कॉकरोच वाले प्रोटेस्ट से सिर्फ दो नैरेटिव बन पाए 👇
1. जनता मोदी सरकार के खिलाफ नहीं है, इसलिए प्रदर्शन में भीड़ नहीं है. देश में सब ठीक है, जनता खुश है.
2. मोदी सरकार कितनी अच्छी है, जो प्रदर्शन करने दे रही है. देश में लोकतंत्र कायम है.
मतलब इस प्रदर्शन से मोदी को फायदा ही हुआ है.
लोग कुछ दिन पहले तक EVM और चुनाव आयोग की धांधली पर बात कर रहे थे. उनके मन में बैठ गया था कि चुनाव में गड़बड़ी हो रही है.
अब ये मुद्दा गायब हो चला है.
इसके उलट अब लोग मोदी सरकार लोकतंत्र का सम्मान करती है, प्रदर्शन करने दे रही है, लोगों को आवाज उठाने दे रही है - ऐसे फर्जी नैरेटिव में फंस रहे हैं.
इसलिए मैं कहता हूं - खुद BJP चाहती है कि ये प्रदर्शन हो. ये प्रदर्शन जितना चलेगा, BJP को उतना फायदा होगा.
#राहुल_गांधी माफी वीर नहीं, योद्धा हैं, सावरकर की अवैध औलादें जान लें!
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने भोपाल की MP-MLA कोर्ट को राहुल गांधी के खिलाफ चल रहे मान हानि के मामले को बंद करने का निर्देश दिया है। इस मामले की सुनवाई जस्टिस प्रमोद कुमार अग्रवाल की सिंगल-जज बेंच ने की। सुनवाई के दौरान, राहुल गांधी ने एक हलफनामा पेश किया जिसमें कहा गया कि उन्होंने गलतफहमी के कारण कार्तिकेय सिंह चौहान का नाम लिया था और इस कन्फ्यूजन के लिए खेद व्यक्त किया, माफी नहीं मांगी।
हाई कोर्ट ने कार्तिकेय सिंह चौहान को जवाब दाखिल करने का मौका दिया। कार्तिकेय ने अपने वकील के जरिए दाखिल हलफनामे में कोर्ट से कहा कि चूंकि राहुल गांधी ने अनजाने में उनका नाम लिया था। जिसके लिए सच सामने आने पर खेद व्यक्त किया था, इसलिए उन्हें अब इस मामले को बंद करने पर कोई आपत्ति नहीं है। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद, हाई कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया, जिसमें राहुल गांधी को राहत दी गई और मान हानि का मामला बंद करने का आदेश दिया गया।
इसके बाद, संघी गोबर दिमाग BJP के IT सेल ने इस मामले के बारे में पोस्ट किया। यह तब है जब कई मामलों में उनके पास बचाव का कोई आधार नहीं है। सत्य यह है कि पनामा पेपर्स लीक मामले में छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के बेटे अभिषेक सिंह (पूर्व सांसद) का नाम सामने आया था। उन पर ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड्स में स्थित 'क्वेस्ट हाइट्स लिमिटेड' और 'शेयर कॉर्प लिमिटेड' जैसी ऑफशोर कंपनियों में गुप्त विदेशी संपत्ति और शेयर रखने के आरोप लगे थे। कांग्रेस पार्टी ने इस मामले की उच्च-स्तरीय न्यायिक जांच की मांग की थी। पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह और उनके बेटे अभिषेक सिंह का कहना है कि ये आरोप बेबुनियाद और राजनीतिक रूप से प्रेरित हैं। यानी राहुल गांधी ने रमन सिंह के बेटे के बजाय शिवराज सिंह के बेटे का नाम एक राजनीतिक रैली में लिया था। यहां गलती एक भ्रम के कारण हुई थी। यही वजह है कि राहुल गांधी ने दया या क्षमा याचिका नहीं दी बल्कि भ्रम में लिये गये नाम के लिए खेद जताया। महात्मा गांधी कहते थे कि बहादुर व्यक्ति ही अपनी गलती को स्वीकार करता है, कायर नहीं।
इसके अलावा, न तो जज लोया की मौत की कोई जांच हुई और न ही हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी से जुड़े मामले की। पुणे की अदालत में मान हानि के एक मामले की सुनवाई के दौरान, वीर सावरकर के पोते (खासकर, सावरकर के छोटे भाई के पोते) सत्याकी सावरकर ने माना कि विनायक दामोदर सावरकर ने ब्रिटिश सरकार के सामने 10 दया याचिकाएं दायर की थीं। हालांकि, उन्होंने यह भी साफ किया कि इन याचिकाओं का मतलब ब्रिटिश सरकार के प्रति वफादारी या समर्पण नहीं था। इसके बावजूद, यह तय करना अमित मालवीय का काम है कि राहुल गांधी को "माफ़ी वीर" (दया याचिकाओं के हीरो सावरकर) कहकर वे अपने ही नेता का सम्मान कर रहे हैं या अपमान। अगर राहुल गांधी सच में कोई असर डालते, तो अमित मालवीय जैसे अनगिनत लोग उनके लिए यह सब करने को तैयार होते—अपने खर्च पर और बिना किसी सरकारी वेतन या सुविधाओं के।
फिलहाल, 'संघ परिवार' की अगुवाई करने वाला संगठन खुद मुश्किल में है। 'वॉशिंग मशीन पार्टी' अलग-अलग राजनीतिक गुटों के भ्रष्ट लोगों से भरी हुई है; अब, डोनेशन फंड चुराने के आरोपी लोगों को बचाने की कोशिशें भी होती दिख रही हैं। कई नेताओं पर लगे आरोपों की जांच नहीं हुई है। कल धर्मेंद्र प्रधान की तारीफ हुई थी कि उन्होंने बिना किसी लीक के NEET की दोबारा परीक्षा कराई, फिर भी आज एक और लीक की खबर सामने आई है। अगर 'यह' प्रधान जिम्मेदार नहीं हैं, तो 'वह' निश्चित रूप से हैं—आखिरकार, यह 'डबल-इंजन' सरकार है। यहां, माफी मांगने के बजाय, चोरी हुए डोनेशन फंड की रिकवरी के बाद भी बेशर्मी भरा रवैया बना हुआ है।
बेशक, लालच देकर ऐसे काम के लिए दस या बीस लोगों को आसानी से भर्ती किया जा सकता है।
@RahulGandhi@priyankagandhi@INCIndia@ChouhanShivraj@BJP4India
जितनी जल्दी RSS-भाजपा ने ‘चंदा चोरी’ से ‘चढ़ावा चोरी’ का सफ़र तय किया
उससे भी जल्दी कुछ एंकर्स ने ‘पत्रकारिता’ से सत्ता की ‘चाटुकारिता’ का
पहली बात-‘मुँह में राम बगल में छुरी’ वाले संघी और उनके गुर्गे कभी राम भक्त हो ही नहीं सकते
दूसरी बात - ‘राम मंदिर’ बनाने का निर्णय मोदी सरकार ने Ordinance ला कर नहीं लिया..Supreme Court की Judgement के कारण मंदिर निर्माण शुरु हुआ
तीसरी बात - मंदिर निर्माण और राम लला को ‘फटे टेंट’ से निकालने के के नाम पर दशकों तक चंदा चोरी हुआ, फिर भी श्रद्धालुओं के दान से राम-मन्दिर का निर्माण हुई - मोदी और अमित शाह ने अपने बाप-दादा की संपत्ति बेच कर निर्माण नहीं करवाया !
जिन आडवाणी जी को ये मैडम राम-मन्दिर निर्माण का प्रणेता बता रही हैं - उन्हें तो खुद मोदी जी ने ही हाशिए पर पटक दिया
आखिरी बात - सरकारें ‘राम’ के नाम पर नहीं ‘काम’ के नाम पर बननी चाहिए..प्रभु श्री राम को राजनैतिक दलदल में घसीटने वाले संघी-भाजपायी सबसे बड़े ‘राम-द्रोही’ हैं
‘राम-द्रोहियों’ की सरकार तीन बार गिरायी - कम किया..असल में तो ‘राम-द्रोहियों’ की सरकार बननी ही नहीं चाहिए थी, RSS से बैन हटना ही नहीं चाहिए था !!!
`یَاد ہے۔۔۔؟`
چھوٹے چھوٹے لَمحوں پَر ہَنست ے تھے
اَب بَڑے بَڑے دِن خَاموش گُزَر جاتے ہیں۔❤️🩹💯
Remember..
Were laughing at small moments
Now the big days pass silently.❤️🩹💯
भगवान को किसी के चंदे की आवश्यकता नहीं है।हम उस भगवान को क्या दे सकते हैं जिसने आपको चंदा देने लायक़ बनाया।अगर देश के लोग गाँव,क़स्बे और शहर में चंदा इकट्ठा करके स्कूल,कॉलेज और अस्पताल बनाएँ तो इस देश की बड़ी आबादी का भला होगा।सोचिए पूरे देश में लोग कितने हज़ार करोड़ ₹ का दान करते है।यह सरकारी आमदनी क्यों नहीं हो सकती है ?
मैडम जी
चंदा देश के लगभग सभी ने दिया है
धर्म पार्टी से उठकर
यहां तक कि अल्पसंख्यकों ने भी दिया है
कार सेवकों पर जिन्होंने गोली चलाई थी
वो खुद मंदिर ट्रस्ट में है
नाम तो आप जानती होगी
मंदिर ट्रस्ट ने जो कार सेवक अपने प्राण गवाए थे उनकी आर्थिक मदद क्यों नहीं कि
उनके परिवार के रोजगार शिक्षा का खर्च क्यों नहीं वहन किया
राम जी मर्यादा पुरुषोत्तम हैं
क्या भाजपा ने मर्यादा रखी थी उद्घाटन में
सनातन धर्म के सर्वोच्च पद पर बैठे
चारों शंकराचार्य क्यों नहीं आए उद्घाटन में
मैडम जी मंदिर का उद्घाटन होता
तो सभी आते यह तो भाजपा का उद्घाटन था
प्रधानमंत्री ने उद्घाटन किया
प्रधानमंत्री ने ही ट्रस्ट बनाया
प्रधानमंत्री ने ही न्यौता दिया
जिसको मन किया बुलाया
जिसको मन नहीं किया नहीं बुलाया
और एक बात
जब बुलावा आएगा तब जाएंगे
चंदा तो सभी का शामिल है
भूलिएगा नहीं
💥 "रिश्ते सिर्फ राजनीति से नहीं, भरोसे से बनते हैं… और कुछ रिश्ते वक्त की हर परीक्षा से गुजरकर और मजबूत हो जाते हैं",
1991…
राजीव गांधी पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी के समर्थन में चुनाव प्रचार करने पहुंचे,
कुछ ही दिनों बाद देश ने राजीव गांधी को खो दिया,
उस कठिन दौर में ममता बनर्जी दिल्ली पहुंचीं और सोनिया गांधी के साथ खड़ी रहीं,
फिर समय बदला…
ममता ने अलग पार्टी बनाई, लेकिन यह भी कहा कि यदि सोनिया गांधी चाहें तो वह कांग्रेस में वापस लौट सकती हैं,
2019 में राहुल गांधी और तेजस्वी यादव बंगाल पहुंचे, तो ममता बनर्जी ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया और अपने हाथों से भोजन परोसकर एक अलग संदेश दिया,
इन्हीं घटनाओं के आधार पर राजनीतिक गलियारों में वर्षों से यह चर्चा होती रही है कि गांधी परिवार और ममता बनर्जी के बीच सिर्फ राजनीतिक नहीं, बल्कि पुराने विश्वास और व्यक्तिगत सम्मान का रिश्ता भी रहा है,
आज जब भी राष्ट्रीय राजनीति में नए समीकरण बनते हैं या ममता बनर्जी किसी बड़े राजनीतिक मोड़ पर होती हैं, तो इन पुराने रिश्तों की चर्चा फिर से शुरू हो जाती है,
आपकी राय क्या है?
क्या यह रिश्ता सिर्फ राजनीतिक रणनीति है, या दशकों पुराने विश्वास और सम्मान की कहानी?
अपनी राय कमेंट में जरूर लिखें।
The death toll in #Venezuela's earthquakes has risen to 1,430. The latest figures were released as rescuers continued the search for survivors of the one-two punch of 7.2 and 7.5 magnitude earthquakes that devastated the South American nation on June 24. Families have reported at least 68,900 people missing.
The Modi Government, vengeful and petty as ever, bulldozed the repeal of MGNREGA through Parliament without any thorough consultation with the Parliamentary Standing Committee on Rural Development, State Governments, or other relevant stakeholders. Now it emerges that several states have raised concerns regarding its substitute VB G RAM G scheduled for launch from July 1, 2026.
BJP-governed states like Madhya Pradesh, Bihar, and Uttarakhand have opposed the huge additional expenditure burden that is set to be levied on states. Four other State governments have opposed the blackout period of the scheme during the peak agricultural season. At least five states have sought an increase in the wages of rural workers.
The Rural Development Minister’s own home state is voicing concerns around the Modi Government’s new pet project.
MGNREGA guaranteed right to work derived from the Constitution. VB G RAM G will guarantee only centralisation and further financial stress on states.