@NHameerpur@SanjayAzadSln साले आतंकी,
देश का राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा है और रहेगा और तुम आतंकियों को चोद दिया जायेगा जो राष्ट्रीय ध्वज का अपमान करेगा तो 🤬🤬🤬🤬🤬
ध्यान से सुनिये SC ST OBC के पेट और पीठ में कैसे छुरा मारा है मोदी सरकार ने?
@DrLaxman_Yadav को मिले RTI के जवाब पर BJP ख़ामोश।
तुम लोग SC ST OBC से नफ़रत क्यों करते हो भाजपाईयों?
कुछ समय पहले इस तश्वीर ने भारत के साथ साथ पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा था. ये दोनों फोटो बाबा साहब डॉ अम्बेडकर के प्रपौत्र राजरत्न अंबेडकर की है. जिन्होंने दिल्ली के एक मैदान से 22 प्रतिज्ञाओं की शपथ ली. जहाँ पर आम आदमी पार्टी के नेता राजेन्द्र पाल गौतम भी मौजूद थे. उन्होंने भी ये शपथ दुहराई.
इस दृश्य से आहत जी न्यूज, आजतक, रिपब्लिक भारत, इण्डिया टीवी जैसी मनुवादी मीडिया और उसके एंकर बौखला गये. और उनसे भी जादे बौखलाहट बेचैनी मनुवादी संगठन RSS सहित उसके सभी अनुषांगिक संगठनों विश्व हिंदू परिषद व भारतीय जनता पार्टी को हुई.
भाजपा के प्रवक्ता टीवी चैनलों पर राजेन्द्र पाल गौतम और केजरीवाल की हिन्दू धर्म विरोधी बताकर आलोचना करने लगे. राजेन्द्र जी पर किसी तिवारी ने FIR भी कराया है. संक्षिप्त मे बताता चलूं कि भारत मे बौद्ध धर्म, जैन धर्म, आजीवक दर्शन का इतिहास सबसे पुराना है. यानी भारत में आर्यों के आगमन से भी पहले यहाँ ये धर्म विद्यमान थे.
जैन धर्म/दर्शन को प्रसिद्ध करने वाले वर्धमान महावीर उसके 24 वें तीर्थंकर थे. वैसे ही बौद्ध धर्म को विश्वविख्यात करने वाले सिद्धार्थ गौतम बुद्ध 28 वें बौध्द थे. आजीवक व चार्वाक जैसे धर्म तो आज विलुप्त हो चुके हैं.
लगभग 4000 ई.सा. पूर्व आर्यों के आगमन ने शासन, सत्ता के साथ साथ धार्मिक व सांस्कृतिक टकराव पैदा किया. यहीं बैठ कर सारे वेद, पुराण, रामायण, महाभारत, स्मृतियां रची गई. और उनका समय मानव के प्रागैतिहासिक काल से भी पीछे बताया गया. जिन्होंने इस पर सवाल उठाया उसे आस्था व भगवान के डर से शांत करा दिया गया.
आज भी किसी हड़प्पा व मोहनजोदड़ो जैसे स्थान की खुदाई में न आर्यों की संस्कृत भाषा की लिपि मिलती है और न ही इनके पहले से होने के कोई सबूत मिलते हैं. ये अंधविश्वास और विभिन्न अनुष्ठानों व पाखंडो के माध्यम से लोगों के दिमाग में भर दिये गए हैं. जो जल्दी निकलते नहीं है.
आज भी भारत मे बौद्धों से जुड़े मठ, गुफाएं, मूर्तियां सुदूर पहाड़ों और जंगलों मे मिल रही हैं. बहुत से ऐसी मूर्तियों और मठों पर चंदन तेल लगाकर ब्राह्मण धर्म के पुरोहितों ने कब्जा कर लिया है और खूब कमाई कर रहे हैं. ब्राह्मण धर्म ने समय समय पर अपने नाम मे बदलाव किया ताकी लोग बगावत न करें. इसे हिंदू धर्म और फिर सनातन धर्म कहकर प्रचारित किया. ताकि लोगों को लगे की ये सबसे पुराना धर्म है जिसका उद्गम स्थल भारत ही है. इस कुटिल चाल को समझने की आवश्यकता है.
Shiva Nand Yadav
(शोधछात्र, गोरखपुर विश्वविद्यालय, गोरखपुर)