थाने में अमित शाह की फोटो देखकर राहुल जी ने पूछा
“आपके इन-चार्ज अमित शाह जी हैं?
क्या डिपार्टमेंट को अमित शाह चलाते हैं?
तो वहाँ फोटो क्यों लगा रखा है?”
🍿🍿
भैंस के तबेले में सरकारी स्कूल चलाएंगे लेकिन किसी ने अगर सच दिखाया तो उस पर हमले करेंगे.
ABP न्यूज के हवाले से जयपुर के पास चल रहे सरकारी स्कूल का हाल देखिए
So proud of you my friend @AnumaVidisha 👏👏
Never mess with women - and especially those who have adorned the uniform!
वंदे मातरम् हो या आज़ादी की जंग - कांग्रेस का हक था और रहेगा
BJP वालों का इतिहास: मुखबिरी, माफ़ीनामा, जिन्ना के साथ सरकार चलाना, तिरंगे का बहिष्कार है!
किसान का अपमान, देश का अपमान है!
भाजपा ने किसान के मुँह पर लात मरवाकर पूरे देश के किसानों को धमकाने का जो कुकृत्य किया है वो अक्षम्य है।
उप्र की भाजपा सरकार द्वारा किसान नेताओं पर थाने में थर्ड डिग्री की मार-पीट करके प्रताड़ना देना दर्शाता है कि हार के डर से वो कितनी बौखलाई है। जिन्हें भाजपा किसानों के आगे ढाल बनाकर साथ में खड़ा करना चाहती थी वो ढाल भी निम्नलिखित कारणों से, किसानों के आक्रोश की आग के कारण मोम की ढाल ही साबित हुई है।
जो भाजपा सरकार :
- कुछ लोगों के हाथ में खेती-किसानी, भंडारण, विदेशी बीज-खाद- पैदावार का व्यापार-विपणन देने के लिए विदेशियों से डील करती है।
- एमएसपी के लिए तैयार नहीं होती है।
- ख़रीद के लिए मुकर जाती है।
- खाद की अंतहीन लाइन में किसानों को लगाती है।
- भूमि अधिग्रहण व तीन काले क़ानून लाकर, किसानों का सब कुछ हड़प लेना चाहती है।
- किसान आंदोलन में 700 से भी अधिक किसानों की शहादत पर चुप रहती है।
- किसानों की आत्महत्याओं पर शोक तक प्रकट नहीं करती है।
- किसानों पर गाड़ी चढ़ाकर मारनेवाले अपने लोगों का क्लीन चिट देती है…
उस भाजपा सरकार से इससे अधिक उम्मीद क्या की जा सकती है कि वो किसानों के हित के नाम पर उनके तथाकथित हितैषियों से समझौता करके अपनी स्वार्थ सिद्धी में लगी रहकर ‘किसान नेताओं’ को थर्ड डिग्री देगी और कुछ नहीं।
देश भर के किसान देख लें कि भाजपा और उसके सहयोगी किस तरह सत्ता सुख में लीन रहकर किसानों पर अत्याचार कर रहे हैं।
इस मामले की गहरी जाँच हो और हर दोषी के ख़िलाफ़ सख़्त दंडात्मक कार्रवाई हो और बर्खास्तगी भी।
घोर निंदनीय!
किसान कहे आज का , नहीं चाहिए भाजपा!
आज साहिल लोचब के साथ, उनके साथ हुई पुलिस बर्बरता के खिलाफ FIR दर्ज कराने संसद मार्ग के DCP कार्यालय पहुँचा।
20 जुलाई को जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे साहिल पर पुलिस ने पैलेट गन से हमला किया। छर्रों से बुरी तरह घायल साहिल की एक आँख की रौशनी खतरे में है।
शांतिपूर्ण प्रदर्शन के खिलाफ ऐसी बर्बरता कोई कानूनी कार्रवाई नहीं, एक गंभीर अपराध है। इस क्रूरता के लिए न गृह मंत्री अमित शाह ने छात्रों को कोई सफाई दी, न प्रधानमंत्री ने उनसे माफ़ी मांगी।
अब जब साहिल न्याय के लिए FIR दर्ज कराना चाहता है तो वो भी नहीं करने दिया जा रहा। इस तरह संविधान और संवैधानिक अधिकारों को कुचला जा रहा है।
@AmitShah जी, न्याय से इतना क्यों घबरा रहे हैं? ये डर दिखा रहा है कि आप अपना अपराध कबूल कर रहे हैं।
FIR होगी। न्यायिक जाँच होगी। और ऊपर से नीचे तक जो भी इस बर्बरता के दोषी हैं, उन सभी पर कार्रवाई होगी।
साहिल और उसके जैसे पीड़ित हर छात्र को न्याय दिलाकर रहेंगे।
इस देश की कम-से-कम 64 प्रतिशत आबादी नौजवान है। उनका मुद्दा वंदे मातरम् नहीं है।
उनका मुद्दा शिक्षा, रोज़गार और भविष्य की सुरक्षा है। उनका सवाल है: देश का भगोड़ा गृह मंत्री जब भी मुँह खोलता है, तो समाज में सिर्फ़ साम्प्रदायिकता और ध्रुवीकरण ही क्यों घोलता है ?