‘हरदोई की बेटी’ के साथ हुए अन्याय के बारे में सोचकर जितना दुख होता था, उसके पीड़ित परिवार और परिजनों से मिलकर उससे भी अधिक हुआ।
सवाल ये है कि ग़रीब कब तक नाइंसाफ़ी का शिकार होता रहेगा। वर्चस्ववादियों की सत्ता क्या सिर्फ़ और सिर्फ़ कमज़ोर पर प्रहार या अत्याचार करने के लिए बनी है।
हमारा मानना है कि सकारात्मक शक्ति वही है जिसमें किसी के रक्षण-पोषण का भाव हो, किसी के उत्पीड़न-शोषण का नहीं।
संविधान की शक्ति और पीडीए की सक्रिय एकता में हम सबकी रक्षा करने की अपार शक्ति है।
पीडीए अब और भी जुड़ेगा, अपनी लड़ाई ख़ुद लड़ेगा और जीतेगा भी। ‘सामाजिक न्याय का राज’ जब आएगा तब ही ये अत्याचार-अन्याय मिट पाएगा।