Lokasabha Pravari Puri, Odisha 2024 🐘 🐘 🐘 MLA Candidate 2019 &2024 from 110 Pipli , Member of State Committee BSP Odisha 🐘
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समाजवादी पार्टी के जातिवादी रवैये, गुंडागर्दी, माफ़ियागीरी, अराजकता, बहन-बेटियों की ���सुरक्षा एवं धोखेबाजी से सावधान करने हेतु सर्व समाज में से खासकर ब्राह्मण और ओबीसी जातियों में से खासकर जाट समाज से माननीय बहन जी की बहुत ही मार्मिक अपील .......
........ आज का ट्वीट ......
In the third session of the "Two-days BAMCEF Cadre Camp (August 15-16)" organized by BAMCEF West Bengal, training was provided on the topic "History of BAMCEF, D.S-4 & B.S.P."
In this session, pictures of some PPT slides related to the Early Life and Struggle of Shri Kanshi Ram Ji were shown.
1. जैसाकि सर्वविदित है कि समाजवादी पार्टी (सपा) प्रमुख द्वारा अपनी पुरानी सहयोगी पार्टी राष्ट्रीय लोकदल व उस पार्टी के नेता केन्द्रीय मंत्री के बारे में यह सार्वजनिक बयान देना कि ’हमने इनको चवन्नी से रुपया बना दिया है’, यह कहना पूर्णतः अमर्यादित, अशोभनीय व अति-शर्मनाक है तथा इस प्रकार की अहंकारी व अलोकतांत्रिक बयानबाज़ी के लिये उन्हें उस पार्टी से व उनके नेता से ही नहीं बल्कि स्वर्गीय चौधर��� चरण सिंह जी के परिवार का अपमान करने हेतु पूरे जाट समाज से भी अविलम्ब माफी माँगनी चाहिये तो यह उचित होगा।
2. वैसे देश की राजनीति में सपा का चाल, चरित्र व चेहरा अपने विरोधी पार्टियों के लिये ही नहीं बल्कि अपने सहयोगियों के लिये भी हमेशा से राजनीतिक संकीर्णता व जातिवादी द्वेष आदि से ग्रसित ज़्यादातर अप्रिय और अविश्वसनीय ही रहा है, जिस कारण इसका राजनीतिक एवं चुनावी लाभ भी अक्सर मौक़ों पर भाजपा ���ी उठाती रही है और सेक्युलर ताक़तें कमज़ोर होती रहीं हैं।
3. इस पार्टी के इसी प्रकार के अति-अहंकारी स्वाभाव के कारण पहले सन् 1993 में, यू.पी. में श्री मुलायम सिंह यादव के साथ सपा व बसपा का बना गठबन्धन जल्दी ही टूट गया, जिसके फलस्वरूप दिनांक 2 जून 1995 को मेरी हत्या करने के षडयन्त्र के तहत् मेरे विरुद्ध कुख्यात लखनऊ स्टेट गेस्ट हाऊस काण्ड हुआ।
और फिर आगे चलकर इनके बेटे श्री अखिलेश यादव द्वारा, इनके पिता की तरह पुरानी ग़लतियों को फिर से ना दोहराने का आश्वासन देते हुये, लोकसभा का चुनावी गठबन्धन हुआ जो चुनाव का नतीजा इनके अनुरुप ना आने की वजह से कुछ समय के बाद ही बी.एस.पी. के प्रति इनके अहंकारी व स्वार्थी आदि रवैये के कारण फिर यह गठबन्धन भी टूट गया, क्योंकि परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर के आत्म-सम्मान व स्वाभिमान के कारवाँ वाली पार्टी बी.एस.पी. व उसकी नेतृत्व ’सर्वजन हिताय व सर्वजन सुखाय’ की सर्वसमाज हितैषी अम्बेडकरवादी नीतियों व सिद्धान्तों से कदापि विमुख नहीं हो सकती है।
4. अब संक्षेप में यही कहना है कि यह पार्टी (सपा) गठबन्धन के मामले में केवल अपना काम निकालना जानती है और अपना काम निकलते ही फिर यह पार्टी गिरगिट की तरह अपना रंग बदल लेती है तथा दूसरी पार्टी के बारे में अनाप-शनाप भाषा का भी ख़ूब इस्तेमाल करती रहती है, जो कि यह सपा का पुराना रवैया है। ऐसे में सर्वसमाज के लोग सपा की संकीर्ण व जातिवादी राजनीति से ज़रूर सावधान रहें।
5. इसके साथ ही, यह बात भी जग-ज़ाहिर है कि सपा मुखिया श्री अखिलेश यादव अपने राजनैतिक स्वार्थ के लिए अपने PDA में से P को कभी पिछड़ा वर्ग, तो कभी P को पण्डितों का हितकारी बता देते हैं, जबकि इनके बारे में सच्चाई तो यह है कि वे पिछड़े वर्गों में अपनी ख़ुद की जाति के अलावा बाकी पिछड़े वर्गों, अल्पसंख्यकों तथा अपरकास्ट समाज में से ख़ासकर ब्राह्मण समा�� के भी क़तई हितैषी नहीं रहे हैं।
6. इतना ही नहीं बल्कि इस पार्टी (सपा) की सभी रही सरकारों में दलितों, पिछड़ों, अक़लियतों, अपरकास्ट समाज में से विशेषकर ब्राह्मण समाज का भी काफी शोषण व उत्पीड़न आदि किया गया है तथा ना ही इनके हितों में कोई भी सकारात्मक क़दम उठाये गये हैं, बल्कि इनकी सरकार में वास्तव में केवल गुण्डों, बदमाशों, माफियाओं व अन्य अराजक तत्वों का ही भला हुआ है और साथ ही इनकी सरकार में दिन-���िपने के बाद हमारी बहिन-बेटियाँ भी घर से बाहर नहीं निकल सकती थीं। ऐसे में सर्वसमाज के लोग यू.पी. आगामी विधानसभा आमचुनाव में इस पार्टी (सपा) को सत्ता में क़तई भी ना आन दें, जो यह उनके हित में होगा।
1. जेन-अल्फा अर्थात् सन् 2013 के बाद जन्मे बच्चे-बच्चियों में भी ख़ासकर अपने थोड़े ’अच्छे दिन’ की उम्मीद ल��ाये स्कूली छात्र-छात्रायें व उनके माता-पिता भी सुखी भविष्य हेतु अच्छी शिक्षा को लेकर हमेशा चिन्तित ही नहीं बल्कि उसके लिये लगातार काफी जद्दोजहद भी करते रहे हैं, किन्तु देश भर में व विशेषकर यूपी एवं उत्तर भारत के राज्यों के स्कूलों के बदतर हालत की कड़वी ज़मीनी ह��़ीक़त के कारण वे लोग अति-मुखर होे गये हैं।
2. वे लोग जेन-जी अर्थात् कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के देशव्यापी ’स्कूल ठीक करो’ अभियान में काफी बढ़चढ़ कर व पूरे उत्साह के साथ भाग ले रहे हैं।
3. किन्तु यह बड़े दुख और चिन्ता की बात है कि जिन मासूम बच्चे-बच्चियों के हंसने-खेलने व पढ़ने-लिखने के दिन हैं, उन्हें अपनी प्रारम्भिक स्कूली शिक्षा हेतु बुनियादी सुविधाओं के लिये भी सड़कों पर संघर्ष करने को मजबूर होना पड़ रहा है।
4. वैसे परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर के ’शिक्षित बनो’ आह्वान के कारण शिक्षा में भी ख़ासकर स्कूली शिक्षा ’बहुजन समाज’ के लोगों के लिये हमेशा विशेष चिन्ता की बात रही है, और इसी के तहत् हमारी पार्टी बी.एस.पी. ने इन दबे-कुचले व शोषित-पीड़ित समाज के लोगों की, जिनकी केन्द्र व राज्य में रही सरकारें लगातार उपेक्षा करती रहीं हैं, उनके हित व कल्याण एवं शिक्षा आदि के लिये यू���ी में मेरे नेतृत्व में बी.एस.पी. की सभी चारों रही सरकारों में पूरा-पूरा ध्यान दिया गया, ताकि बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर द्वारा निर्मित मानवतावादी एवं कल्याणकारी भारतीय संविधान के हिसाब से उन सभी परिवार वालों को रोटी-रोजी व शिक्षा-युक्त आत्म-सम्मान का समतामूलक जीवन नसीब हो सके।
5. किन्तु यह बड़े दुख व चिन्ता की बात है कि सरकारी स्कूल की व्यवस्था को बेहतर बनाने की तरफ समुचित ध्यान देने के बजाय सभी सरकारों ने ज़्यादातर इसकी घोर अनदेखी ही की है तथा इस पूरी शिक्षा व्यवस्था को एक प्रकार से, इन वर्गों के आरक्षण की तरह ही, काफी हद तक निष्क्रिय बनाने का कुचक्र चलाया हुआ है और इस प्रक्रिया में हज़ारों सरकारी स्कूल बंद भी किये जा रहे हैं, जिसका भी विरोध बी.एस.पी. ने लगातार किया है और अब स्कूलों के भवन, शिक्षक, पेयजल, शौचालय व साफ-सफाई आदि जैसी बुनियादी ज़रूरतों की अत्यन्त कमी को लेकर नन्हें जेन-अल्फा स्वंय अति-मुखर होने के साथ-साथ अब आन्दोलित भी हैं।
6. अतः यूपी सहित अन्य राज्यों की भी सभी सरकारें जेन-अल्फा के मासूम बच्चे-बच्चियों की बेहतर शिक्षा व्यवस्था सम्बंधी उनकी ज़रूरतों/माँगों पर पूरी सहानुभूति के साथ सही नीयत व नीति से तत्काल ध्यान देना प���रारंभ करें और उनके विरुद्ध कोई भी सरकार बल का प्रयोग करने से पूरी तरह से बचें तो यह उचित होगा।
1. जैसाकि सर्वविदित है कि बी.एस.पी. ’सर्वजन हिताय व सर्वजन सुखाय’ की नीतियों एवं सिद्धान्त पर चलने वाली विशिष्ट पहचान वाली पार्टी है, जो किसी भी समाज के व्यक्ति विशेष से ज़्यादा, परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर के पवित्र संविधान की सच्ची मंशा के मुताबिक़, सर्वसमाज के हित व कल्याण के लिये समर्पित है और इसीलिये पार्टी में नेताओं की नहीं बल्कि पूरे तन, मन, धन से समर्पित अम्बेडकरवादी कार्यकर्ताओं की ही फौज हर स्तर पर अधिकतर सक्रिय है। यही मान्यवर श्री कांशीराम जी द्वारा पार्टी व मूवमेन्ट के हित में स्थापित परम्परा भी है।
2. इसीलिये ब्राह्मण समाज व अन्य सभी समाज के जो भी लोग अभी तक प��र्टी से निकाले गये हैं या निकाले जा रहे हैं या वे अपने निजी स्वार्थ में दूसरी पार्टियों में चले गये हैं या फिर वे अपने ग़लत कारना��ों की वजह से उनसे बचने के लिये ख़ासकर सत्ताधारी पार्टी में शामिल हो गये हैं, तो उनका पार्टी के प्रति समर्पण भाव लोगों की निगाह में भी उनके कार्यों के ऑकलन के आधार पर काफी सशंकित व निराशाजनक बना रहा है, क्योंकि ख़ासकर बी.एस.पी. सरकार के दौरान भी ऐसे लोगों ने अपने निजी व पारिवारिक स्वार्थ के लिए ही पार्टी से फायदा ज़्यादा उठाया है और अपने समाज व पार्टी के हित के लिए वे लोग अधिकतर निष्क्रिय व उदास��न ही बने रहे हैं।
3. इतना ही नहीं बल्कि इन्हीं सब कारणों से उन लोगों ने अपनेे समाज को भी सही से बी.एस.पी. में नहीं जोड़ा है, जो कि पार्टी की अपेक्षा के विरुद्ध इनका यह सब कृत्य होने की वजह से पिछले कई लोकसभा व विधानसभा आमचुनावों में पार्टी को काफी नुकसान भी उठाना पड़ा है, जो किसी से भी छिपा हुआ नहीं है।
4. किन्तु उसके बाद से पार्टी में लम्बे अरसे से ईमानदार व हर मामले में पार्टी के प्रति लगातार समर्��ित एवं निष्ठावान चले आ रहे पार्टी के वरिष्ठ लोगों द्वारा आएदिन नये कर्मठ व ईमानदार लोगों व ख़ासकर युवाओं को पार्टी की नर्सरी में तैयार किया जाता रहा है, जो यह अभियान ��ूरी तरह से जारी है।
5. और अब वे लोग काफी हद तक पार्टी की अपेक्षा के अनुसार जी-जान से लगातार लगे हुये हैं। पार्टी को पूरी उम्मीद है कि ये सभी नये व पुराने लोग हर मामले में ज़्यादा बेहतर, साफ-सुथरे व मिशनरी मानसिकता के बनकर उभरेंगे और वे सच्चे अम्बेडकरवादी एवं संविधानवादी संघर्ष के भरपूर तौर पर काम आयेंगे।
6. इसके साथ ही, पार्टी ख़ासकर ब्राह्मण समाज को यह भी विश्वास दिलाना चाहती है कि वे अपनी पूर�� मज़बूती के साथ पार्टी से जुड़े रहें और उन्हें हर चुनाव में उनकी तैयारी के आधार पर उनकी भागीदारी यानी चुनावी उम्मीदवार बनाने तथा सरकार बनने पर सन 2007 की तरह ही इनको व अन्य सभी समाज को भी पूरा-पूरा उचित मान-सम्मान ज़रूर दिया जाता रहेगा। और सर्वसमाज आधारित ऐसी अपनी बी.एस.पी. पार्टी को ज़मीनी स्तर पर तैयार करने के मामले में अब विशेषकर दलित समाज को ही अपनी अह्म भूमिका निभानी है। वैसे बी.एस.पी. की नर्���री, सर्वसमाज के हसीन गुलदस्तों से ही, अधिकतर हरी-भरी व सजी रहती है
देश व दुनिया भर में रहने वाले समस्त भारतीय नागरिकों व उनके परिवार वालों को भी आज 80वें स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक बधाई एवं ढेरों शुभकामनायें।
आज आज़ादी के दिन को सभी लोग जितने भी हर्ष व उल्लास से आपसी भाईचारा व मेलजोल के साथ मनायें वह कम ही होगा, जबकि उच्च संव���धानिक व क़ानूनी ओहदों पर बैठे लोग अपने दायित्वों के प्रति भी ज़्यादा सचेत रहें तो यह बेहतर, क्योंकि जनता वास्तविक देश व जनहित के प्रति उनकी सही और सच्चे उत्तरदायित्व की अपेक्षा अब ज़्यादा करने लगी है।
स्वतंत्रता दिवस जैसे ख़ास मौक़ों पर लोग यह उम्मीद रखतेे हैं कि यहाँ की उच्च संस्थायें भारतीय संविधान के ’चेक एण्ड बैलेन्स’ के उद्देश्य व ज़िम्मेदारी को पूरी ईमानदारी व निष्ठा के साथ निभाय���ंगी, तभी भारत के गणतंत्र होने का सही लाभ यहाँ के ख़ासकर करोड़ों दलितों, आदिवासियों, अति-पिछड़ों, मुस्लिम व अन्य धार्मिक अल्पसंख्यकों सहित सर्वसमाज के ग़रीबों, मज़दूरों, किसानों, युवाओं व महिलाओं तथा अन्य मेहनतकश लोगों को, बेरोजगारी व भ्रष्टाचार-मुक्त, ख़ुशी व खुशहाली की ज़िन्दगी के रूप में मिलेगा और यहाँ का लोकतंत्र व पवित्र संविधान सभी लोगों की उम्मीदों के अनुसार सार्थक सिद्ध होगा। यही ��ज के दिन का संदेश।
यूपी के ज़िला ���म्बेडकरनगर में वरिष्ठ आईपीएस अफसर श्री आशुतोष मिश्रा के लगभग 91-वर्षीय बुजुर्ग माता की हुई हत्या अति-दुखद तथा प्रदेश में क़ानून-व्यवस्था के हिसाब से अति-चिन्तनीय। ऐसी घटना को लेकर लोगों की यह आशंका वाजिब है कि जब हत्या जैसी जघन्य घटना पुलिस अधिकारी के परिवार के साथ हो सकती है तो आमजन की सुरक्षा का क्या होगा? सरकार इस घटना का उचित संज्ञान ले और दोषियों के ख़िलाफ सख़्त क़ानूनी कार्रवा�� करे जो यह अत्यन्त ज़रूरी है।
दिनांक 15-16 अगस्त 2026 को आयोजित किए गए बामसेफ पश्चिम बंगाल प्रदेश के द्वारा आयोजित "दो दिवसीय बामसेफ कैडर कैंप" के उद्घाटन की कुछ तस्वीरें।
Images from the Inauguration Program of the "Two-Days Bamcef Cadre Camp" organized by the West Bengal unit of BAMCEF on August 15–16, 2026.
1. उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा आमचुनाव सन् 2027 की तैयारियों के मद्देनज़र बी.एस.पी. के जनाधार को सर्वसमाज में बढ़ाने की ज़मीनी मज़बूती के साथ-साथ पार्टी उम्मीदवारों के चयन व उनके नामों की पार्टी के विधानसभा स्तरीय कार्यकर्ता सम्मेलनों में घोषणा करने आदि की प्रक्रिया भी चल रही है, जिसको लेकर विरोधी पार्टियों में काफी बेचैनी है और सत्ताधारी पार्टी बीजेपी व अन्य विरोधी पार्टियों में भी अब अनवरत बदलाव होना भी स्वाभाविक है।
2. वैसे बी.एस.पी. ने, सर्वसमाज में से ख़ासकर ब्राह्मण समाज को भी पार्टी में उनकी सन् 2007 की तरह बी.एस.पी. की पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने की तैयार��� के हिसाब से, उन्हें बी.एस.पी. उम्मीदवार बनाना जब से शुरू किया है तब से विरोधी पार्टियों में इसको लेकर चर्चा व चिन्तायें दोनों होना स्पष्ट हैं, जिनके हथकण्डों से ’बहुजन समाज’ के लोगों को लगातार सजग व सतर्क रहने की ज़रूरत है।
3. इसी क्रम में बहुजन समाज पार्टी के काफी लम्बे अरसे से चले आ रहे राष्ट्रीय महासचिव, वरिष्ठ अधिवक्ता व बी.एस.पी. शासनकाल में यूपी के महाधिवक्ता, उत्तर प्रदेश बार काउन्सिल के कई बार अध्यक्ष तथा बी.एस.पी. सरकार में कैबिनेट मंत्री एवं कई बार बी.एस.पी. के राज्यसभा सांसद रहे श्री सतीश चन्द्र मिश्र जी को, पार्टी द्वारा लीगल व मीडिया आदि के साथ-साथ अब चुनाव आयोग सम्बंधी कार्यों की भी महत्वपूर्ण ज़िम्मेदारी साैंपी गयी है, जो कि ख़ासकर आगामी विधानसभा आमचुनाव के दौरान कई मायने में इनकी अहम् भूमिका रहेगी।
An important meeting of the state officials was held at the Bahujan Samaj Party West Bengal State Office (Sodpur, Kolkata), in which the dates for organizational expansion, membership collection and meetings of all the responsible officials in the remaining days of the month of August were finalized.
1. बहुजन समाज पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव व वरिष्ठ अधिवक्ता, उत्तर प्रदेश के पूर्व महाधिवक्ता, बार काउन्सिल, उत्तर प्रदेश के पूर्व अध्यक्ष, बी.एस.पी. सरकार में कैबिनेट मंत्री एवं कई बार बी.एस.पी. के राज्यसभा सांसद रहे श्री सतीश चन्द्र मिश्र जी को अब वकालत के पेशे में 50 वर्ष (स्वर्ण जयंती) पूरे होने के इस शुभ अवसर पर हार्दिक बधाई एवं ढेरों शुभकामनाएँ।
2. माननीय न्यायालय के गलियारों से लेकर जनसेवा की राजनीति तक, इनका यह सफर सदैव सत्य, न्याय और संविधान के प्रति अटूट निष्ठा से संचालित रहा है। न्याय ��ो केवल अदालतों की चौखट तक सीमित ना रखकर समाज के अन्तिम व्यक्ति तक पहुँचाने का जो संकल्प इन्होंने निभाया है, विशेषकर दृष्टिबाधित एवं अन्य दिव्यांगजनों के अधिकारों के लिए किए गए इनके ऐतिहासिक कार्य भी अनुकरणीय हैं।
3. परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर द्वारा रचित भारतीय संविधान के मूल्यों और लोककल्याण के इस संकल्प को वे आगे भी इसी ऊर्जा और समर्पण के साथ समृद्ध करते रहें, यही कामना है।
बहुजन समाज पार्टी (बी.एस.पी.) के कर्मठ, ईमानदार व पूरी तरह से वफादार बलिया की रसड़ा सीट से लोकप्रिय विधायक श्री उमाशंकर सिंह की आज शाम लम्बी बीमारी की वजह से इलाज के दौरान देहान्त हो जाने की ख़बर अति-दुखद। उनके ��रिवार तथा उनके सभी चाहने वालों के प्रति मेरी गहरी शोक संवेदना। पार्टी के प्रति उनकी निष्ठा की जितनी भी तारीफ की जाये वह कम है। उनका पूरा परिवार बी.एस.पी. परिवार की तरह है तथा उनके परिवार के सभी लोग मुझे बड़ी बहन की तरह ही पूरा आदर-सम्मान देते हैं।
उनके पुत्र से लगातार सम्पर्क बने रहने के दौरान ही आज शाम उनके देहान्त की ख़बर उनके पुत्र से ही मिली। इस दुख की घड़ी में मैं व पूरी पार्टी उनके व उनके ��रिवार के साथ है तथा उन्हें किसी भी प्रकार से हिम्मत नहीं हारना है बल्कि इस परिस्थिति का सामना करते हुये आगे बढ़ना है। कुदरत उन सभी लोगों को इस दुख को सहन करने की शक्ति दे।
माननीय बहन जी ने नारा दिया -
सर्वजन हिताय! सर्वजन सुखाय!!
बहुजन समाज पार्टी का सिद्धांत किसी भी जाति, वर्ग, धर्म व संप्रदाय के पक्ष या विपक्ष में नहीं है। बीएसपी बहुजन समाज समाज की है, सर्वजनसमाज की है!
आज बहुजन समाज पार्टी के विधायक श्री उमाशंकर सिंह जी के लंबी बीमारी के चलते असमय देहावसान से पूरा बसपा परिवार शोकाकुल है।
माननीय बहन जी ने उनके देहावसान पर अपने ट्वीट के माध्���म से यह स्वीकार किया कि वे मुझे बड़ी बहन की तरह मानते थे, उनके पुत्र सुकेश सिंह लगातार माननीय बहन जी के संपर्क में रहे और माननीय बहन जी उनके बीमारी का दुख सुख का समाचार लेती रहीं।
बीएसपी के जनप्रिय विधायक श्री उमाशंकर सिंह के परिनिर्वाण पर उन्हें सत्-सत् नमन एवं विनम्र श्रद्धांजली!!
1. उत्तर प्रदेश विधानमण्डल का मानसून सत्र आज दिनांक 3 अगस्त से शुरू हो रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक़ क��ल मिलाकर चार कार्य दिवस वाले इस सत्र में अगले दिन दिनांक 4 अगस्त को सरकारी ख़र्चे सम्बंधी अनुपूरक बजट राज्य सरकार विधानसभा में पेश करेगी।
2. हालाँकि यह सत्र अति-अल्पकालीन है, फिर भी लोगों की यही अपेक्षा है कि यूपी विधानमण्डल का यह सत्र, संसद के वर्तमान सत्र की तरह ही, देश व जनहित, जनकल्याण एवं जव्लन्त जन समस्याओं के प्रति समर्पित होने के बजाय, संकीर्ण दलगत राजनीति, खींचतान, आरोप-प्रत्यारोप व ह��गामा आदि की पूरी तरह से भेंट ना चढ़ जाये।
3. वैसे इस अल्पकालीन सत्र को लेकर लोगों की यह चिन्ता भी स्वाभाविक ही है कि अफ़सरशाही (ब्यूरोक्रेसी) को संविधान के शपथ के प्रति जवाबदेह एवं जनहित, जनकल्याण को लेकर उत्तरदायी बनाये रखने के लिये ज़रूरी है कि विधायिका का संवैधानिक प्रभाव किसी भी प्रकार से कम ना होने पाये।
4. इसके लिये यूपी के विधानमण्डल का लगातार घटते सत्र के साथ-साथ विधानसभा का इतना संक्���िप्त सत्र क्या अपना वास्तविक उद्देश्य हासिल कर पायेगा या फिर केवल औपचारिकता ही रह जायेगी?
5. देश के संविधान व यहाँ लोकतंत्र की मज़बूती तथा अफसरशाही पर लगाम के लिये विधायिका की मज़बूती अति-महत्वपूर्ण और इसके लिये सरकार व विपक्ष दोनों का गंभीर संसदीय आचरण ज़रूरी।