यूपी होमगार्ड भर्ती में वेटिंग लिस्ट जारी होनी ही चाहिए…
आप सभी को आज सुबह 10:00 बजे ट्विटर (X) पर ज्यादा से ज्यादा संख्या में सभी युवा साथियों को ट्वीट करना हैl
#UP_Homeguard_WaitingList_जारी_करो
यूपी होमगार्ड वेटिंग लिस्ट जारी होना ही चाहिए।
#UP_Homeguard_WaitingList_जारी_करो
यूपी होमगार्ड वेटिंग लिस्ट को लेकर संबंधित विभाग मंत्री और सरकार वेटिंग लिस्ट के प्रावधान को सुनिश्चित करें, नियमावली में बदलाव करें।
वेटिंग लिस्ट के मुद्दे को लेकर सरकार को जवाब देना ही पड़ेगा ?
वेटिंग लिस्ट जारी करना ही पड़ेगा।
जब पड़ोसी राज्य भर्तियों में वेटिंग लिस्ट का प्रावधान कर सकते हैं तो उत्तर प्रदेश सरकार क्यों नहीं कर सकती ?
अन्य भर्तियो में ज्वाइन करने वाले अभ्यर्थियों की वजह से यूपी होमगार्ड में खाली हो रहे हजारों पदों पर दशमलव के कु�� अंकों या एक दो नंबरों से मेरिट ��िस्ट से बाहर होने वाले मेहनती और होनहार युवा साथियों को मौका मिलना ही चाहिए।
#UP_Homeguard_WaitingList_जारी_करो
@dharmindia51
@HomeGuardsUP
@CMOfficeUP
@upprpb
@InfoDeptUP
UP Homeguard Waiting List जारी करो
दशमलव के कुछ अंको या नंबरों से लाखों अभ्यार्थियों को बाहर का रास्ता दिखाकर उनके मेहनत और भविष्य के साथ खिलवाड़ नहीं किया जाना चाहिए।
3 अक्टूबर 2026 को यूपी होमगार्ड 41,424 भर्ती परीक्षा का परिणाम जारी किया गया है।
इस परीक्षा को 19 लाख से ज्यादा अभ्यार्थियों ने दिया था।
इस भर्ती में सम्मिलित लगभग 40 से 50% अभ्यर्थी 32,679 यूपी पुलिस कांस्टेबल भर्ती प्रक्रिया में चयनित अभ्यर्थी हैं, जिनकी अभी शारीरिक दक्षता परीक्षण और रनिंग की प्रक्रिया चल रही है।
इसी तरह अन्य भर्ती प्रक्रियाओ में भी चयनित अभ्यर्थी हो सकते हैं जो यूपी होमगार्ड में भी चयनित है और वह यूपी होमगार्ड की भर्ती प्रक्रिया में भाग नहीं लेंगे जिस वजह से वह अपनी सीट छोड़ेंगे।
इसलिए छोड़े गए हजारों अभ्यर्थियों के द्वारा सीटों पर उनसे पीछे कतार में खड़े दशमलव या कुछ नंबरों से बाहर हो रहे युवाओं को मौका मिलना ��ी चाहिए।
इसलिए यूपी होमगार्ड भर्ती प्रक्रिया में वेटिंग लिस्ट जारी होना चाहिए।
@myogiadityanath @CMOfficeUP @dharmindia51 @homegards2022 @upprpb @HomeGuardsUP
#UP_Homeguard_Waiting_List_जारी_करो
#UPHomeguard
जब चुनाव होता है तो मोदी सफ़ाई कर्मियों का पैर धोता है।
जब नोटबंदी और करोना होता है तो मोदी ललिता पवार की तरह रोता है।
जब जंतर मंतर पर अनशन होता है, तो मोदी विदेशों की सैर करके, भरपेट ख़ाकर आराम से सोता है।
जानते हैं क्यों?
क्यूँकि मोदी जानता जब चुनाव आयेगा युवाओं को नफ़रत की पुड़िया बाँट दूँगा BJP का काम ��ो जायेगा।
युवाशक्ति तुम्हे समझना होगा मोदी तुम्हें एक वोट के सिवा कुछ नही समझता।
न मोदी बोलेगा न गोदी तुम कब तक खामोश रहोगे युवा शक्ति?
#I_support_sonam_wangchuk
19 दिनों से एक शिक्षाविद् अनशन पर है, और सरकार पूरी तरह मौन है। वांगचुक जी बिल्कुल सही कह रहे हैं जब जवाबदेही (Accountability) की कोई शुरुआत ही नहीं होगी, तो पर्चे तो लीक होंगे ही और बेईमानी का बाज़ार भी सजेगा।
छात्रों के भविष्य से लेकर देश की ईमानदारी तक, आज सब कुछ नीलाम हो रहा है।
परित्राणाय साधूनां विनाशाय च दुष्कृताम्। धर्मसंस्थापनार्थाय सम्भवामि युगे युगे॥ (सज्जनों के कल्याण, बुराई के विनाश और समाज में सत्य व न्याय की दोबारा स्थापना के लिए हर युग में चेतना जागृत होती है।)
जब पूरा तंत्र गहरी नींद में सो जाता है, तब समाज और न्याय की रक्षा के लिए सोनम वांगचुक जी जैसी निस्वार्थ आत्माओं को तपना पड़ता है।
यह अनशन केवल एक व्यवस्था को सुधारने की मांग नहीं, ���ल्कि समाज में सत्य और न्याय की स्थापना के लिए जागृत हुई वही परम चेतना है जिसका जिक्र हमारे शास्त्रों में है।
जिस व्यक्तित्व ने देश की सीमाओं की सुरक्षा, पर्यावरण और भारत के शीर्ष शान लद्दाख की पहचान के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया, जिसने न कभी अपने लिए सत्ता मांगी और न कोई विशेषाधिकार, आज वही राष्ट्रभक्त आमरण अनशन पर बैठने को मजबूर है।
इस भीषण उमस और गर्मी के बीच अनशन को आज लगातार 18 दिन ���ो चुके हैं, शरीर से 8 किलो से ज्यादा वज�� घट चुका है और स्वास्थ्य लगातार गिर रहा है, लेकिन हौसला अडिग है। यह बेहद निराशाजनक और चिंताजनक है कि इतने दिनों के बाद भी सत्ता के गलियारों में पूरी तरह सन्नाटा पसरा हुआ है।
शासन में बैठे किसी भी ज़िम्मेदार नेतृत्व की तरफ से इस गंभीर विषय पर अब तक कोई जवाबदेही न आना बेहद ही निंदनीय है।
आखिर यह लाचार व्यवस्था देश के लिए अपना सब कुछ न्यौछावर करने वाले सच्चे सपूतों के प्रति इतनी असंवेदनशील कैस�� हो सकती है?
जो इंसान खुद के लिए नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य और देश की अखंडता के लिए अपने प्राणों की बाजी लगा रहा है, उसकी आवाज़ को इस तरह अनसुना करना पूरे तंत्र की नाकामी को दर्शाता है।
इतिहास गवाह है कि जब-जब समाज की भलाई के लिए ऐसे विद्वान, वैज्ञानिक और सच्चे राष्ट्रभक्तों को अपने प्राणों की बाजी लगानी पड़ी है, तब-तब सत्ता क��� घमंड धरातल पर आकर गिरा है।