Poverty Tourism vs Real Tourism!
कांग्रेस ने दुनिया को भारत की गरीबी और सपेरों की छवि दिखाई।
मोदी जी ने दुनिया को भारत की संस्कृति, सभ्यता और सामर्थ्य से परिचित कराया।
यही फर्क है कांग्रेस और मोदी सरकार में। ⬇️
If you are born into the Hindu civilization, you inherit one of the world’s oldest living cultural and spiritual traditions
Be proud of your heritage.
Know your roots.
Preserve your traditions.
Pass them on to the next generation. 🔥
“ Bhaichara ka Naara band Karo “
We cannot co exist with these Jihadis
Women staying in the locality of Surya were raising the slogans showcasing their anger towards the community 👇🏽
Most disgusting community. 🤮Their atrocities on Kashmiri women are deplorable.
They are not leaving goats or donkeys, why would they leave women?
Check the slide on Burhan Wani, whom Barkha Dutt showed as a victim.🤯😳
आखिरकार मुझे यह वीडियो मिल ही गया।
मैं हर हिंदू से अनुरोध करती हूँ कि वे इस वीडियो को सेव कर लें, और अपने दोस्तों व परिवार वालों से भी इसका अभ्यास करने को कहें।
बांग्लादेश में जिस हिंदू शख्स को मारकर जलाया गया उसके खिलाफ ईशनिंदा का नहीं मिला कोई सबूत!
बांग्लादेश में जिस हिंदू शख्स को भीड़ ने पीट-पीटकर मारने के बाद पेड़ से बांधकर शव को जलाया गया उसके खिलाफ ईशनिंदा का सबूत नहीं मिला है।
एक अधिकारी ने पुष्टि की है कि ऐसा कोई सबूत नहीं मिला है जिससे पता चले कि दीपू चंद्र दास ने फेसबुक पर कुछ ऐसा लिखा था जिससे धार्मिक भावनाएं आहत हुई हों।
कमलेश कुमारी याद है आपको...
जब संसद पर हमला याद होगा तो आतंकवादियों की पहली गोली खाने वाली भी याद होनी चाहिए...
पर धुरंधर को प्रोपेगंडा साबित करने में तुले हुए नमकहराम लोगों को याद नही होगी कमलेश कुमारी क्योंकि ये लोग तो सबकी मिट्टी में शामिल है खून वाली बकैती कर देते हैं,पर इनके सात पुश्तों में से किसी ने देश के लिए नाखून तक की शहीदी नही दी होगी।
लेकिन सच तो ये है कि हमारे इतिहास में ऐसे अनगिनत बलिदान दर्ज हैं, जिन्हें हम याद करते हैं समय समय पर ,क्योंकि ये प्रचार नहीं, राष्ट्र की चेतना को जिंदा रखना है।
साल 2001 तारीख 13 दिसंबर
दिल्ली की सर्द धुंध में संसद भवन कामकाज में व्यस्त था। भीतर प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी, लालकृष्ण आडवाणी सहित देश के शीर्ष नेता मौजूद थे। बाहर गेट पर सुरक्षा संभाल रही थीं CRPF की ब्रावो कंपनी की बहादुर सिपाही कॉन्स्टेबल कमलेश कुमारी
गेट नंबर 1 पर तैनात कमलेश कुमारी ने अचानक एक सफेद एंबैसडर कार को तेज़ी से सुरक्षा घेरा तोड़ते देखा नंबर था DL 3CJ 1527
उनकी चौकन्नी निगाहें तुरंत समझ गईं कि यह सामान्य हरकत नहीं है। कमलेश के हाथ में हथियार नहीं था सिर्फ़ वायरलेस था।
पर वो भांप चुकी थी खतरे को कि ये वाहन संसद के अंदर नहीं घुसने नही देना है।
उन्होंने दौड़कर गेट बंद कर दिया, बाकी शोर मचा कर और वायरलेस पर जवानों को चेताया। बस कुछ सेकेंड और सबको अलर्ट कर दिया।
गेट बंद होने की अपरातफरी में गाड़ी जाकर टकरा गई ,क्रुद्ध आतंकियों ने उन पर अंधाधुंध गोलीबारी की
ग्यारह गोलियाँ ,कमलेश को लगी।
पर उन्होंने गिरने से पहले वह कर दिखाया जिसने इतिहास में वो होने से रोक दिया जो भारत के भविष्य को बदल सकता था।
उनकी सतर्कता ने आतंकियों का प्लान ध्वस्त कर दिया। एक आत्मघाती हमलावर संसद के भीतर विस्फोट करने वाला था अगर वह अंदर पहुँच जाता, तो भारत का आज शायद कुछ और होता।
1994 में CRPF जॉइन करने वाली कमलेश कुमारी ने ड्यूटी को अपने परिवार पति अवधेश कुमार और बेटियों ज्योति व श्वेता से ऊपर रखा।
उनके बलिदान के सम्मान में 2002 में उन्हें अशोक चक्र (मरणोपरांत) प्रदान किया गया। वो यह सम्मान पाने वाली वह भारत की पहली महिला कॉन्स्टेबल बनीं।
लेकिन उनकी मौत के बाद परिवार ने जाने कितने संघर्ष झेले। जब संसद हमले के दोषी अफ़ज़ल गुरु की फाँसी में राजनीतिक बहसें आड़े आईं, परिवार ने क्षोभ में अशोक चक्र लौटाने की घोषणा की।
उन्होंने कहा“जिस देश के लिए कमलेश ने जान दी, अगर वही उसके हत्यारे को सज़ा देने में देर करे, तो इस सम्मान को रख कर हम क्या करेंगे ?”
2013 में अफ़ज़ल गुरु के फाँसी पाए जाने के बाद परिवार ने सम्मान दोबारा स्वीकार किया।
कमलेश कुमारी सिर्फ़ एक कॉन्स्टेबल नहीं थीं ,वह भारत की वह पहली दीवार थीं, जिस पर आतंकवाद की पहली चोट टकराकर टूट गई। उन्होंने साबित किया
सबसे बड़ा हथियार बंदूक नहीं, साहस होता है। यही कुछ 26/11 में तुका राम ओंबले ने किया ।बस लाठी के दम पर उन्होने अजमल कसाब को थब तक पकड़े रहा जब तक उसकी मैगजीन खाली नही हो गई।एक जीवित आतंकवादी जिसने षड़यंत्र के वो परते खोली,जो अभी तक खुलती ही जा रही है।
यह सारी कहानियां प्रचार नहीं हैं
यह वह सच्चाई है जो याद दिलाती है कि देश की सुरक्षा सिर्फ़ सीमाओं पर नहीं, दिलों में जली उस एक लौ से भी चलती है जिसके नाम है—कमलेश कुमारी, तुकाराम ओंबले,जाने वो कितने सिपाही जो हर पल हल क्षण बिना किसी स्वार्थ के लगे हुए हैं देश को बचाने में,जान देने तक।
@mcgurgaon@bjp_haryana soorat nagar phaSe 1 gurgaon. Yaha hamesha paani bhara rehta hai. Ab to saari sarkar aapki hai, ab ti development expect kr skte hain