ईको गार्डन में पंचायत सहायकों के धरने के समर्थन में पहुंचे @BhimArmyChief सांसद चंद्रशेखर आजाद...
बड़ी संख्या में प्रदेश के सभी जिलों से आए पंचायत सहायक मौजूद...
तत्काल निलंबन हो, बर्ख़ास्तगी हो और ऐसा दंड मिले कि कोई दूसरा अधिकारी फिर कभी ऐसी हिम्मत और दुस्साहस न कर सके।
‘नारी वंदन’ का ढोंग करनेवाली भाजपा सरकार है भी या नहीं।
और कुछ नहीं कहना है।
मुख्यमंत्री जी आपके इन सवालों का जवाब नहीं दे पाते इसीलिए चले गए।
8 सालों से शिक्षक भर्ती क्यों नहीं आई है।
TGT/PGT के पुराने नियमावली में एकाएक क्यों बदलाव कर दिया गया।
5 सालों से पंचायत सहायकों का मानदेय क्यों नहीं बढ़ाया गया है।
आयुष इंटर्न डॉक्टरो को सम्मानजनक स्टाइपेंड क्यों नहीं दिया जा रहा है।
जूनियर असिस्टेंट भर्ती का रिजल्ट क्यों नहीं जारी किया जा रहा।
क्यों यूपी मे 9,508 स्कूल ऐसे हैं जहाँ पहली से लेकर पांचवीं तक के स्कूलों मे एनरोल 6 लाख से ज्यादा बच्चों को, सारे विषय सिर्फ एक ही टीचर पढ़ा रहे है, और राज्य मे ऐसे हालत किसी एक तरह के विद्यालय के नहीं है बल्कि प्राथमिक, उच्च प्राथमिक, कंपोजिट विद्यालय, हाई स्कूल, इंटरमीडिएट, कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय, सर्वोदय विद्यालय, अटल आवासीय विद्यालय, राजकीय इंटर कॉलेज, राजकीय मॉडल विद्यालय, संस्कृत माध्यमिक विद्यालय हर तरह के राज्य के अधीन स्कूलों का हाल ऐसा क्यूं है… कहीं मैथ-विज्ञान के टीचर नहीं तो कहीं इंग्लिश के नहीं है…सरकार दावे विश्व गुरु बनने की करती है पर स्कूलों मे बिना शिक्षकों को नियुक्त किए सरकार कैसे विश्व गुरु बन सकती है।
पत्रकार महोदया आपके ऐसे सवालों का जवाब मुख्यमंत्री जी के पास नहीं है इसीलिए वह प्रेस कॉन्फ्रेंस छोड़कर जा रहे हैं।
कम से कम मुख्यमंत्री जी प्रेस कॉन्फ्रेंस कर तो रहे हैं भले ही जवाब ना देते हो स्क्रिप्टेड रिल बनवा कर चले जाते हो।
पर हमारे देश के प्रधानमंत्री जी तो मन की बात करते हैं, आधी रात में रिल बनाते हैं, युवाओं से कनेक्ट करने के लिए Gen-Z वार्ता करते हैं पर प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं करते।
धीरे-धीरे ही सही पर हमारे देश के युवा अब जाग रहे हैं और सवाल पूछ रहे हैं।
अगर ऐसे युवाओं को कोई दिमागी नक्सल कहे तो आप समझ सकते हैं की दिमागी नक्सली कौन है। https://t.co/XdZ4Ac1efB
आरक्षण विरोधियों द्वारा लंबे समय से संविधान प्रदत्त आरक्षण के खिलाफ माहौल बनाया जा रहा है। अब इसी मुहिम को “आरक्षण में सुधार” जैसे शब्दों की आड़ में आगे बढ़ाने की कोशिश हो रही है।
पूना पैक्ट दिवस, जिसे मान्यवर कांशीराम साहब ने “धिक्कार दिवस” कहा था, इसी अवसर पर सम्पूर्ण भागीदारी आंदोलन ।
📅 दिनांक: 24 सितंबर 2026
⏰ समय: सुबह 10:00 बजे
📍 स्थान: जंतर मंतर, नई दिल्ली
आप सभी अधिक से अधिक संख्या में पहुँचें और आंदोलन को मजबूती दें।
निवेदक: भीम आर्मी - आजाद समाज पार्टी (कांशीराम)
#24_सितंबर_चलो_जंतर_मंतर
#सम्पूर्ण_भागीदारी_आंदोलन
#ASP_K_Support_UGC_Act
#ASP_K_Support_UGC_Act
आरक्षण विरोधियों द्वारा लंबे समय से संविधान प्रदत्त आरक्षण के खिलाफ माहौल बनाया जा रहा है। अब इसी मुहिम को “आरक्षण में सुधार” जैसे शब्दों की आड़ में आगे बढ़ाने की कोशिश हो रही है।
पूना पैक्ट दिवस, जिसे मान्यवर कांशीराम साहब ने “धिक्कार दिवस” कहा था, इसी अवसर पर सम्पूर्ण भागीदारी आंदोलन ।
📅 दिनांक: 24 सितंबर 2026
⏰ समय: सुबह 10:00 बजे
📍 स्थान: जंतर मंतर, नई दिल्ली
आप सभी अधिक से अधिक संख्या में पहुँचें और आंदोलन को मजबूती दें।
निवेदक: भीम आर्मी-आजाद समाज पार्टी (कांशीराम)
#24_सितंबर_चलो_जंतर_मंतर
#सम्पूर्ण_भागीदारी_आंदोलन
#ASP_K_Support_UGC_Act
#ASP_K_Support_UGC_Act
UGC Act क्यों जरूरी है?
मैं प्राथमिक विद्यालय में पढ़ता हु मुझे बंदना mam स्कूल से भगा देती है कि तू नीच जाति का भांगी है
@grok बताओ ये कहां की घटना है और पुलिस ने अभी तक SC ST Act में करवाई की या नहीं?
कल लखनऊ के ईको गार्डन में पंचायत सहायकों के बीच मिलते हैं।
बारिश हो या धूप, अपने हक़ की लड़ाई में हमारे भाइयों और बहन-बेटियों को अकेला नहीं छोड़ेंगे...
जय भीम! जय भारत! जय मंडल! जय संविधान!
#पंचायत_सहायक_का_मानदेय_बढ़ाओ#पंचायत_सहायक_नियमित_करो
दलितों के वोट के बिखराव में ही भारतीय जनता पार्टी की जीत छुपी है…
ये बात हमारे अम्बेडकरवादी नेताओं को आखिर कब समझ आएगी?
हमारे महापुरुषों ने हमें सिखाया है कि अपने वोट की रक्षा और सुरक्षा ऐसे करो, जैसे अपनी बहन-बेटियों की इज़्ज़त और आबरू की रक्षा करते हो।
क्योंकि वोट सिर्फ एक बटन दबाना नहीं है, यह हमारे अधिकार, सम्मान और भविष्य की ताकत है।
लेकिन आज हमारे नेताओं से मेरा सीधा सवाल है?
हम अपने वोट की रक्षा और सुरक्षा कैसे करें, जब आप ही उस वोट को कई हिस्सों में बाँट देंगे?
हमें पता है कि हमारे समाज की ताकत क्या है।
हमें पता है कि हमारे वोट की ताकत क्या है।
हमें यह भी पता है कि अगर अम्बेडकरवादी समाज एकजुट होकर अपने वोट का इस्तेमाल करे, तो सत्ता की दिशा बदलने की ताकत रखता है।
तो क्या ये बात हमारे नेताओं को पता नहीं है?
अगर भाजपा अपने राजनीतिक हितों के लिए NDA बना सकती है, कांग्रेस INDIA गठबंधन बना सकती है, तो फिर अम्बेडकरवादी नेता अम्बेडकरवादी महागठबंधन क्यों नहीं बना सकते?
हमारा सवाल किसी एक नेता से नहीं, पूरी अम्बेडकरवादी नेतृत्व व्यवस्था से है।
व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं और राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर हमें सोचना होगा कि समाज का हित बड़ा है या हमारी-आपकी अलग-अलग राजनीतिक पहचान?
@ghaziabadpolice@dm_ghaziabad बीते कुछ दिनों में हमारे घर के ऊपर पथराव हुआ था, जिसकी सूचना मैंने 112 पर कॉल करके दी थी और शालीमार थाने में लिखित आवेदन भी दिया था। अगले दिन पुलिस की टीम हमारे घर पर जाँच के लिए आई और सोसाइटी के सभी CCTV फुटेज चेक किए, लेकिन न तो हमें वह फुटेज दिखाई गई और न ही लोगों के सामने प्रस्तुत की गई। इसी वजह से लोग बार-बार मुझ पर आरोप लगा रहे हैं कि मैं झूठ बोल रही हूँ और यह सब हमारी कोई चाल थी।
अगर सच में यह हमारी चाल थी, तो मेरा निवेदन है कि कृपया सोसाइटी के CCTV फुटेज दोबारा चेक करवाए जाएँ, हमें दिखाए जाएँ और लोगों के सामने प्रस्तुत किए जाएँ, ताकि सच्चाई सामने आ सके।
शालीमार के SHO जो कह रहे हैं कि ऐसा कुछ हुआ ही नहीं, उनसे भी मेरा यही निवेदन है कि CCTV फुटेज के आधार पर सच्चाई स्पष्ट की जाए।
मैं अपने ऊपर झूठे आरोप नहीं लगने दूँगी, क्योंकि मैं झूठ नहीं बोल रही हूँ।
आजाद समाज पार्टी के प्रमुख और सांसद चंद्रशेखर आज़ाद ने SC-ST एक्ट के तहत मिलने वाले मुआवजे की राशि बढ़ाकर कम से कम 30 लाख रुपये करने की मांग की है।
उन्होंने कहा कि अत्याचार की घटनाओं के बाद पीड़ित परिवारों को इतनी आर्थिक मदद मिलनी चाहिए, जिससे परिवार बर्बाद होने से बच सके और बच्चों की पढ़ाई-लिखाई व भविष्य प्रभावित न हो।
मुआवजे की राशि बढ़ाने की चंद्रशेखर आज़ाद की यह मांग अब सियासी बहस का मुद्दा बनती दिख रही है। उन्होंने पीड़ित परिवारों को आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा देने की जरूरत पर जोर दिया।
#LawAdvisory #ChandrashekharAzad #SCSTAct #SCST #IndiaBulletinNews
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अगर हम झूठ बोल रहे हैं तो क्या पुलिस भी झूठ बोल रही है...और अगर इसके बाद भी किसी को लगता है कि हम झूठ बोल रहे हैं तो CCTV फुटेज चेक करवा लिया जाए..और फुटेज को लोगो के सामने पेश किया जाए..फिर दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा...
पीड़ित मासूम बेटी के परिवार का बहिष्कार और आरोपियों को संरक्षण—यह भी अपराध से कम नहीं!
झांसी के समथर थाना क्षेत्र में 9 वर्षीय मासूम बेटी के साथ छेड़छाड़ की घटना के बाद उसके परिवार को जिस तरह प्रताड़ित और भयभीत किया गया, वह बेहद गंभीर एवं शर्मनाक है। 28 जुलाई की घटना के बाद परिजनों ने हिम्मत जुटाकर कानूनी कार्रवाई की।
लेकिन 2 अगस्त को पंचायत बुलाकर परिवार के सामाजिक बहिष्कार का फरमान सुनाया गया। दूध-पानी, दुकान, खेत और रास्ते तक बंद करने का दबाव बनाया गया। 3 अगस्त को दोबारा पंचायत कर आरोपी को माफ करने और शिकायत वापस लेने के लिए परिवार पर दबाव डाला गया। परिवार के मुताबिक, विरोध करने पर उन्हें लगातार धमकियां भी दी गईं।
हद तो तब हो गई जब 5 सितंबर को पीड़ित परिवार के एक सदस्य के साथ बेरहमी से मारपीट की गई। परिवार का आरोप है कि यह हमला शिकायत वापस लेने के लिए बनाए जा रहे दबाव का ही हिस्सा था।
मुख्यमंत्री @myogiadityanath जी, किसी मासूम बेटी के परिवार को डराकर न्याय से वंचित करने की कोशिश स्वीकार्य नहीं हो सकती।
@UPGovt तत्काल पीड़ित परिवार को सुरक्षा प्रदान करे और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर छेड़छाड़, सामाजिक बहिष्कार, धमकी, दबाव एवं मारपीट के लिए जिम्मेदार सभी लोगों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करे।
पीड़ित परिवार को सुरक्षा और न्याय मिलना चाहिए, दबाव नहीं।
आप सभी के स्नेह, समर्थन और विश्वास के लिए हृदय से आभार। 🙏
आपके द्वारा दिया गया प्यार और हौसला मेरे लिए @BhimArmyChief हमेशा प्रेरणा का स्रोत रहा है। @AzadSamajParty के मेरे साथी कार्यकर्ता और मेरे भाई समान साथी मुझसे मिलने आ रहे हैं। उनका यह अपनापन और साथ मेरे लिए बेहद सम्मान और खुशी की बात है।
आप सभी का प्रेम, विश्वास और सहयोग यूँ ही बना रहे।
दिल से धन्यवाद। ❤️
बड़ी खबर 🚨
प्रयागराज के हंडिया में आरक्षण व UGC एक्ट के समर्थन में दलित-पिछड़े समाज के हजारों लोग सड़कों पर उतरे और मार्च निकाला👇🏻
एकतरफ जहां आरक्षण व UGC के विरोध में हो रहे आंदोलनों में नाममात्र के लोग शामिल हो रहे हैं, जबकि कानून के समर्थन में भारी जनसैलाब सड़कों पर उतर रहा है
अब धीरे-धीरे देशभर में आंदोलनों की रफ्तार बढ़ेगी।।
पीड़ित मासूम बेटी के परिवार को बहिष्कार व सजा,आरोपियों को खुला संरक्षण-अपराध से कम नहीं!
झांसी जिले के समथर थाना क्षेत्र में 9 वर्षीय मासूम कुशवाहा बेटी के साथ छेड़छाड़ के बाद उसके परिवार को जिस तरह प्रताड़ित किया गया, वह बेहद गंभीर और शर्मनाक है। 28 जुलाई की घटना के बाद परिजनों ने कानूनी कार्रवाई की।
2 अगस्त को पंचायत लगाकर परिवार का सामाजिक बहिष्कार कर दूध-पानी, दुकान, खेत और रास्ते तक बंद करने का फरमान सुनाया गया। 3 अगस्त को दोबारा पंचायत लगाकर परिवार पर आरोपी को माफ करने और छेड़छाड़ की शिकायत वापस लेने का दबाव बनाया गया। परिवार के अनुसार, इसी दौरान विरोध करने पर उन्हें लगातार धमकियां दी गईं।
इसके बावजूद दबाव और उत्पीड़न नहीं रुका। 5 सितंबर को पीड़ित परिवार के सदस्य के साथ बेरहमी से मारपीट की गई। परिवार का आरोप है कि यह हमला शिकायत वापस लेने के लिए दबाव बनाने की कड़ी का हिस्सा था।
मुख्यमंत्री @myogiadityanath जी, पीड़ित किसी भी बेटी के परिवार को इस तरह डराकर न्याय से वंचित करने की कोशिश बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
@UPGovt तत्काल पीड़ित परिवार को सुरक्षा दे और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर छेड़छाड़, सामाजिक बहिष्कार, धमकी, दबाव और मारपीट के लिए जिम्मेदार सभी लोगों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करे।
मेरठ के चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय स्थित सर छोटूराम इंजीनियरिंग कॉलेज में बीटेक प्रथम वर्ष के विद्यार्थियों को हॉस्टल नहीं मिलने पर छात्रों और उनके परिजनों को प्रदर्शन के लिए मजबूर होना पड़ा। घंटों चले धरने के दौरान एक छात्रा बेहोश हो गई और उसे अस्पताल ले जाना पड़ा। यह बेहद गंभीर और चिंताजनक स्थिति है।बच्ची की कुशलता के लिए प्रकृति से प्रार्थना है।
हॉस्टल केवल एक इमारत नहीं, बल्कि मध्यमवर्गीय और गरीब परिवारों के विद्यार्थियों के लिए कम खर्च में सुरक्षित आवास प्राप्त कर शिक्षा पूरी करने का महत्वपूर्ण जरिया है। हॉस्टल की कमी के कारण विद्यार्थी महंगे किराये के कमरों और कई बार असुरक्षित एवं रहने योग्य न होने वाले मकानों में रहने को मजबूर होते हैं। दिल्ली के मोती बाग स्थित “सत्य निकेतन” में पांच मंजिला इमारत गिरने की घटना इसका दुखद प्रमाण है।
भीम आर्मी-आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) विद्यार्थियों की हॉस्टल की इस मांग का पूर्ण रूप से समर्थन करती है। विश्वविद्यालय प्रशासन सभी पात्र विद्यार्थियों को तत्काल हॉस्टल उपलब्ध कराए और छात्र संख्या के अनुपात में पर्याप्त, सुरक्षित एवं किफायती आवासीय व्यवस्था सुनिश्चित करे।
विडंबना है कि जिस समय युवा सुरक्षित हॉस्टल, बेहतर शिक्षा और अपने भविष्य की मांग कर रहे हैं, उस समय बुलडोजर चलाने में व्यस्त भाजपा की सरकारों को विद्यार्थियों की इन बुनियादी जरूरतों की चिंता नहीं है।
सरकारों की प्राथमिकता युवाओं के लिए शिक्षा, रोजगार और सुरक्षित आवास होना चाहिए। छात्रों को अपने अधिकार के लिए धरने पर बैठने और एक छात्रा को बेहोश होने तक संघर्ष करने की नौबत आना व्यवस्था की गंभीर विफलता है।