विशेष आग्रह :
भाजपा की गलत नीतियों की वजह से उप्र में जो असहनीय बिजली संकट चल रहा ��ै, उसके लिए बिजली विभाग के कनिष्ठ कर्मचारियों या लाइनमैन पर जनता अपना गुस्सा न निकाले। बिजली विभाग के हज़ारों संविदा कर्मचारियों की छँटनी के बाद वो पहले से ही बहुत दबाव में काम कर रहे हैं।
दरअसल इस ‘महा विद्युत आपदा’ के लिए भाजपा सरकार, भाजपा के बिजली मंत्री, भाजपा के सांसद, विधायक, मेयर, पार्षद से लेकर बिजली विभाग के उच्चाधिकारी व भ्रष्ट ठेकेदार ज़िम्मेदार हैं, जो इस नाकाम सत्ता में अप्रत��यक्ष-प्रत्यक्ष रूप से हिस्सेदार हैं। सवाल-जवाब इन लोगों से किया जाए।
सच तो ये है कि भाजपा सरकार ने बिजली व्यवस्था को ठप्प कर दिया है। न नई माँग की पूर्ति के लिए जेनरेशन हेतु कोई नया पावर प्लांट लगाया है, न ट्रांसमिशन के लिए नई व्यवस्था की गयी है, न डिस्ट्रीब्यूशन के लिए। ��पर से स्मार्ट मीटर का महाभ्रष्टाचार भी करेले पर नीम चढ़ा रहा है।
ये बेहद निंदनीय है कि भाजपाई और उनके संगी-साथी बिजली की शिकायत करनेवालों को धमका रहे है और शिकायतकर्ताओं पर FIR तक हो रही है। अस्पताल तक बिजली के बिना बेहद परेशान हैं। जेनरेटर महंगे डीज़ल की वजह से शांत हैं।
हमारा ये भी आग्रह है कि घर के बड़े बुजुर्गों, बीमारों व बच्चों का विशेष ख़्याल रखें और जब भी बिजली आए तो मोबाइल चार्ज कर ल���ं और टार्च तैयार करके रखें। ये भी ध्यान रखें कि अंधेरे का फ़ायदा उठाकर कोई असामाजिक तत्व आपके वाहनों, घर के सामनों पर हाथ न साफ़ कर जाएं। पशुओं का भी विशेष ध्यान रखें। बिजली की कमी से पीने की पानी का भी सीधा संबंध है, इसलिए पानी भरकर रखें और गर्मी से बचने के लिए पानी पीते रहें।
��पका
अखिलेश
उप्र में दिनदहाड़े लुटते ‘सुनारों की सुरक्षा’ की समस्या अभी सुलझी नहीं थी कि तब तक ‘सोनाबंदी’ का व्यापार-चौपट करनेवाला आह्वान आ गया और फिर ‘सोने पर इम्पोर्ट ड्यूटी ढाई गुना बढ़ाने का फ़रमान’।
ज़ेवरात-गहनों के व्यापार में बड़ी कंपनियों के आ जाने से ये छोटे सुनार वैसे ही कम्पटीशन नहीं कर पा रहे थे, अब उन्हें लग रहा है कि शायद बड़ी कंपनियों से एकमुश्त कमीशन लेने के चक्कर में ही भाजपाइयों ने युद्ध के बहाने, सोनाबंदी की बात करी है। भाजपाई जानते हैं कि एक साल ��ें तो लाखों सुनार चौपट होकर अपना काम बंद कर देंगे, तब ये बड़ी कंपनियाँ हर छोटे-बड़े शहर में अपने शोरूम खोलकर मनमाने दाम पर गहने बेचकर जनता को लूटेंगी और भाजपा को अकूत धन कमाकर देंगी। आज भाजपाई नीतियों के मारे सुनार-स्वर्णकार समाज की इन समस्याओं को सुनकर लगा कि सबसे अधिक धन लगाकर व्यापार करनेवाले लोगों के चमचमाते शोरूमों और ज्वेलरी शॉप्स की चमक जब धूमिल हो गई है तो बाक़ी दूसरे काम-कारोबार का ���्या। ये लोग कहाँ जाएंगे और कैसे अपने परिवारों को पालेंगे।
भाजपा सरकार की नीतियों ने देश की अर्थव्यवस्था को अनर्थ-व्यवस्था में बदल दिया है।आम लोगों के जीवन को संकट से भर दिया है।
सुनार कहे आज का, नहीं चाहिए भाजपा!
विपक्ष को -20 सीट लेकर चलना पड़ेगा... मैं फिर कहता हूँ बिहार भाजपा जीती बंगाल भाजपा जीती.... परन्तु उत्तर प्रदेश 2027 का चुनाव अलग है..... आप बड़ा लक्ष्य लेकर चलिए क्योंकि आप विपक्ष में हैं 275+ सीट पर मेहनत कर के चलिए अभी 1 साल है.... तब आप
अब क्या सत्ताधारी राजनीति को पाताल से भ��� नीचे ले जाएंगे। देश के राजनीतिक इतिहास का ये एक घनघोर ‘काला दिन’ है। आज पूरा देश आक्रोशित है और लोकतंत्र व्यथित।
चुनावी व्यवस्था के नाम पर केंद्रीय बलों का जो दुरुपयोग मतगणना में आज बंगाल में हुआ है, ठीक वैसा ही घपला 2022 के यूपी विधानसभा चुनाव में अधिकांश जगह किया गया था, जिसकी साक्षात गवाह कन्नौज की विधानसभाएं थीं। फिर इसी निंदनीय मॉडल को फ़र्रुख़ाबाद के 2024 लोकसभा चुनाव में दोहराया गया था।
सब जानते हैं क्या हुआ है और सच क्या है और जनमत की खुली लूट कैसे हुई है।
घोर, घोर, घोर निंदनीय!!!
@yadavakhilesh विपक्ष को -20 सीट लेकर चलना पड़ेगा... मैं फिर कहता हूँ बिहार भाजपा जीती बंगाल भाजपा जीती.... परन्तु उत्तर प्रदेश 2027 का चुनाव अलग है..... आप ब���़ा लक्ष्य लेकर चलिए क्योंकि आप विपक्ष में हैं 275+ सीट पर मेहनत कर के चलिए अभी 1 साल है.... तब आप 220 पाकर सरकार बना पाएंगे...
आदरणीय सुषमा खरकवाल जी,
भारतीय जनता पार्टी
मेयर, लखनऊ
आप कृपया अपनी राजनीतिक मजबूरीवश मेरी दिवंगत माँ का नाम लेकर एक महिला के रूप ��ें एक अन्य महिला का अपमान न करें। नारी के सम्मान में आपसे बस इतना आग्रह है।
यदि आपके घर में कोई बड़े-बुजुर्ग हों या बच्चे तो उनसे पूछ लीजिए कि आपका ये अति निंदनीय द्वेषपूर्ण बयान उचित है या नहीं। बाक़ी आप स्वयं एक महिला हैं। महिला ही जब महिला का अपमान करेगी तो कौन आपको नैतिक रूप से सही कहेगा।
भारतीय समाज में कभी भी, किसी की भी माँ का अपमान स्वीकार्य नहीं है। आपका राजनीतिक भविष्य उज्ज्वल होत��� अगर आप उसे नैतिक मानकों पर इतना नीचे न ले जातीं, आज आपके समर्थक भी शर्मिंदा हैं। जिनको प्रभावित करने के लिए आप अपना स्तर गिरा रही हैं, वो किसी के भी सगे नहीं हैं। आप अपना स्तर बनाए रखें और संतुलन भी।
मैं आपसे किसी क्षमा की भी अपेक्षा नहीं रखता हूँ और न ही ऐसा कहने के बाद क्षमा के कोई
मायने रह जाते हैं। आपका अकेले में बैठकर जो पछतावा होगा, हमारे लिए इतना ही बहु�� है।
सादर
आपका भाई
अखिलेश
एक ग़रीब चायवाले को एल्युमीनियम का बर्तन इस्तेमाल करने पर सरकारी विभाग और भाजपाइयों के गुर्गों द्वारा प्रताड़ित किया जा रहा है, तो क्या दुनिया के बड़े ब्रैंड्स के बर्तन-कुकर बेचने या घरों में रखने पर भी छापेमारी होगी?
और हाँ ये भी दिखवा लीजिए कि जब आपके यहाँ खिचड़ी बनती है तो उसका बर्तन कहीं एल्युमीनियम का तो नहीं है या फिर उसक��� भी सोने में ढलवा लिया है।