हमारे यहां सुबह से लाईट ही नहीं है सभी लोग परेशान है तक़रीबन 9 घंटे से अधिक समय बीत चुका है @UPPCLLKO वाले शिकायत तो दर्ज कर लिए लेकिन कब तक लाईट आएगी कुछ जानकारी नहीं मिल पा रही है क्या समस्या है कब बिजली आएगी? @PuVVNLHQ
गैस सिलेंडर 1 मई को बुक है एजेंसी वाले दे नहीं रहे थे कॉल करने पर आज देंगे कल देंगे बोल रहे थे कॉल करने पर बदतमीजी कर रहा और बोल रहा बार-बार क्यों कॉल कर रहे हो, होम डिलीवरी करना है लेकिन ऑफ़िस बुलाकर गैस सिलेंडर क्यों दे रहें हैं @MoPNG_eSeva@IndianOilcl@PetroleumMin
नेता सब ठंडी में गरीबों को कम्बल बांटते हुए नजर आएंगे और उनके साथ धांसू-धांसू फोटो खिंचवाकर अपने व्हाटसअप ग्रुप,फेसबुक पेज, ट्विटर पर पोस्ट करते हैं वहीं इस समय देश प्रदेश में भीषण गर्मी पड़ रही है तो उन ग़रीबों को ये नेता लोग क्यों पंखा,कूलर,एसी देते नजर नहीं आ रहे है
बहुत दुखद, जहां पानी की बहुत जरूरत वहां सरकार पानी की टंकी नहीं लगा रही है यूपी के ऐसे कई जिलों के गांव में जहां सबके पास हैंडपंप होने के बाद भी उनके घर पर नल की टोटी लग रही है/चुकी है लेकिन आज तक पानी नहीं आया और योजना के नाम पर बस पैसा लूटा गया है
आज भी देश के कई ग्रामीण और आदिवासी इलाकों में बेटियां अपनी जान जोखिम में डालकर गहरी खाइयों से पानी भरने को मजबूर हैं। यह सिर्फ जल संकट नहीं, बल्कि व्यवस्था की विफलता और सामाजिक असमानता की दर्दनाक तस्वीर है।
जिले के लोग कबसे इतना बढ़िया तहरी बनाने लगे या खाने के लिए पैसे नहीं है इसलिए तहरी खाने को मजबूर हुए 😀😀😀 और तहरी खाते-खाते सरकार ने सोचा कि इसको बड़ी उपलब्धि मानकर जिले का नाम रौशन कर दूं और आखिरकार सरकार ने ODOC में गिनती कर दी।
@SamiratmajM
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और तो और ये एजेंसी वाले अपने सभी ग्राहकों से 50₹ अतिरिक्त क्यों डिलीवरी चार्ज के नाम से लूट रहें है जबकि बिल पर्ची में ये लिखा रहता है कि डिलेवरी चार्ज इंक्लूटेड तो कई सालों से ग्राहकों से लूट क्यों रहें हैं। @MoPNG_eSeva@IndianOilcl@PetroleumMin@HardeepSPuri
गैस सिलेंडर 1 मई को बुक है एजेंसी वाले दे नहीं रहे थे कॉल करने पर आज देंगे कल देंगे बोल रहे थे कॉल करने पर बदतमीजी कर रहा और बोल रहा बार-बार क्यों कॉल कर रहे हो, होम डिलीवरी करना है लेकिन ऑफ़िस बुलाकर गैस सिलेंडर क्यों दे रहें हैं @MoPNG_eSeva@IndianOilcl@PetroleumMin
एक समय वो भी था –
जब बैंक में सिर्फ शादी का कार्ड दिखाने पर ही 10-20-50 एवं 100 रुपये के नए नोटों की गड्डियाँ आसानी से मिल जाया करती थीं।
अब हालात ऐसे हो गए हैं कि,
बड़ी सिफारिश लगवाने पर भी वो गड्डियाँ नहीं मिलतीं। सबसे ज्यादा हैरानी इस बात की नहीं कि बैंक “नोट नहीं हैं” कह देता है। बल्कि इस बात की है कि वही गड्डियाँ 400-500 रुपये ज्यादा देकर बाहर जितनी चाहो उतनी मिल जाती हैं।
आख़िर जो चीज़ बैंक में उपलब्ध नहीं,
वो खुले बाजार में इतनी आसानी से कैसे बिक रही है...?
इसका मतलब यह हुआ कि,
रिजर्व बैंक से नए नोट आते ही कुछ लोगों की मिलीभगत से नए नोटो की गड्डी बैंक से सीधे ब्लैक कारोबारी के पास पहुंचा दिए जाते हैं।
इसके बाद शादी-ब्याह में आम आदमी मजबूरी में महंगे दाम देकर ये नोट खरीदता है, और भ्रष्टाचार का ये खेल दशकों से हर साल खुलेआम चलता रहा है और अगर रिजर्व बैंक ने संज्ञान न लिया तो आगे भी चलता रहेगा।
@RBI@RBIsays