे मुझसे मिलाने के लिए।*
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When you are fighting, you become very self-centered, extremely selfish.
You forget all about anybody else.
The woman has to win. The man has to win.
And in the process of winning that petty battle,
what is happening to the kid becomes insignificant.
In the heated moment of the quarrel,
the mother is pure aggression. The father is pure hatred.
And the kid is saying, “That am I.”
So what does the kid become? Aggression and hatred.
And the mother and father won’t even realize that.
They’ll say, “We didn’t do anything to the kid.”
You did a lot. You destroyed the kid.
~ Acharya Prashant
इंडोनेशिया के जंगलों में लगी आग, मलेशिया और सिंगापुर पर भी फूटा कहर।
कोई नेता, कोई राजनेता अपने देश से सच नहीं बोल रहा है,
क्योंकि ये जो सच है, यह बहुत-बहुत कड़वा होगा। ये सच हमसे कहेगा कि
अपने बाकी सारे धंधे छोड़ो। सीधे-सीधे तुम्हारे अस्तित्व का सवाल है।
खासकर अगर तुम अभी युवा हो और तुम्हारे बच्चे वगैरह हैं,
तो तुम अपने बच्चों के लिए बिल्कुल नर्क की आग छोड़ के जा रहे हो।
✍🏻 *पोस्ट 6 | 14 अक्टूबर ’26*
💭 *विषय — इतिहास*
──────────
📱*हमारी तकनीक की कीमत कौन चुकाता है?*
🛞*1890 के दशक में दुनिया में रबर की माँग बढ़ रही थी।* साइकिलों और मोटरगाड़ियों के बढ़ते चलन ने इस माँग को और बढ़ाया। लेकिन कांगो में इस रबर के पीछे जबरन मज़दूरी और हिंसा की कहानी थी।
🇨🇩 *बेल्जियम के राजा लियोपोल्ड द्वितीय के शासन में लोगों को रबर का तय कोटा पूरा करने के लिए मजबूर किया जाता था।* बंधक बनाना, मारपीट और हाथ काटने जैसी क्रूरताएँ दर्ज हुईं। हिंसा, बीमारी और अकाल से आबादी को भारी नुकसान पहुँचा; कुल मौतों की सटीक संख्या विवादित है।
⚡️ *एक सदी से अधिक समय बाद, कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य दुनिया का प्रमुख कोबाल्ट उत्पादक है।* अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण के अनुसार, 2024 में दुनिया के खनन-आधारित कोबाल्ट उत्पादन का लगभग 75% यहीं से आया।
🔨*कोबाल्ट का इस्तेमाल स्मार्टफ़ोन और बिजली से चलने वाले वाहनों की बैटरियों में होता है।* लेकिन इस तकनीक की कीमत सबके लिए एक जैसी नहीं।
🇨🇬*कांगो की कुछ अनौपचारिक, छोटे पैमाने की खदानों में बाल श्रम गंभीर चिंता है।* कुछ अनुमानों के अनुसार, लगभग 40,000 बच्चे कोबाल्ट खनन से जुड़े हैं यह वर्तमान की सटीक गणना नहीं है।
📌*अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन ने 2024 में हौट-कटांगा और लुआलाबा प्रांतों की खदानों में 6,200 से अधिक बच्चों के काम करने की सूचना दी थी।* ह्यूमेनियम में उद्धृत 11 वर्षीय फ़ॉस्टिन के शब्द हैं: “मेरे दोस्त स्कूल जाते थे, और मैं खदान में काम करता था।”*
🌟*यह इतिहास केवल अतीत की क्रूरता नहीं दिखाता बल्कि यह उस दूरी को भी दिखाता है जो सुविधा पाने वालों और उसकी कीमत चुकाने वालों के बीच बन जाती है।*
👁️ *जब लाभ हमारे पास आता है और नुकसान हमारी नज़रों से दूर रहता है,* तो हम अपनी सुविधा को सामान्य मानकर उसके पीछे के सवालों से बच सकते हैं।
*👉 मैं तकनीक की सुविधाएँ चाहता हूँ,* लेकिन जब उसकी मानवीय कीमत सामने आती है, तो क्या मैं उस पर ध्यान देता हूँ या यह कहकर आगे बढ़ जाता हूँ कि ‘यह मेरी ज़िम्मेदारी नहीं है?’
❓*प्रश्न यह है कि क्या मैं अपनी पसंद और सुविधा के प्रति अपने रवैये को ईमानदारी से जाँचने को तैयार हूँ?*
🔎 *स्रोत*:
• ब्रिटानिका -https://t.co/IFUE4WZ55H
• ह्यूमेनियम -https://t.co/CZMLXZBSSZ
• अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण - https://t.co/ntxWPsdVm3
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*बात सत्य की नहीं है,*
*बात तुम्हारी है।*
*बात यह नहीं है*
*कि सत्य जीता*
*कि नहीं जीता,*
*बात यह है कि तुमने*
*सत्य को जिताया*
*कि नहीं जिताया*
*अपने जीवन में।*
*सत्य को छोड़ो,*
*अपनी बात करो।*
*और तुमने नहीं जिताया*
*तो घोर दुख पाओगे,*
*नारकीय जीवन जियोगे।*
आचार्य जी🙏🏼
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Creativity has to be purposeless
. All-purpose is drawn from memory,Even the noblest purpose is Just a polished desire from yesterday
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Read this article on Creativity by Acharya Prashant. The idea expressed in the article becomes much more relevant in today's AI age.
Link below 👇
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Your struggle is the only salvation you can have, beyond that, nothing is possible.
Flirt with your suffering,
date with your suffering,
romance with your suffering,
you cannot get rid of it.
🙏
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What Happens When Profound Questions Meet Uncomfortable Answers?⚡
Dr. Rupert Sheldrake’s conversations with J. Krishnamurti left space for further inquiry into enlightenment and human transformation.
In his conversation with Acharya Ji, these questions open up a deeper examination of the ego, self-understanding and what it means to change.
*Watch the conversation challenges easy conclusions:* https://t.co/D4CjRJ9Lqv
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अपने लिए चुनौती स्वीकार कीजिए, इसी में गीता की सार्थकता है 🔥
नवरात्रि, दशहरा और दिवाली का समय है। चारों ओर उत्सव, खरीदारी और दिखावे का माहौल है। लेकिन क्या हम त्योहारों का वास्तविक अर्थ समझते हैं, या समाज की पुरानी मान्यताओं और रूढ़ियों के प्रभाव में ही बहते रहते हैं?
आचार्य जी कहते हैं,
*जिस दिन आप कोई बहुत बड़ी चुनौती स्वीकार कर लेंगे, आप पाएँगे कृष्ण आपके सारथी बन गए हैं, आप पाएँगे गीता आप पर उतरने लगी है।* ❤️🔥
जिस वातावरण में हम रहते हैं, धीरे-धीरे उसी की धारणाएँ हमारे भीतर उतरने लगती हैं। आज जो झूठ हमें गलत दिखता है, कल वही सामान्य लगने लग सकता है। जो बोध आज हमारे जीवन की दिशा बदल रहा है, वह भी समाज के प्रभाव में घुलकर मिट सकता है।
केवल गीता सत्र सुनना पर्याप्त नहीं है। हमें अपने आसपास ऐसा वातावरण भी चाहिए, जहाँ सत्य के विचार लगातार उपस्थित रहें। यह तभी संभव है, जब अधिक से अधिक लोग गीता सत्रों से जुड़ें 🌿
*कल की रिपोर्ट अनुसार कुल 14 नए लोग गीता सत्रों से जुड़े हैं।* अगर हम सब मिलकर प्रयास करें, तो 200-250 नए साथियों को जोड़ सकते हैं। और लोगों को ये ख़ुशख़बर भी दें कि,
*अभी जुड़ने पर अगले महीने के सभी सत्र निःशुल्क मिल रहे हैं।*🎉
इस नवरात्रि, दशहरे और दिवाली पर अपने लिए यह चुनौती स्वीकार कीजिए। जो पाया है उस बोध को बाँटें और बढ़ाएँ।
गीता मिशन का संख्याबल ही हमारी ताकत है ❤️
आज आप कितने नए साथियों तक गीता सत्र पहुँचाएँगे? 🙏
➖➖➖➖
*आमंत्रण की सरल प्रक्रिया:*
1️⃣ गीता फीड में ऊपर दिए Invite बटन पर क्लिक करें
2️⃣ लिंक अपने मित्रों के साथ साझा करें
या उन्हें QR कोड स्कैन करने दें
3️⃣ कुछ आसान स्टेप्स पूरे करते ही
उनका अनुदान तुरंत पूरा हो जाता है
4️⃣ आपके द्वारा जोड़े गए साथियों की सूची
आपकी प्रोफ़ाइल और रिपोर्ट कार्ड में दिखेगी
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🙏_आचार्य जी_, *एक और बार💪.....मैंने कुडो *खेलना छह महीने पहले शुरू किया था। इन छह महीनों में मैंने दो प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया। पहली* ज़िला स्तर पर थी, जिसमें मुझे *गोल्ड* मेडल मिला था और दूसरी राज्य स्तर पर हुई, जिसमें मुझे दो माह पूर्व* *ब्रॉन्ज *मेडल मिला।_
सबसे बड़ी बात यह थी कि _राज्य स्तर की प्रतियोगिता के लिए मेरी तैयारी ज़्यादा नहीं थी। मैंने सिर्फ़ दो-तीन महीने ही अभ्यास किया था। मेरी उम्र _24 साल _है और मुझे लगता था कि मैंने खेलना शुरू करने में काफ़ी देर कर दी है। कहीं न कहीं ऐसा भी लगता था कि मैं उतना अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाऊँगी, क्योंकि मेरी प्रैक्टिस अभी ज़्यादा नहीं हुई थी।
लेकिन मुझे बस इतना पता था कि मैंने अब तक जो भी सीखा है, मुझे उसी के दम पर अपना बेस्ट देना है जो है अभी यही है।
मेरी कैटेगरी में कुल छह खिलाड़ी थे और उनमें से मुझे तीसरा स्थान मिला। मुझे _सीनियर कैटेगरी में ब्रॉन्ज मेडल_ मिला। मेरे साथ जो खिलाड़ी थे, उनमें कई ऐसे थे जो आठ-आठ साल से कुडो खेल रहे थे। कुछ तो इतने अनुभवी थे कि मुझे उन्हें देखकर लगता था कि मैं इनके साथ कैसे फाइट कर पाऊँगी चूंकि वे कूडो के कोच भी थे? मेरा तो अभी चार-पाँच महीने का ही अनुभव है।
लेकिन फिर मैंने सोचा कि मेरे पास जितना समय है और मैंने जितना सीखा है, मैं उसी के आधार पर फाइट कर सकती हूँ। परिणाम चाहे जो भी हो, मुझे अपना बेस्ट देना है। और आज उसका परिणाम आपके सामने है , यात्रा बस शुरु ही हुई है और निरंतर ही है कोई सेटलमेंट नहीं... आपसे ही समझ रही हूँ।
*आचार्य जी, यह सब आपकी बदौलत है।*
अब मैंने सोच लिया है कि मुझे नेशनल तक तो जाना ही है, चाहे कुछ भी हो जाए। इसके लिए मैं अभी जिम और स्ट्रेंथ ट्रेनिंग पर भी बहुत ध्यान दे रही हूँ। पहले लगता था कि जिम तो ऐसे ही कर लेते हैं, लेकिन अब समझ में आ रहा है कि सही मार्गदर्शन और एक अच्छे टीचर की कितनी बड़ी भूमिका होती है। इसलिए मैंने जिम में पर्सनल ट्रेनिंग लेना भी शुरू कर दिया है, ताकि मैं और मज़बूत बन सकूँ और अपने खेल में बेहतर प्रदर्शन कर सकूँ।
🫠कभी-कभी अपनी पूरी जर्नी को देखती हूँ, तो समझ नहीं आता कि मेरी ज़िंदगी में इतना सब कैसे हुआ।
_मेरा बचपन बहुत अजीब रहा है। बचपन में मुझे बहुत बुली किया गया। मेरे साथ ऐसी घटनाएँ भी हुईं, जिन्हें आज मैं यौन हिंसा के प्रयास के रूप में समझ पाती हूँ। बात उस हद तक नहीं पहुँची कि मेरे शरीर को पूरी तरह नुकसान पहुँचा हो, लेकिन कई लोगों ने कई बार मेरे साथ बहुत ग़लत किया।_
मैं ऐसे माहौल से आती हूँ, जहाँ बच्चों की देखभाल पर ज़्यादा ध्यान नहीं दिया जाता था। माँ-बाप अपने संघर्षों में व्यस्त रहते थे और हम बच्चों की ज़िंदगी अपने आप चल रही होती थी।
_और आज जब मैं खुद को देखती हूँ, तो समझ नहीं आता कि इन सबके बाद भी मैं यहाँ तक कैसे पहुँच पाई। आज मैं खेल रही हूँ, जो बस सपना सा लगता है,खुद को मज़बूत बना रही हूँ।_
🤌_मुझे नहीं पता कि यह सब कैसे हो रहा है। बस इतना लगता है कि यह बहुत कृपा की बात है।_
🥺*धन्यवाद, आचार्य जी*
😌_पी.एस. : चूँकि सर्टिफिकेट मिलने में देरी हुई, इसलिए अब साझा कर रही हूँ!_
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