जिस तरीके से जंतर-मंतर पर छात्र-छात्राओं पर लाठीचार्ज करके, पेलेट गन, आँसू गैस के गोले इस्तेमाल करके उनकी आवाज को दबाने की कोशिश की गई। प्रदर्शन के दौरान सरकार के खिलाफ आवाज़ उठाने वाले छात्र-छात्राओं पर BJP,बजरंग दल,RSS के लोगों द्वारा FIR दर्ज कराई जा रही हैं, उनके घरों पर जाकर दबाव बनाया जा रहा है, मोबाइल नंबर सार्वजनिक कर उन्हें परेशान किया जा रहा है और उनके चरित्र पर भी अभद्र टिप्पणियाँ की जा रही हैं।
जब नेता प्रतिपक्ष @RahulGandhi जी ने संसद में छात्रों के समर्थन और चंदा चोरी के मुद्दे पर सांकेतिक विरोध दर्ज कराया, तब उनके खिलाफ बजरंग दल,RSS के लोगों द्वारा FIR दर्ज कराई गई। देश में डेमोक्रेसी बची नहीं है ।
याद रखिए, सत्ता की ताकत छात्रों की आवाज़ से बड़ी नहीं हो सकती।
#StandWithStudents #NSUI
जोबनेर कृषि विश्वविद्यालय में RSS के बैनर-पोस्टर हटाने के आरोप में तीन छात्रों को प्रतिबंधित कर अन्य कॉलेजों में भेजने का फैसला बेहद निंदनीय है
प्रशासनअन्यायपूर्ण कार्रवाई को वापस ले,अन्यथा NSUI छात्रों के हितों में बडी लड़ाई लड़ेंगी ! @LokBhavanJaipur@VinodJakharIN@RajCMO
सिवान आंदोलन के दौरान पुलिस की AK-47 से घायल छात्रों से मुलाकात कर उनका व परिवार का हाल जाना। बुलेट कुमार गौड़, आकाश और आरिफ जैसे युवाओं की पीड़ा केवल उनकी नहीं, पूरे देश के छात्रों की आवाज़ है।
जो सरकार छात्रों की आवाज़ का जवाब गोलियों और लाठियों से देती है, उसे जवाब देना होगा। कांग्रेस पार्टी हर घायल छात्र के साथ मजबूती से खड़ी है और न्याय की इस लड़ाई को अंत तक लड़ेगी।
@INCIndia@RahulGandhi@kharge@priyankagandhi@kcvenugopalmp@ShayarImran@ManojkumarINCMP@VikrantBhuria
राजस्थान के विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में पिछले तीन शैक्षणिक सत्रों से छात्रसंघ चुनाव नहीं हुए हैं। छात्रसंघ चुनाव लोकतंत्र की पहली पाठशाला हैं।
माननीय @BhajanlalBjp जी से आग्रह है कि विद्यार्थियों के लोकतांत्रिक अधिकारों का सम्मान करते हुए शीघ्र छात्रसंघ चुनाव करवाए जाएँ।
कैंसर की अंतिम स्टेज से जूझ रहे पिता को जब अहसास हुआ कि उनके पास अब ज्यादा वक्त नहीं बचा है, तो उन्होंने अपने बेटे मंत्र को अपने पास बुलाया. उन्होंने बहुत ही प्यार और दुलार से अपने बेटे को समझाया कि उनके जाने के बाद उसे कैसे रहना है. पिता ने बेटे से कहा कि वह अपनी मां की हर बात सुने और कभी भी बदमाशी न करे. उन्होंने मासूम को समझाया कि अब परिवार की जिम्मेदारी और मां-बहनों का ख्याल रखने का वक्त उसका ही है.
वीडियो में पिता अपने मासूम बेटे का हौसला बढ़ाते नजर आ रहे हैं. जब बच्चा भावुक होने लगता है, तो पिता बड़े ही प्यार से उससे कहते हैं कि रोना नहीं है, तुम तो बहुत अच्छे और समझदार बच्चे हो ना. उन्होंने बेटे से रोने का वादा भी लिया ताकि उनके जाने के बाद बच्चा हिम्मत से काम ले सके. पिता की ये बातें सुनकर इंटरनेट पर हर कोई भावुक हो रहा है और इस पिता के जज्बे को सलाम कर रहा है.
उन्होंने अपने बेटे को साफ शब्दों में कहा कि वह अपनी मां का ख्याल रखेगा और उनकी हर बात मानेगा. इसके साथ ही उन्होंने बेटे को याद दिलाया कि उसे अपनी दो छोटी बहनों का भी ध्यान रखना है और उनकी रक्षा करनी है. छोटी सी उम्र में बेटे को एक जिम्मेदार इंसान बनाने की यह कोशिश दिल छू लेने वाली है
राजस्थान में छात्रसंघ चुनावों की बहाली सहित विभिन्न छात्रहित मांगों को लेकर राजस्थान विश्वविद्यालय में छात्र नेता शुभम रेवाड़ सहित कई कार्यकर्ता पिछले 8 दिनों से शांतिपूर्ण धरने एवं भूख हड़ताल पर बैठे हुए थे। दुर्भाग्यपूर्ण है कि उनकी मांगों पर संवाद करने के बजाय भाजपा सरकार ने तानाशाही रवैया अपनाते हुए उन्हें गिरफ्तार कर लिया।
वहीं, मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय, उदयपुर में भी NSUI कार्यकर्ता जितेश खटीक, कैलाश गुर्जर, सूर्यपाल सिंह देवड़ा, दीपेश गुर्जर, महावीर विश्नोई सहित अनेक छात्र नेता छात्रसंघ चुनावों की बहाली एवं अन्य छात्रहितों की मांगों को लेकर भूख हड़ताल और धरने पर बैठे हुए हैं।
यह सरकार युवाओं की आवाज़ सुनने के बजाय उनकी लोकतांत्रिक और न्यायोचित मांगों को दबाने का प्रयास कर रही है। लोकतंत्र में छात्रों की आवाज़ को कुचलना किसी भी सरकार के लिए उचित नहीं है। सरकार को संवेदनशीलता दिखाते हुए तत्काल छात्र प्रतिनिधियों से संवाद करना चाहिए, छात्रसंघ चुनाव शीघ्र बहाल करने चाहिए तथा छात्रों की सभी न्यायोचित मांगों पर सकारात्मक निर्णय लेना चाहिए।
सत्ता पक्ष मंचों से “नारी वंदन” का गुणगान करता है, लेकिन राजस्थान की एक बेटी छात्रसंघ चुनाव बहाली की मांग को लेकर पिछले 14 घंटे से पानी की टंकी पर बैठी है जहाँ ने कोई खाना है ना पानी है ना वाशरूम है।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा जी, उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी जी, प्रेमचंद बेरवा जी क्या आपको ज़रा भी संवेदना नहीं है?
न कोई संवाद, न कोई पहल, न छात्रों की सुध। क्या लोकतांत्रिक अधिकार मांगने वाले छात्रों के साथ यही व्यवहार होगा?
@INCIndia@INCRajasthan@GovindDotasra@RajCMO@BhajanlalBjp
आज अमित शाह लोकसभा में नहीं आए, क्योंकि वे Guilty हैं।
अगर Guilty नहीं होते तो.. सदन में आकर जवाब दे देते। इसलिए हम कह रहे हैं कि इन्हें गृह मंत्री के पद से हटना होगा।
: नेता विपक्ष श्री @RahulGandhi जी
बिहार में प्रदर्शन कर रहे छात्रों के साथ पुलिस द्वारा की गई बर्बरता बेहद निंदनीय और लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है।
आज पटना जेल में हमारे NSUI के साथी,पटना विश्वविद्यालय छात्रसंघ अध्यक्ष शांतनु शेखर जी सहित सैकड़ों छात्रो से AICC बिहार प्रभारी @Allavaru जी,NSUI के साथी सुरज जी,चुन्नू जी के साथ मुलाकात की । उनकी स्थिति चिंताजनक है। उनके साथ अमानवीय व्यवहार किया जा रहा है। कई छात्रों के परिजनों को आज तक यह तक नहीं बताया गया कि उनके बच्चों को कहाँ रखा गया है, जिससे उनके परिवार गहरी चिंता और पीड़ा में हैं।
हमारे साथियों ने मुलाकात के दौरान कहा कि वे डरने या झुकने वाले नहीं हैं। उनके भीतर आज भी भगत सिंह का साहस और संघर्ष जीवित है। उन्होंने संकल्प लिया है कि शिक्षा बचाने, छात्रों के अधिकारों की रक्षा करने और सरकार की गलत नीतियों के खिलाफ उनका संघर्ष लगातार जारी रहेगा।
जिस तरह से इन छात्रों को गिरफ्तार किया गया और उनके साथ व्यवहार किया जा रहा है, वह किसी लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए शर्मनाक है। साथियों ने बताया कि गिरफ्तारी के दौरान उनके साथ अपराधियों जैसा व्यवहार किया गया, उन पर दबाव बनाया गया, उन्हें झूठे मुकदमों में फँसाने की धमकियाँ दी गईं और भय का माहौल पैदा करने की कोशिश की गई।
ये छात्र किसी निजी स्वार्थ के लिए नहीं, बल्कि बिहार और देश की शिक्षा व्यवस्था को भ्रष्टाचार, पेपर लीक और खरीद-फरोख्त से मुक्त कराने की लड़ाई लड़ रहे हैं। आज युवाओं के भविष्य के साथ जिस तरह खिलवाड़ हो रहा है, वह बेहद चिंताजनक है। छात्र केवल इतना चाहते हैं कि उन्हें पारदर्शी, निष्पक्ष और भरोसेमंद शिक्षा व्यवस्था मिले ताकि उनका भविष्य सुरक्षित हो सके।
NSUI पूरे देश में छात्रों की इस लड़ाई को मजबूती से लड़ रही है। नेता प्रतिपक्ष @RahulGandhi जी भी संसद से लेकर सड़कों तक छात्रों की आवाज़ बुलंद कर रहे हैं। कोटा और देहरादून में छात्रों के साथ संवाद करने के बाद अब बिहार में भी छात्रों के साथ मिलकर NSUI बडा आंदोलन किया जाएगा । कांग्रेस पार्टी व NSUI इन छात्र-छात्राओं के साथ खडी है ।
छात्रों की आवाज़ को लाठी, जेल और दमन से दबाया नहीं जा सकता। यह संघर्ष शिक्षा, न्याय और देश के युवाओं के भविष्य की रक्षा का संघर्ष है, और यह लड़ाई तब तक जारी रहेगी जब तक छात्रों को उनका अधिकार नहीं मिल जाता।
क्या अब अपने अधिकार मांगने वाले छात्रों का सामना AK-47 से होगा?
बिहार सरकार का असली चेहरा बेनकाब हो चुका है!
पेपर लीक की जिम्मेदारी लेने के बजाय निहत्थे छात्रों पर गोलियाँ चलाई जा रही हैं।
यह प्रशासनिक बर्बरता लोकतंत्र पर एक काला धब्बा है।
फ्रेंड्स, नरेंद्र मोदी की कथनी और करनी में फर्क देखिए 👇
आज NEET पेपर लीक को लेकर फास्ट ट्रैक कोर्ट में पहली बार सुनवाई थी।
लेकिन पहली ही सुनवाई में CBI के वकील नहीं पहुंचे और इस वजह से सुनवाई टल गई। अब 3 अगस्त को इस मामले में फिर सुनवाई होगी।
यही नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार की असलियत है, जहां 'रीलबाजी' तो खूब हो रही है, लेकिन छात्रों को न्याय देने में ये रत्ती भर भी गंभीर नहीं हैं।
बाड़मेर के शिव विधानसभा क्षेत्र के देदूसर निवासी किसान श्री अबाराम जी मेघवाल पिछले दो महीने से जिला कलेक्ट्रेट के सामने न्याय की मांग को लेकर धरने पर बैठे हैं, लेकिन अब तक उनकी सुनवाई नहीं हुई।
यदि उनकी पुश्तैनी ज़मीन से जुड़े फर्जी दस्तावेज़ बनाकर कब्ज़ा किया गया है, तो यह बेहद गंभीर मामला है। एक किसान को अपने हक़ के लिए महीनों तक संघर्ष करना पड़े, यह प्रशासन और सरकार दोनों की जवाबदेही पर सवाल खड़े करता है।
प्रदेश सरकार और जिला प्रशासन से मांग है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर किसान अबाराम जी मेघवाल को शीघ्र न्याय दिलाया जाए तथा दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।
@RajGovOfficial@BhajanlalBjp@RajCMO@BarmerDm
देश की तमाम छात्र शक्ति को मेरा सलाम। आपकी आवाज़ ने सत्ता को झुकने पर मजबूर कर दिया।
धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफ़ा इस संघर्ष की पहली जीत है, लेकिन हमारी लड़ाई अभी समाप्त नहीं हुई है। लाखों छात्र-छात्राओं के भविष्य के साथ हुए खिलवाड़, शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर हुए बर्बर लाठीचार्ज और शिक्षा व्यवस्था की विफलताओं के लिए जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय होनी ही चाहिए।
जब तक देश के हर छात्र-छात्रा को न्याय नहीं मिलेगा, तब तक हमारा संघर्ष निरंतर जारी रहेगा।
The man who played a major role in Dharmendra Pradhan's resignation yet didn't receive much attention is Vinod Jakhar.
While Sonam Wangchuk & Dipke were in the comfort of their homes, Vinod Jakhar took to the streets to launch a fight against Dharmendra Pradhan.
Respect to him🫡
विनोद जाखड़ जी को भी धन्यवाद दीजिए, जिन्होंने पूरे भारत में पेपर लीक के खिलाफ आवाज़ बुलंद करते हुए इस लड़ाई की शुरुआत की। देशभर के लगभग 45 शहरों में जाकर आंदोलन किए और छात्र हितों की इस लड़ाई को मजबूती से आगे बढ़ाया।