डूंगरपुर जिले में ट्रैफिक पुलिस प्रशासन की बड़ी लाफरवाही है सामान्य परिस्थिति में ट्रैफ़िक पुलिस को सिर्फ इतना ही अधिकार है कि वह इशारा करके रोक सकते हैं इसके अलावा पुलिस प्रशासन कोई जबरजस्ती चाबी निकालना कानूनी अपराध है
वाहन चालक को दुर्घटना का ज़िम्मेदार कौन है
@PoliceRajasthan@DungarpurP@IgpUdaipur
क्योंझर (ओडिशा) की यह घटना सिस्टम की संवेदनहीनता का आईना है।
एक आदिवासी व्यक्ति को अपनी मरी हुई बहन के खाते से ₹20 हजार निकालने के लिए उसकी कब्र तक खोदनी पड़े, इससे बड़ा शर्मनाक उदाहरण क्या होगा ?
यह वही राज्य है, जहां से राष्ट्रपति महोदया द्रोपदी मुर्मू आती है और जहां आदिवासी सम्मान की बातों का खूब ढिंढोरा पीटा जाता है।
आपकी नजर में ये है आदिवासियों का सम्मान ? जबकि आदिवासी आज भी सरकारी व्यवस्था के आगे लाचार खड़ा हैं।
जिला बांसवाड़ा, घाटोल से बाप पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारी अशोक भाई भील के छोटे भाई अनिल निनामा की बेरहमी से हत्या करने की घटना दु:खद एवं निंदनीय है। @BanswaraPolice से अनुरोध है कि हत्या में सम्मिलित समस्त मुल्जिमों को जल्द गिरफ्तार कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्यवाह करें।
@PoliceRajasthan@RajPoliceHelp@IgpUdaipur@BAP12INDIA
#अनिल_भील_को_न्याय_दो
देश में वर्तमान हालात ऐसे बना दिए है कि जो आदिवासी अपने हक-अधिकारों की मांग करता है तो उसकी आवाज़ दबाने के लिए आप नक्सलवाद का ठप्पा लगा देते हो। नक्सलवाद एक विचारधारा है, उसे आदिवासी क्षेत्र से खत्म करना है तो आदिवासियों के साथ न्याय करके ही इसे पूर्णतः खत्म किया जा सकता है, बंदूक के दम पर नही।
मैं देश के आदिवासी भाइयों को कहना चाहूंगा कि हमारे पुरखों ने जल-जंगल-जमीन की रक्षा पारंपरिक हथियारों से की थी, जिसे अब हमें कलम और कागज की ताकत से करनी है।
माननीय @AmitShah जी, संसद में आदिवासियों के संघर्ष को नक्सलवाद से जोड़ना बेहद अपमानजनक है।
जल-जंगल-जमीन की लड़ाई को बदनाम करना बंद करें और तुरंत देश के आदिवासी समाज से माफी मांगें।
#अमित_शाह_माफी_मांगे#अमित_शाह_माफी_मांगे
माननीय @AmitShah जी, संसद में आदिवासियों के संघर्ष को नक्सलवाद से जोड़ना बेहद अपमानजनक है।
जल-जंगल-जमीन की लड़ाई को बदनाम करना बंद करें और तुरंत देश के आदिवासी समाज से माफी मांगें।
#अमित_शाह_माफी_मांगे#अमित_शाह_माफी_मांगे
माननीय @AmitShah जी, संसद में आदिवासियों के संघर्ष को नक्सलवाद से जोड़ना बेहद अपमानजनक है।
जल-जंगल-जमीन की लड़ाई को बदनाम करना बंद करें और तुरंत देश के आदिवासी समाज से माफी मांगें।
#अमित_शाह_माफी_मांगे#अमित_शाह_माफी_मांगे
अमित शाह द्वारा संसद भवन में असंवैधानिक शब्द बोलकर भारत आदिवासी पार्टी के सांसद राजकुमार रोत की आवाज़ दबाने की नीती तानाशाही है जिसे लोकतंत्र में कोई जगह नहीं है अमित शाह देश के आदिवासीयों से माफ़ी मांगे अन्यथा आदिवासी समाज द्वारा बड़ा आंदोलन खड़ा होंगा!!
#अमित_शाह_माफी_मांगे
देश का गृहमंत्री @AmitShah भरी संसद में सत्ता के बल पर @BAP12INDIA के Mp @roat_mla जी को हथियार उठाते तो सरेंडर की लिस्ट में होते सांसद नहीं जैसे शब्द बोलकर एक आदिवासी सांसद मनोबल गिराने का काम कर रहें है अमित शाह माफ़ी मांगे अन्यथा बड़ा आंदोलन खड़ा होंगा!
#अमित_शाह_माफी_मांगे
हम नक्सलवाद का समर्थन नहीं करते, लेकिन सरकार पहले यह स्पष्ट करे कि नक्सलवाद की असली परिभाषा क्या है?
निर्दोष आदिवासियों को नक्सलवादी बताकर मारना बंद करो। यह न्याय नहीं, अन्याय है।
#अमित_शाह_माफी_मांगे
आपके सवाल उन्हें असहज करते है। आपकी राजनीति उनके राजनैतिक एजेंडे को बेनकाब करती है। आपके द्वारा उठाये गए आदिवासियों के मुद्दे उनकी लूट पर रोक लगाती है। आपका संसद में होना उन्हें अपनी हार नजर आता है। आप पर ये व्यक्तिगत हमला इस बात का सबूत है कि आप सही दिशा में आगे बढ़ रहे है।
शानदार सांसद @roat_mla जी, ये हमले सिर्फ आप और भारत आदिवासी पार्टी पर ही नहीं बल्कि आदिवासी समाज पर है, लेकिन हम सभी आपके साथ खड़े है। हमारी राजनीति महलों से शुरू नहीं होती बल्कि जमीन से होती है हमें अपने लोगों पर गर्व है।
जोहार।
भारत की संसद भवन में आदिवासी समुदाय से आने वाले कुल 48 सांसद बैठते है!
लेकिन बोलने के लिए सिर्फ राजकुमार जी रोत हि नज़र आते है!
अमित शाह क्या आपने 47 सांसद को आदिवासी समुदाय के उपर हो रहें अत्याचारों पर बोलने के लिए आपने मना किया है क्या ओर क्यों ??
#अमित_शाह_माफी_मांगे@AmitShah